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Gorakhpur News: अब जमीन विवाद को बस्ती के फार्मूले-117 से सुलझाएंगे...पाबंद-जब्त भी कराएंगे

Sun, 08 Oct 2023 01:21 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 08 Oct 2023 01:21 AM IST
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Now we will resolve the land dispute with Basti Formula-117...we will also get it banned and confiscated.
अब जमीन विवाद को बस्ती के फार्मूले-117 से सुलझाएंगे...पाबंद-जब्त भी कराएंगे
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- एडीजी ने अभियान 117 की शुरुआत की, विवादित जमीन की तैयार करनी होगी रिपोर्ट



- पहले चरण में रिपोर्ट होगी तैयार, फिर पुलिस अफसरों से तालमेल कर जारी कराएंगे आदेश



- बस्ती पुलिस का प्रयोग सफल होने के बाद एडीजी ने पूरे जोन में लागू किया अभियान



अमर उजाला ब्यूरो



गोरखपुर। देवरिया में सामूहिक हत्याकांड के बाद पूरे प्रदेश में जमीन विवाद को लेकर अफसरों ने सतर्कता शुरू कर दी है। इसी बीच एडीजी अखिल कुमार ने बस्ती मंडल के अभियान 117 की शुरुआत गोरखपुर मंडल में भी कर दी है। इसके तहत पुलिस पांच साल के पुराने आईजीआरएस और अन्य माध्यमों से आए जमीन विवादों का भौतिक सत्यापन करके रिपोर्ट तैयार करेगी। पुलिस विवादित भूमि की सूची तैयार करने के बाद पाबंद और जब्तीकरण की रिपोर्ट प्रशासन को भेजेगी।



इसके बाद एडिशनल एसपी व सीओ रैंक के अफसर प्रशासनिक अफसरों से तालमेल करके आदेश कराएंगे, ताकि विवादित लोगों में आर्थिक चोट का डर हो। बस्ती में पुलिस का यह प्रयोग सफल रहा है, जिसके बाद पूरे जोन में इसे लागू किया गया है। जानकारी के मुताबिक, जमीन विवाद में पुलिस के पास सीधे कार्रवाई का कोई अधिकार नहीं होता है, लेकिन डीजीपी व मुख्य सचिव का आदेश आने के बाद पुलिस अफसरों ने आत्ममंथन किया कि ऐसे विवाद में पुलिस क्या कर सकती है। इसके बाद एडीजी गोरखपुर अखिल कुमार ने बस्ती के प्रयोग को लागू कर दिया।
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उनका कहना है कि पुलिस की ओर से दंड प्रक्रिया संहिता के अध्याय आठ में परिशांति कायम करने व सदाचार का प्रावधान है। इसका इस्तेमाल पुलिस करेगी और विवादित मामलों की सूची तैयार करेगी। एडीजी के मुताबिक, यह भी सामने आया है कि पुलिस ऐसे मामलों में रिपोर्ट तो तैयार करती है, लेकिन उस पर प्रशासनिक अफसरों का आदेश न होने की वजह से छह महीने में वह रिपोर्ट खुद ही समाप्त हो जाती है। इसे देखते हुए अभियान चलाकर कार्रवाई का फैसला लिया गया है।
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......



पुलिस को दिया गया यह करने का आदेश



0 बीट उप निरीक्षक, बीट पुलिस अधिकारी अपने बीट क्षेत्र में पिछले पांच साल में आईजीआरएस के माध्यम से दिए गए समस्त प्रार्थनापत्रों का विश्लेषण करेंगे, जिसमें अभी भी विवाद हो। जमीन विवाद, आपराधिक मामले या अन्य मामले भी हो सकते हैं। आईजीआरएस के अतिरिक्त गांव के प्रधान, पूर्व प्रधान, अन्य संभ्रांत लोगों, लेखपाल, ग्राम प्रहरी आदि से बातचीत कर मामलों की जानकारी लें।



