कैसे होगा कोरोना पर वार: संक्रमण खत्म होने के कगार पर, नहीं आई ओमिश्योर किट
ओमिश्योर किट से होनी थी नए वैरिएंट की जांच, आरएमआरसी को मिलनी थी किट।
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गोरखपुर में संक्रमण खत्म होने के कगार पर है, लेकिन अब तक ओमिश्योर किट नहीं मिली है। इससे कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन की पहचान होनी थी। आरटीपीसीआर मशीन में लगाकर इससे कोरोना जांच भी हो जाती है। स्वेदशी को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर ) की ओर से मंजूरी भी मिल गई है।
जानकारी के मुताबिक, जिले में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या कम होती जा रही है। लेकिन, इन सबके बीच स्वास्थ्य विभाग को अब तक यह जानकारी नहीं मिल पाई है कि आखिर कौन सा वैरिएंट जिले में संक्रमण फैला रहा है। इसे लेकर कई बार जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए सैंपल भी भेजे गए, लेकिन उनकी रिपोर्ट नहीं आई।
ऐसे में यह स्वदेशी नए वैरिएंट ओमिक्रॉन का पता लगाने में काफी मददगार साबित होती। रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर (रिजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर ) के सीनियर वैज्ञानिक डॉ अशोक पांडेय ने बताया कि इस को अमेरिका आधारित कंपनी थर्मो फिशर ने डिजाइन और विकसित किया है, जबकि टाटा ने निर्मित किया है। इसको आईसीएमआर की ओर से मंजूरी भी मिल गई है। किट आनी थी, लेकिन अब तक आई नहीं है।
दो स्तर पर काम करती है
डॉ अशोक पांडेय ने बताया कि ये दो स्तरों पर काम करती है। सबसे पहले यह मरीज में कोरोना संक्रमण की पुष्टि करती है और दूसरा इस बात की भी पुष्टि करती है कि क्या मरीज में ओमिक्रॉन वैरिएंट है या नहीं? का रन टाइम 85 मिनट और टर्न अराउंट टाइम 130 मिनट है। कुल मिलाकर साढ़े तीन से चार घंटे के अंदर संक्रमण और ओमिक्रॉन वैरिएंट का पता लग जाएगा।