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कोविड टीकाकरण: यूरोप की तर्ज पर एनआईवी जांचेगा कॉकटेल वैक्सीनेशन, सिद्धार्थनगर में लगी है अलग-अलग कंपनियों की वैक्सीन
Mon, 21 Jun 2021 01:28 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 21 Jun 2021 01:28 PM IST
सार
20 लोगों को अलग-अलग कंपनियों की लगी है वैक्सीन। आरएमआरसी दो नमूने लेकर जांच के लिए पूणे भेज चुकी है, 40-40 अलग-अलग नमूने और भेजे जाएंगे।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
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विस्तार
कोविड टीकाकरण के लिहाज से अलग-अलग वैक्सीन, कोविशील्ड और कोवैक्सीन लगवा चुके लोगों के कॉकटेल डोज की जांच यूरोप की तर्ज पर एनआईवी पूणे करेगा। क्षेत्रीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान केंद्र (आरएमआरसी) जांच के लिए 20 ऐसे लोगों के नमूने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) पुणे भेज चुकी है। इसके अलावा 40-40 ऐसे लोगों के नमूने भी लिए जाएंगे, जो कोविशील्ड और कोवैक्सीन का डोज ले चुके हैं। हालांकि इस काम में एनवाईवी पुणे को एक साल का समय लगेगा। इसके बाद ही यह पता चल पाएगा कि कॉकटेल डोज का असर उन लोगों पर कितना हुआ है।
जानकारी के मुताबिक यूरोप के कई देशों ने कॉकटेल डोज का अध्ययन करना शुरू कर दिया है। इनमें ब्रिटेन और यूरोप के कई देश शामिल हैं। कॉकटेल डोज के अध्ययन के लिए भारत में भी इसकी शुरुआत होनी थी, लेकिन इसकी मंजूरी आईसीएमआर (इडियन कांउसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च) की ओर से मिल नहीं रही थी।
इस बीच सिद्धार्थनगर के शोहरतगढ़ तहसील के औंदही कला में स्वास्थ्य कर्मियों की गलती से 20 लोगों को पहली डोज कोविशील्ड की और दूसरी डोज कोवैक्सीन की लगा दी गई। इसकी जानकारी जब आईसीएमआर को हुई तो आरएमआरसी को ऐसे लोगों के नमूने इकट्ठा करने के निर्देश दिए गए।
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जानकारी के मुताबिक यूरोप के कई देशों ने कॉकटेल डोज का अध्ययन करना शुरू कर दिया है। इनमें ब्रिटेन और यूरोप के कई देश शामिल हैं। कॉकटेल डोज के अध्ययन के लिए भारत में भी इसकी शुरुआत होनी थी, लेकिन इसकी मंजूरी आईसीएमआर (इडियन कांउसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च) की ओर से मिल नहीं रही थी।
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इस बीच सिद्धार्थनगर के शोहरतगढ़ तहसील के औंदही कला में स्वास्थ्य कर्मियों की गलती से 20 लोगों को पहली डोज कोविशील्ड की और दूसरी डोज कोवैक्सीन की लगा दी गई। इसकी जानकारी जब आईसीएमआर को हुई तो आरएमआरसी को ऐसे लोगों के नमूने इकट्ठा करने के निर्देश दिए गए।
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इसका नतीजा यह हुआ कि आरएमआरसी की टीम ने इन सभी के दो-दो नमूने लेकर जांच के लिए एनआईवी पूणे भेज दिया है। पहला नमूना चार जून और दूसरा 11 जून को लिया गया है।
आरएमआरसी व मीडिया कोर्डिनेटर आईसीएमआर निदेशक डॉ रजनीकांत ने बताया कि यूरोप में कॉकेटेल डोज की शुरुआत हो चुकी है। इसका अध्ययन भी ब्रिटेन समेत यूरोप के कई देश कर रहे हैं। इस बीच स्वास्थ्य कर्मियों की गलती से 20 कर्मियों का काकटेल डोज लग गया। ऐसे लोगों के दो बार नमूने लेकर आरएमआरसी ने एनआईवी पूणे भेज दिया है।
दो बार और नमूने इन लोगों के लिए जाएंगे। इसके अलावा कोवैक्सीन और कोविशील्ड का डोज लेने वाले लोगों के भी नमूने लिए जाएंगे। इसके बाद अध्ययन शुरू किया जाएगा। इस काम में फिलहाल एक साल का समय लगेगा। इसके बाद सही जानकारी मिल पाएगी।
आरएमआरसी व मीडिया कोर्डिनेटर आईसीएमआर निदेशक डॉ रजनीकांत ने बताया कि यूरोप में कॉकेटेल डोज की शुरुआत हो चुकी है। इसका अध्ययन भी ब्रिटेन समेत यूरोप के कई देश कर रहे हैं। इस बीच स्वास्थ्य कर्मियों की गलती से 20 कर्मियों का काकटेल डोज लग गया। ऐसे लोगों के दो बार नमूने लेकर आरएमआरसी ने एनआईवी पूणे भेज दिया है।
दो बार और नमूने इन लोगों के लिए जाएंगे। इसके अलावा कोवैक्सीन और कोविशील्ड का डोज लेने वाले लोगों के भी नमूने लिए जाएंगे। इसके बाद अध्ययन शुरू किया जाएगा। इस काम में फिलहाल एक साल का समय लगेगा। इसके बाद सही जानकारी मिल पाएगी।