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खुशखबर: गोरखपुर विश्वविद्यालय में अब कचरे से बनेगी खाद, बाजार में जाएगी बेची

Sat, 05 Jun 2021 08:39 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 05 Jun 2021 08:39 PM IST
सार

कुलपति ने किया जैविक खाद बनाने वाले मशीन व जैविक कंपोस्ट पैकेट का उद्घाटन

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Now compost will be made from garbage in Gorakhpur University
DDU gorakhpur - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में अब कचरे से खाद बनाई जाएगी और इसे बाजार में बेचा जाएगा। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर विश्विद्यालय की पहली नॉन-प्रॉफिट कंपनी जीरो वेस्ट कैंपस की शुरुआत की गई। कुलपति प्रो राजेश सिंह ने कंपनी के नए भवन तथा बॉयोडिग्रेडेबल वेस्ट से जैविक खाद बनाने वाली विश्वविद्यालय की दूसरी मशीन के साथ जैविक कंपोस्ट पैकेट का भी उद्घाटन किया। साथ ही औषधीय और फलदार पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

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कुलपति ने बताया कि कंपनी के संचालन में विश्वविद्यालय के शिक्षक एडवाइजरी भूमिका में, विद्यार्थी अर्न व्हाईल लर्न के माध्यम से सहभागिता करेंगे तथा प्रोफेशनल अपनी भूमिका निभाएंगे। यह कंपनी बॉयोडिग्रेडेबल वेस्ट से जैविक खाद बनाने एवं उसकी मार्केटिंग तथा अन्य कार्यो का प्रबंधन करेगी। डॉ नरेश त्रिखा को इस प्रोग्राम के लिए एक कंसलटेंट के रूप में रखा गया है।
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कुलपति ने कहा कि जीरो वेस्ट केंपस इंनिशिएटिव के अंतर्गत परिसर का कचरा मशीन द्वारा ऑर्गेनिक खाद में बदला जाएगा। गोरखपुर विश्वविद्यालय ऐसा पहला विश्वविद्यालय है जिसमें ये पहला प्रयोग किया जा रहा है। अगले चरण में इसे शिक्षक और कर्मचारी आवासों के साथ साथ प्रशासनिक भवन को जोड़ा जाएगा। सभी विभागों को पीला, हरा, नीला डस्टबिन दिया जाएगा। ताकि बॉयोडिग्रेडेबल कचरे संग्रहण कर उसकी जैविक खाद तैयार की जा सके। इस अवसर पर सभी अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष एवं शिक्षक मौजूद रहे।
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अदम्य चेतना फाउंडेशन से हुआ है करार
जीरो वेस्ट कैंपस के वर्तमान मॉडल को बैंगलोर स्थित एनजीओ, अदम्य चेतना की देखरेख में मानकीकृत किया गया है। विश्वविद्यालय ने इस परियोजना को लागू करने के लिए एनजीओ के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं, जैसा कि बैंगलोर, चंडीगढ़ और इंदौर में किया जा रहा है।


 

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