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सावधान: आपके पलक पर सूजन-गांठ... कहीं कैंसर तो नहीं

Mon, 03 Apr 2023 12:00 PM IST
vivek shukla नीरज मिश्रा, गोरखपुर।
नीरज मिश्रा, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 03 Apr 2023 12:00 PM IST
सार

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. रामकुमार जायसवाल ने बताया कि पलकों के कैंसर के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। यह बीमारी पहले 50 वर्ष से अधिक लोगों में मिलती थी, लेकिन अब यह छोटे बच्चों में भी देखने को मिल रही है। पांच से 15 वर्ष तक के बच्चों में रेटिनोब्लास्टोमा नाम का जानलेवा कैंसर मिल रहा है।

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cause of cancer of eyelids not known in 50 percent of cases
डॉ. रामकुमार जायसवाल। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

पलकों पर बार-बार सूजन हो रही है, गांठ बन रही है या घाव हो रहा है तो सावधान रहने की जरूरत है, यह कैंसर भी हो सकता है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग में हर माह ऐसे 35 से 40 मरीज पहुंच रहे हैं, जिसमें कैंसर की पुष्टि हो रही है। इनमें से 50 फीसदी मरीज कैंसर के तीसरे और चौथे स्टेज में पहुंच रहे हैं, जिन्हें इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर करना पड़ रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि पलकों का कैंसर धीरे-धीरे बढ़कर शरीर के किसी भी अंग तक पहुंच सकता है। इसलिए समय-समय पर आंखों की जांच कराते रहें।

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बीआरडी मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. रामकुमार जायसवाल ने बताया कि पलकों के कैंसर के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। यह बीमारी पहले 50 वर्ष से अधिक लोगों में मिलती थी, लेकिन अब यह छोटे बच्चों में भी देखने को मिल रही है।
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पांच से 15 वर्ष तक के बच्चों में रेटिनोब्लास्टोमा नाम का जानलेवा कैंसर मिल रहा है। राहत की बात यह है कि बच्चों के आंखों में दिक्कत होने पर अभिभावक समय पर इलाज के लिए आ जा रहे हैं, जिसकी वजह से उनका सही समय पर इलाज हो जा रहा है।
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वहीं, 50 वर्ष से ऊपर के मरीजों में कार्सिनोमा कैंसर हो रहा है। इसमें 50 फीसदी मरीज ऐसे समय आ रहे हैं, जब कैंसर तीसरे और चौथे स्टेज में पहुंच जा रहा है, जो आंखों की पलकों के साथ-साथ आंखों के अंदर मेलिंगनेंट कैंसर का रूप ले ले रहा है, जो ज्यादा खतरनाक है। मेलिंगनेंट कैंसर आंख के किसी भी भाग में हो सकता है।

 

कठिन है रेडियोथेरेपी, करना पड़ता है हॉयर सेंटर रेफर

शुरुआती दौर में आने वाले मरीजों का इलाज संभव है, लेकिन तीसरे और चौथे स्टेज के मरीजों की सर्जरी बेहद कठिन होती है। इसमें मरीजों के पलकों पर रेडियोथेरपी की जाती है। अगर जरा सी चूक होती है तो इसमें आंखों की रोशनी भी जा सकती है। ऐसे मरीजों को इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर करना पड़ता है। रेफर करने वाले मेलिंगनेंट कैंसर वाले ज्यादा हैं। यह आंख के पुतली से लेकर आंख के अंदर भी हो सकता है।

बिनाइन नेत्र कैंसर से आंख की नसों पर पड़ रहा प्रभाव
डॉ. रामकुमार जायसवाल ने बताया कि कैंसर आंखों की पलकों से लेकर आंख के किसी भी भाग में हो सकता है। पलक वाले कैंसर में पलकों में गिल्टियां बन जाती है या फिर बार-बार पलक पर सूजन हो जाता है। जांच में पुष्टि के बाद ऑपरेशन, कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी से ऐसे मरीजों का इलाज किया जाता है। बताया कि बेनाइन नेत्र कैंसर में आंख की नसों पर दबाव पड़ता है। इससे रोशनी कम होने का खतरा रहता है।वहीं, मेलिगनेंट नेत्र कैंसर आंखों के साथ ही शरीर के अन्य भागों (लीवर, किडनी, हृदय, प्रोस्टेट आदि) में खून के माध्यम से फैलता है। इसके इलाज में देरी से जान चली जाती है।

50 फीसदी पलकों के कैंसर के कारण का पता नहीं
डॉ. रामकुमार जायसवाल ने बताया कि पलकों के कैंसर का कारण 50 फीसदी मामलों में पता नहीं चल पाता है। इसे साइंस की भाषा में इडियोपैथी कहते हैं। जबकि 50 फीसदी कारणों में कोशिकाओं में म्यूटेशन आर्सेनिक, बेंजीन जैसे जहरीले रसायन का प्रभाव और वायरस का संक्रमण होता है।

 

डॉक्टर से तत्काल लें सलाह

डॉ. रामकुमार जायसवाल ने बताया कि पलकों के अंदर गांठ का बनना, सूजन होना, घाव होना, पलक का गलत दिशा में मुड़ना या फिर बार-बार बरौनी गिर रहा है तो ऐसे लोगों को सावधान रहने की जरूरत है। ऐसे लक्षण हो रहे हैं तो तत्काल डॉक्टर से सलाह लें। इलाज के बाद भी वह डॉक्टरों के संपर्क में कुछ दिन तक जरूर रहें।

आंख में इस तरह के कैंसर वाले मरीजों की भी बढ़ रही संख्या
डॉ. रामकुमार जायसवाल ने बताया कि नेत्र कैंसर जांच की अलग से क्लीनिक चलाई जाती है। इसमें आंखों में होने वाले ट्यूमर कैंसर के मरीज आते हैं। इनमें सबसे अधिक पलक, मेलिंगनेंट, रेटिनोब्लास्टोमा, आंख की सफेद झिल्ली के कैंसर, नेत्र गुहा और नाक, साइनस से आंख में पहुंचने वाले कैंसर के मरीज आ रहे हैं। हालांकि इनमें सबसे कम संख्या नाक, साइनस से आंख में पहुंचने वाले मरीजों की है।

 

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