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गोरखपुर का हाल: मर्ज दिल और पेट का है....एम्स, बीआरडी में नहीं मिलेगी राहत

Tue, 29 Aug 2023 04:54 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 29 Aug 2023 04:54 PM IST
सार

बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हर दिन करीब 3500 रोगी ओपीडी में आते हैं। इनमें करीब 120-130 रोगी पेट से संबंधित बीमारियों के होते हैं। लेकिन, गैस्ट्रो के विशेषज्ञ ही नहीं हैं। सुपर स्पेशयलिटी ब्लॉक में एक डॉक्टर हैं, लेकिन वहां पहले से ही गंभीर मरीजों की भीड़ है।

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no specialist doctors for Heart Gastro in government hospitals patients going to private hospitals
गोरखपुर एम्स। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गोरखपुर जिले में खान-पान और बदलती जीवन शैली के चलते पेट और तनाव-शारीरिक गतिविधियों में कमी के चलते हृदय रोगियों की संख्या जिले में बढ़ रही है। लेकिन अगर आप का मर्ज दिल और पेट का है तो जिले के सरकारी अस्पतालों में राहत नहीं मिलेगी। एम्स में भी गैस्ट्रो और हर्ट के विशेषज्ञ नहीं हैं। वहीं, बीआरडी मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल में भी गैस्ट्रो के स्पेशलिस्ट नहीं मिलेंगे। इसके चलते रोगियों को प्राइवेट अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की फीस और दवा में हजारों रुपये खर्च करना पड़ रहा है।

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जिला अस्पताल में पेट से संबंधित हर दिन 150 से अधिक मरीज आते हैं, लेकिन यहां गैस्ट्रो के स्पेशलिस्ट की जगह जनरल फिजिशियन ही इलाज करते हैं। दो जनरल फिजिशियन हैं, जो बुखार, खांसी-सर्दी से लेकर पेट की सभी बीमारियों का इलाज करते हैं।
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हर दिन करीब 3500 रोगी ओपीडी में आते हैं। इनमें करीब 120-130 रोगी पेट से संबंधित बीमारियों के होते हैं। लेकिन, गैस्ट्रो के विशेषज्ञ ही नहीं हैं। सुपर स्पेशयलिटी ब्लॉक में एक डॉक्टर हैं, लेकिन वहां पहले से ही गंभीर मरीजों की भीड़ है। ऐसे में सामान्य मरीजों के लिए वहां टाइम मिलना मुश्किल होता है।
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एम्स में भी गैस्ट्रो का कोई विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं। गैस्ट्रो विभाग में एक सर्जन हैं, जो शनिवार को ओपीडी में भी बैठकर मरीजों का इलाज करते हैं। यहां भी केवल गंभीर रोगियों को ही इलाज मिल पाता है। एम्स में हृदय रोग के भी विशेषज्ञ नहीं हैं। इसके चलते मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में जाने की मजबूरी रहती है।

 

एम्स: अल्ट्रासाउंड के लिए लंबा इंतजार

no specialist doctors for Heart Gastro in government hospitals patients going to private hospitals
BRD - फोटो : अमर उजाला।
एम्स में रेडियोलॉजिस्ट की भी कमी है, जिसके चलते अल्ट्रासाउंड के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। शुक्रवार को ओपीडी में अपने मां को इलाज के लिए लेकर आईं सहबाजपुर की रीना ने बताया कि पेट में दर्द का इलाज कराने के लिए अल्ट्रासाउंड कराना जरूरी है, लेकिन नंबर कई दिन बाद का मिल रहा था, इसके चलते बाहर से अल्ट्रासाउंड कराया। एम्स के मीडिया प्रभारी पंकज कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि अभी कई विभागों में सुपर स्पेशयलिस्ट की कमी है। रेडियोलॉजी विभाग में भी डॉक्टरों की कमी है। एक प्राइवेट डॉक्टर से बात कर अल्ट्रासाउंड को चालू कराया गया है।

सरकारी अस्पतालों में गैस्ट्रो के डॉक्टर नहीं मिलने के चलते प्राइवेट में जाकर इलाज कराना पड़ता है। 800 रुपये डॉक्टर की फीस है। वह भी दोपहर बाद मिलते हैं। जांच व दवा कराने में पूरा दिन निकल गया। दो महीने से इलाज करा रहा हूं। अब तक हजारों रुपये खर्च हो चुके हैं। -अश्वनी कुमार, जाफरा बाजार।

तीन साल से पेट की बीमारी से परेशान हूं। कभी अचानक पेट में दर्द होने लगता है तो कभी गैस की समस्या रहती है। अब तक चार डॉक्टरों से इलाज करा चुका हूं। प्राइवेट डॉक्टरों से इलाज कराने में काफी खर्च आता है। सरकारी अस्पताल में यह व्यवस्था रहती तो बेहतर हो जाता। -रामप्रीत यादव तारामंडल।

बीआरडी और एम्स में भी विशेषज्ञ नहीं होने के कारण गंभीर मरीजों को प्राइवेट अस्पताल ले जाने की मजबूरी है। वहां इलाज के नाम पर हजारों रूपये खर्च हो जाते हैं। सभी सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती होनी चाहिए। जिससे गरीब को भी इलाज की बेहतर सुविधा मिले।-शिव चौधरी, झारखंडी।

पिछले महीने मेरे एक रिश्तेदार को हर्ट की बीमारी के चलते बीआरडी में इलाज के लिए लाया गया। मैं भी वहीं गया था, लेकिन डॉक्टर नहीं होने के चलते काफी परेशानी हुई। एम्स गए तो पता लगा कि वहां भी हर्ट के स्पेशयलिस्ट नहीं है। इसके बाद एक निजी चिकित्सक के यहां जाना पड़ा। -धर्मेंद्र कुमार, नौसड़।

 
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