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नंबर प्लेटों से गायब हुए ‘पापा’ और ‘दादा’, खत्म हो गई वीआईपी नंबरों की मांग
Mon, 08 Feb 2021 09:36 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 08 Feb 2021 09:36 PM IST
सार
- हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट पर नंबरों का मानक तय होने से खत्म हुआ अंकों का खेल
- खत्म हो गई वीआईपी नंबरों की मांग, अब लोगों की पसंद है ऐच्छिक नंबर
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खत्म हुआ वीआईपी नंबरों का डिमांड।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
गोरखपुर में हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (एचएसआरपी) आने से वाहनों के नंबर प्लेट से अब ‘पापा’, ‘बाबा’, ‘दादा’ और ‘बॉस’ गायब हो गए हैं। जिन पुराने नंबर प्लेटों पर लोगों ने अंकों का यह खेल किया था, उन्होंने भी अब कार्रवाई के डर से इसे हटवा दिया है। ऐसे में अब उन नंबरों की मांग खत्म हो गई है जिससे इस तरह के शब्द लिखे जाते थे।
वीआईपी नंबरों के लिए लाखों की बोली तो लगती ही है लेकिन जातिगत, धार्मिक और अन्य वजहों से ऐसे भी नंबरों की मांग बढ़ गई थी जो देखने में सामान्य लगते हैं। सपा के शासन काल में 4159 और 6169 की खूब डिमांड थी, जिससे ‘यादव’ लिखा जाता था। इसी तरह 9191 से बाबा लिखा जाता था।
वहीं 4749 नंबर से मोदी लिखा जाता था। इसी तरह राम लिखने के लिए 2171 और 0214 की खूब मांग होती थी। पापा लिखने के लिए 4141 और दारू लिखने के लिए 4129 की मांग होती थी। वहीं नवाब लिखने के लिए 7919 की डिमांड रहती थी। अब परिवहन विभाग द्वारा वाहनों पर हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट की अनिवार्यता के बाद ऐसे नंबरों की मांग खत्म हो गई है।
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वीआईपी नंबरों के लिए लाखों की बोली तो लगती ही है लेकिन जातिगत, धार्मिक और अन्य वजहों से ऐसे भी नंबरों की मांग बढ़ गई थी जो देखने में सामान्य लगते हैं। सपा के शासन काल में 4159 और 6169 की खूब डिमांड थी, जिससे ‘यादव’ लिखा जाता था। इसी तरह 9191 से बाबा लिखा जाता था।
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वहीं 4749 नंबर से मोदी लिखा जाता था। इसी तरह राम लिखने के लिए 2171 और 0214 की खूब मांग होती थी। पापा लिखने के लिए 4141 और दारू लिखने के लिए 4129 की मांग होती थी। वहीं नवाब लिखने के लिए 7919 की डिमांड रहती थी। अब परिवहन विभाग द्वारा वाहनों पर हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट की अनिवार्यता के बाद ऐसे नंबरों की मांग खत्म हो गई है।
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वीआईपी नंबरों की भी घटी मांग
संभागीय परिवहन कार्यालय में अब वीआईपी नंबरों की भी मांग पहले की तुलना में बहुत कम हो गई है। इसकी वजह इसका महंगा होना है। पहले जो वीआईपी नंबर 15 हजार में मिल जाते थे उसके लिए अब एक लाख रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं।
ऐसे में अब लोगों का रुझान वीआईपी नंबरों से हटकर ऐच्छिक नंबरों की तरफ चला गया है। साल 2020 में कुल 1136 वाहनों के नंबर बुक हुए थे इनमें सिर्फ 251 नंबर वीआईपी श्रेणी के थे बाकी सभी 885 ऐच्छिक नंबर बुक हुए। जबकि हर सीरिज में 339 नंबर वीआईपी श्रेणी के होते हैं।
सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी श्यामलाल ने कहा कि अप्रैल 2019 से ही नए वाहनों पर हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट को अनिवार्य कर दिया गया है। ऐसे में अब वीआईपी नंबरों की मांग खत्म हो गई है। लोग अंक शास्त्र के अनुसार चुनिंदा नंबरों पर अधिक रुपये खर्च कर रहे हैं।
ऐसे में अब लोगों का रुझान वीआईपी नंबरों से हटकर ऐच्छिक नंबरों की तरफ चला गया है। साल 2020 में कुल 1136 वाहनों के नंबर बुक हुए थे इनमें सिर्फ 251 नंबर वीआईपी श्रेणी के थे बाकी सभी 885 ऐच्छिक नंबर बुक हुए। जबकि हर सीरिज में 339 नंबर वीआईपी श्रेणी के होते हैं।
सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी श्यामलाल ने कहा कि अप्रैल 2019 से ही नए वाहनों पर हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट को अनिवार्य कर दिया गया है। ऐसे में अब वीआईपी नंबरों की मांग खत्म हो गई है। लोग अंक शास्त्र के अनुसार चुनिंदा नंबरों पर अधिक रुपये खर्च कर रहे हैं।