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Gorakhpur News: खुले नालों से आफत, दो साल में सात लोगों की मौत
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गोरखपुर। शहर में खुले नाले लोगों की जान के लिए खतरा बने हुए हैं। पिछले दो वर्षों में सात लोग इन नालों में गिरकर जान गंवा चुके हैं। इसके बावजूद व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ है। जिन जगहों पर हादसे हुए, वहां भी कई स्थानों पर नालों को ढकने के लिए स्लैब नहीं लगाए गए हैं। ऐसे में बच्चों, बुजुर्गों और अनजान रास्तों से गुजरने वाले लोगों पर हादसे का खतरा मंडराता रहता है।
फातिमा बाईपास पर बांसमंडी के सामने देशी शराब की दुकान के पास कई वर्षों से नाला खुला पड़ा है। स्लैब टूटने से यहां गहरा गड्ढा बन गया है। नाले की हालत भी जर्जर हो चुकी है। सोमवार दोपहर करीब एक बजे मौके पर मिले श्रवण कुमार ने बताया कि बाईपास से रोजाना सैकड़ों वाहन और राहगीर गुजरते हैं। रात में अंधेरे के कारण नाला दिखाई नहीं देता, जिससे हादसे का खतरा बना रहता है। बरसात में स्थिति और गंभीर हो जाती है। जिम्मेदारों ने सुरक्षा के नाम पर हरे प्लास्टिक और बांस का सहारा लेकर खानापूर्ति कर दी है।
संगम चौराहे पर रामप्यारे कॉम्प्लेक्स के सामने भी कई जगह नाला खुला है। यहां स्लैब नहीं लगाए गए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस नाले में गिरने से अब तक दो लोगों की मौत हो चुकी है। फातिमा बाईपास स्थित गोड़धोइया नाले की दाईं ओर से खजांची चौराहे के फ्लाईओवर तक करीब 300 मीटर लंबा नाला अधूरा पड़ा है। इसी नाले के जरिये 20 से अधिक कॉलोनियों का पानी गोड़धोइया नाले में जाता है।
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हादसों के बाद कहीं स्लैब रखे, कहीं अब भी खतरा : मानबेला में जिस जगह बच्चा खुले नाले में गिरा था, वहां स्लैब रख दिया गया है। तिवारीपुर के घोषीपुरवा में भी बच्ची की मौत के बाद हादसे वाली जगह पर स्लैब लगाया गया। हालांकि, शहर के दूसरे इलाकों में खुले नाले अब भी लोगों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
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फातिमा बाईपास पर बांसमंडी के सामने देशी शराब की दुकान के पास कई वर्षों से नाला खुला पड़ा है। स्लैब टूटने से यहां गहरा गड्ढा बन गया है। नाले की हालत भी जर्जर हो चुकी है। सोमवार दोपहर करीब एक बजे मौके पर मिले श्रवण कुमार ने बताया कि बाईपास से रोजाना सैकड़ों वाहन और राहगीर गुजरते हैं। रात में अंधेरे के कारण नाला दिखाई नहीं देता, जिससे हादसे का खतरा बना रहता है। बरसात में स्थिति और गंभीर हो जाती है। जिम्मेदारों ने सुरक्षा के नाम पर हरे प्लास्टिक और बांस का सहारा लेकर खानापूर्ति कर दी है।
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संगम चौराहे पर रामप्यारे कॉम्प्लेक्स के सामने भी कई जगह नाला खुला है। यहां स्लैब नहीं लगाए गए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस नाले में गिरने से अब तक दो लोगों की मौत हो चुकी है। फातिमा बाईपास स्थित गोड़धोइया नाले की दाईं ओर से खजांची चौराहे के फ्लाईओवर तक करीब 300 मीटर लंबा नाला अधूरा पड़ा है। इसी नाले के जरिये 20 से अधिक कॉलोनियों का पानी गोड़धोइया नाले में जाता है।
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हादसों के बाद कहीं स्लैब रखे, कहीं अब भी खतरा : मानबेला में जिस जगह बच्चा खुले नाले में गिरा था, वहां स्लैब रख दिया गया है। तिवारीपुर के घोषीपुरवा में भी बच्ची की मौत के बाद हादसे वाली जगह पर स्लैब लगाया गया। हालांकि, शहर के दूसरे इलाकों में खुले नाले अब भी लोगों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
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