0 प्रकरणों को चिह्नित करने के बाद सभी संबंधित पक्षों से ऐसे लोगों की सूची तैयार की जाएगी, जिससे शांति भंग होने की आशंका है। यह ध्यान रखा जाएगा कि रिपोर्ट में किसी नाबालिग को न शामिल कर लिया जाए। मौके पर सत्यापन के बिना किसी का नाम न शामिल किया जाए।



0 सभी चिह्नित प्रकरणों में बीट पुलिस अधिकारी द्वारा रिपोर्ट प्रारंभ की जाएगी, इसकी समीक्षा बीट उप निरीक्षक फिर थाना प्रभारी द्वारा की जाएगी व थाना प्रभारी समीक्षा करेंगे और रिपोर्ट एसडीएम को भेजी जाएगी।



0 31 अक्तूबर तक सभी मामलों की समीक्षा कर रिपोर्ट भेजनी होगी। इसके बाद बीट पुलिस अधिकारी बीट उप निरीक्षक को इस आशय का प्रमाणपत्र देंगे कि उनके इलाके में समस्त प्रकरणों को चिह्नित कर 107 की रिपोर्ट भेजी गई है।



0 प्रत्येक थाना प्रभारी अपने थाना क्षेत्र के कम से कम 20 प्रतिशत गांवों में खुद भौतिक सत्यापन करेंगे। सुनिश्चित करेंगे कि रिपोर्ट सही है या नहीं। फिर वह सीओ को प्रमाणपत्र देकर बताएंगे कि कार्रवाई पूरी कर ली गई है।



0 सीओ एसडीएम से वार्ता करके न्यायालय में चल रहे विवाद की सूची तैयार करेंगे। इस विवादों की सूची हासिल करने के बाद कार्रवाई के लिए कमिश्नर और डीएम से समन्वय स्थापित कर कार्रवाई कराएंगे।



0 विवादित मामलों में 107/16 के अलावा 145 (जब्त) करने की रिपोर्ट भी भेजनी होगी।



दूसरे चरण में यह करना होगा



0 31 अक्तूबर के बाद द्वितीय चरण का अभियान चलेगा। इसके तहत पुलिस द्वारा प्रेषित रिपोर्ट पर एसडीएम कोर्ट से समयबद्ध कार्रवाई करानी होगी। ताकि 15 दिनों में समस्त प्रकरणों की सुनवाई हो जाए। छह महीने ही पुलिस के रिपोर्ट की समय अवधि होती है, अगर इस दौरान कार्रवाई नहीं हुई तो फिर खुद समाप्त हो जाती है।




0 पाबंद किए जाने की धनराशि कम से कम पांच लाख की जाए।



0 विवाद से संबंधित किसी पक्ष के पास यदि लाइसेंसी असलहा है और इस विवाद में उसके दुरुपयोग की आशंका है तो असलहा का लाइसेंस निलंबित कराए जाए।



0 एसडीएम कोर्ट में हर हाल में एक नवंबर से 15 नवंबर तक रिपोर्ट में सुनवाई और निस्तारण की प्रक्रिया पूर्ण हो जाए।



कोट



जमीन के मामलों में पुलिस के पास सीधे तौर पर कोई अधिकार नहीं है, लेकिन पाबंद, जब्त करने की रिपोर्ट पुलिस तैयार कर सकती है। इसे देखते हुए अभियान-117 की शुरुआत की गई है। पुलिस विवादित मामलों की सूची तैयार कर रिपोर्ट भेजेगी फिर अफसर प्रशासनिक अफसर की मदद से कार्रवाई कराएंगे। यह प्रयोग बस्ती में पूरी तरह से सफल रहा है, इसे अब गोरखपुर, बस्ती, देवीपाटन मंडल में पूरी तरह से लागू करने का आदेश जारी कर दिया गया है।



- अखिल कुमार, एडीजी गोरखपुर जोन
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