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Gorakhpur News: बीआरडी में अब मेडिसिन वार्ड में मरीज के परिजन को डॉक्टरों ने पीटा
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- कुशीनगर की रहने वाली सुनीता को सांस लेने में दिक्कत के चलते कराया गया था भर्ती
- घरवालों ने मदद के लिए बुलाई पुलिस तब कर दिया डिस्चार्ज
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। कुशीनगर के परसौनी गांव की रहने वाली सुनीता को सांस लेने में दिक्कत है। घरवाले बेहतर इलाज के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज लेकर आए थे। यहां महिला के पति ने इलाज में लापरवाही की शिकायत की तो मेडिसिन वार्ड में मौजूद तीन डॉक्टरों ने पिटाई कर दी। घरवालों ने मदद के लिए डॉयल 112 पर पुलिस को सूचना दी। पुलिसकर्मी पहुंचे और घरवालों को ही समझा-बुझाकर बिना कोई कार्रवाई कराए मरीज को वहां से डिस्चार्ज करा दिया। इसके बाद घरवाले शहर के एक निजी अस्पताल में ले जाकर महिला का इलाज करा रहे हैं।
मरीज के रिश्तेदार जितेंद्र ने बताया कि उसकी चचेरी बहन को सांस लेने में दिकक्त है। मेडिकल कॉलेज के वार्ड नंबर 14 के बेड नंबर 15 पर भर्ती थी। बुधवार दोपहर करीब तीन बजे सांस लेने में अत्यधिक दिक्कत होने लगी तो डॉक्टर से उसकी हालत देख बेहतर इलाज के लिए पूछा गया। इस पर डॉक्टर भड़क गए और मरीज को यहां से कहीं और ले जाने की बात कही। परिजन जाने की तैयारी करने लगे, तब डॉक्टर ने कहा कि यह लिखकर दें कि हम अपनी मर्जी से मरीज को लेकर जा रहे हैं। जब परिजनों ने लिखने से मना किया तो डॉक्टर ने मरीज को वार्ड के बाहर नहीं जाने देने की बात कही। इसी बात पर दोनों पक्ष के बीच कहासुनी होने लगी। इतने में दो और डॉक्टर पहुंचे और महिला के पति को पीट दिया। वार्ड में मौजूद दूसरे मरीज व उनके परिजन यह देखकर सहम गए। बाहर इंतजार कर रहे घरवालों ने इसकी सूचना डॉयल 112 पर दी। इसके बाद दो सिपाही मौके पर पहुंचे और मरीज के परिजनों को समझाया।
पुलिस भी सहम रही
बीमार महिला के पति उत्तम शर्मा ने बताया कि डॉक्टरों की पिटाई के बाद हमने पुलिस बुलाई। उम्मीद थी कि पुलिस वाले आएंगे तो मारपीट करने के आरोपियों को पकड़ेंगे, लेकिन वे खुद ही सहमे हुए थे। पुलिस कर्मियों ने हमें ही समझाया कि यहां ज्यादा देर रुकोगे तो ये लोग फिर पिटाई करेंगे और इलाज भी नहीं होने देंगे। इससे अच्छा है कि अपने मरीज को किसी निजी अस्पताल ले जाकर इलाज कराओ, जिससे कि उसकी जान बचे। हमारे पास अब अपनी बात कहने का कोई विकल्प नहीं था। बस इतनी राहत रही कि पुलिस वालों ने अपने सामने ही हमारे मरीज को डिस्चार्ज करा दिया और हम एक निजी अस्पताल लेकर चले गए।
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कोट
अस्पताल परिसर में किसी मरीज से मारपीट की जानकारी नहीं मिली है। लेकिन, पहले की घटनाओं को देखते हुए सभी डॉक्टरों को सचेत किया गया है कि परिसर में किसी मरीज के साथ मारपीट या दुर्व्यवहार होने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। ऐसी घटनाओं से कालेज की छवि खराब हो रही है। इसे कत्तई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
