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पत्नी की अर्थी उठने के कुछ समय बाद पति ने भी तोड़ा दम, एक साथ जली दोनों की चीता
Fri, 04 Dec 2020 05:24 PM IST
vivek shukla
संवाद न्यूज एजेंसी, महराजगंज।
संवाद न्यूज एजेंसी, महराजगंज।
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 04 Dec 2020 05:24 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला
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उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां निचलौल क्षेत्र के कोहड़वल गांव में बुजुर्ग दंपती की शुक्रवार को मौत हो गई। सुबह पत्नी ने दम तोड़ा तो दोपहर बाद पति भी दुनिया से रुखसत हो गया।
जानकारी के अनुसार, निचलौल क्षेत्र के कोहड़वल गांव के रहने वाले भागवत धारिया (75) गांव के चौराहे पर झोपड़ी में गुमटी रखकर दुकान चलाते थे। साथ में उनकी पत्नी बिलारी देवी (60) रहती थी। बड़ा बेटा घनश्याम गांव के घर में रहता है। जबकि छोटा बेटा रामलाल झारखंड में नौकरी करता है।
ऐसे में बुजुर्ग दंपति बेटों से अलग रहकर गुजर बसर कर रहे थे। बिलारी देवी की तबियत बीते कई दिनों से खराब चल रही थी। शुक्रवार की सुबह बिलारी देवी को भागवत जगाने गए तो वह नहीं उठी। पास जाकर देखे तो उनकी सांसे थम चुकी थी। पत्नी की मौत से बदहवास भागवत को स्थानीय लोगों ने किसी तरह संभाला और उनके बड़े बेटे को घटना की सूचना दी।
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गांव के लोग बड़े बेटे के सहयोग से मृत बिलारी देवी के शव को अंतिम संस्कार के लिए ले गए। इस दौरान भागवत झोपड़ी में अकेले थे। इस बीच दोपहर बाद तक उन्होंने भी दम तोड़ दिया। जैसे ही इसकी जानकारी लोगों को हुई सभी के मुंह से सिर्फ एक ही बात निकल रही थी कि बुजुर्ग भागवत पत्नी की मौत का सदमा न सह सके, जिसके कारण मौत हो गई। वहीं घाट से कुछ लोग वापस आकर मृत भागवत की अर्थी भी अंतिम संस्कार के लिए ले गए। पति पत्नी का एक साथ चिता सजाकर अंतिम संस्कार किया गया।
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जानकारी के अनुसार, निचलौल क्षेत्र के कोहड़वल गांव के रहने वाले भागवत धारिया (75) गांव के चौराहे पर झोपड़ी में गुमटी रखकर दुकान चलाते थे। साथ में उनकी पत्नी बिलारी देवी (60) रहती थी। बड़ा बेटा घनश्याम गांव के घर में रहता है। जबकि छोटा बेटा रामलाल झारखंड में नौकरी करता है।
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ऐसे में बुजुर्ग दंपति बेटों से अलग रहकर गुजर बसर कर रहे थे। बिलारी देवी की तबियत बीते कई दिनों से खराब चल रही थी। शुक्रवार की सुबह बिलारी देवी को भागवत जगाने गए तो वह नहीं उठी। पास जाकर देखे तो उनकी सांसे थम चुकी थी। पत्नी की मौत से बदहवास भागवत को स्थानीय लोगों ने किसी तरह संभाला और उनके बड़े बेटे को घटना की सूचना दी।
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गांव के लोग बड़े बेटे के सहयोग से मृत बिलारी देवी के शव को अंतिम संस्कार के लिए ले गए। इस दौरान भागवत झोपड़ी में अकेले थे। इस बीच दोपहर बाद तक उन्होंने भी दम तोड़ दिया। जैसे ही इसकी जानकारी लोगों को हुई सभी के मुंह से सिर्फ एक ही बात निकल रही थी कि बुजुर्ग भागवत पत्नी की मौत का सदमा न सह सके, जिसके कारण मौत हो गई। वहीं घाट से कुछ लोग वापस आकर मृत भागवत की अर्थी भी अंतिम संस्कार के लिए ले गए। पति पत्नी का एक साथ चिता सजाकर अंतिम संस्कार किया गया।