डॉ. रामकुमार जायसवाल, प्राचार्य बीआरडी मेडिकल कॉलेज
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- घरवालों ने मदद के लिए बुलाई पुलिस तब कर दिया डिस्चार्ज
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। कुशीनगर के परसौनी गांव की रहने वाली सुनीता को सांस लेने में दिक्कत है। घरवाले बेहतर इलाज के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज लेकर आए थे। यहां महिला के पति ने इलाज में लापरवाही की शिकायत की तो मेडिसिन वार्ड में मौजूद तीन डॉक्टरों ने पिटाई कर दी। घरवालों ने मदद के लिए डॉयल 112 पर पुलिस को सूचना दी। पुलिसकर्मी पहुंचे और घरवालों को ही समझा-बुझाकर बिना कोई कार्रवाई कराए मरीज को वहां से डिस्चार्ज करा दिया। इसके बाद घरवाले शहर के एक निजी अस्पताल में ले जाकर महिला का इलाज करा रहे हैं।
मरीज के रिश्तेदार जितेंद्र ने बताया कि उसकी चचेरी बहन को सांस लेने में दिकक्त है। मेडिकल कॉलेज के वार्ड नंबर 14 के बेड नंबर 15 पर भर्ती थी। बुधवार दोपहर करीब तीन बजे सांस लेने में अत्यधिक दिक्कत होने लगी तो डॉक्टर से उसकी हालत देख बेहतर इलाज के लिए पूछा गया। इस पर डॉक्टर भड़क गए और मरीज को यहां से कहीं और ले जाने की बात कही। परिजन जाने की तैयारी करने लगे, तब डॉक्टर ने कहा कि यह लिखकर दें कि हम अपनी मर्जी से मरीज को लेकर जा रहे हैं। जब परिजनों ने लिखने से मना किया तो डॉक्टर ने मरीज को वार्ड के बाहर नहीं जाने देने की बात कही। इसी बात पर दोनों पक्ष के बीच कहासुनी होने लगी। इतने में दो और डॉक्टर पहुंचे और महिला के पति को पीट दिया। वार्ड में मौजूद दूसरे मरीज व उनके परिजन यह देखकर सहम गए। बाहर इंतजार कर रहे घरवालों ने इसकी सूचना डॉयल 112 पर दी। इसके बाद दो सिपाही मौके पर पहुंचे और मरीज के परिजनों को समझाया।
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पुलिस भी सहम रही
बीमार महिला के पति उत्तम शर्मा ने बताया कि डॉक्टरों की पिटाई के बाद हमने पुलिस बुलाई। उम्मीद थी कि पुलिस वाले आएंगे तो मारपीट करने के आरोपियों को पकड़ेंगे, लेकिन वे खुद ही सहमे हुए थे। पुलिस कर्मियों ने हमें ही समझाया कि यहां ज्यादा देर रुकोगे तो ये लोग फिर पिटाई करेंगे और इलाज भी नहीं होने देंगे। इससे अच्छा है कि अपने मरीज को किसी निजी अस्पताल ले जाकर इलाज कराओ, जिससे कि उसकी जान बचे। हमारे पास अब अपनी बात कहने का कोई विकल्प नहीं था। बस इतनी राहत रही कि पुलिस वालों ने अपने सामने ही हमारे मरीज को डिस्चार्ज करा दिया और हम एक निजी अस्पताल लेकर चले गए।
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अस्पताल परिसर में किसी मरीज से मारपीट की जानकारी नहीं मिली है। लेकिन, पहले की घटनाओं को देखते हुए सभी डॉक्टरों को सचेत किया गया है कि परिसर में किसी मरीज के साथ मारपीट या दुर्व्यवहार होने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। ऐसी घटनाओं से कालेज की छवि खराब हो रही है। इसे कत्तई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
डॉ. रामकुमार जायसवाल, प्राचार्य बीआरडी मेडिकल कॉलेज