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बारह हजार रुपये न देने पर नहीं दिया नवजात का शव, सात घंटे से अधिक बैठे रहे परिजन
Sun, 23 Feb 2020 12:01 PM IST
vivek shukla
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
Published by: vivek shukla
Updated Sun, 23 Feb 2020 12:01 PM IST
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पैरामाउंट हास्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर में रकम के लिए बंधक बनाए गए थे परिजन।
- फोटो : अमर उजाला
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रामगढ़ताल क्षेत्र के पैरामाउंट हास्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर में नवजात की मौत के बाद 12 हजार रुपये के लिए परिजनों को सात घंटे तक जबरन बैठाए रखा। किसी ने रामगढ़ ताल थाना पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने परिजनों को बच्चे का शव दिलाया।
जानकारी के मुताबिक गोपालगंज के सुरवनिया गांव से कौशल्या और मीरा एक नवजात को लेकर इलाज के लिए पैरामाउंट हास्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर शनिवार की भोर में पहुंचे। दिन में बच्चे की मौत हो गई। कौशल्या के अनुसार नवजात के इलाज के नाम पर अस्पताल प्रशासन उनसे 12 हजार रुपये की मांग करने लगा। रुपये न होने की बात कही गई तो बताया गया कि जबतक रुपये नहीं मिलेंगे, तब तक नवजात के शव को नहीं दिया जाएगा। करीब सात घंटे तक परिजनों को शव के लिए बिठाए रखा गया।
पेश की मानवता की मिसाल
नवजात की मौत और परिजनों को बंधक बनाने की सूचना इस बीच सेवा भारती सामाजिक आयाम के योगेश पांडेय को मिली। तो उन्होंने मानवता की मिसाल पेश करते हुए नवजात के अंतिम संस्कार से लेकर परिजनों के जाने तक के लिए रुपये का इंतजाम किया।
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पैरामाउंट हास्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर के प्रबंधक नीरज शर्मा ने बताया- नवजात रात को दो बजे बगल के अस्पताल में एडमिट हुआ था। हालत बिगड़ी तो पैरामाउंट अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इलाज पर 12 हजार रुपये खर्च हुए थे लेकिन परिजन केवल 1500 रुपये ही देने की बात कह रहे थे। कुछ लोगों ने पुलिस को बुला लिया था। एक रुपये शुल्क नहीं लिया गया और नवजात का शव परिजनों को दे दिया गया।
रामगढ़ ताल थाना प्रभारी निरीक्षक राणा देवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया- अस्पताल में बच्चे की मौत और शव न दिए जाने की सूचना मिली थी। पुलिस की टीम भेजकर शव दिलवाया गया, फिर परिजन अस्पताल से चले गए।
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जानकारी के मुताबिक गोपालगंज के सुरवनिया गांव से कौशल्या और मीरा एक नवजात को लेकर इलाज के लिए पैरामाउंट हास्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर शनिवार की भोर में पहुंचे। दिन में बच्चे की मौत हो गई। कौशल्या के अनुसार नवजात के इलाज के नाम पर अस्पताल प्रशासन उनसे 12 हजार रुपये की मांग करने लगा। रुपये न होने की बात कही गई तो बताया गया कि जबतक रुपये नहीं मिलेंगे, तब तक नवजात के शव को नहीं दिया जाएगा। करीब सात घंटे तक परिजनों को शव के लिए बिठाए रखा गया।
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पेश की मानवता की मिसाल
नवजात की मौत और परिजनों को बंधक बनाने की सूचना इस बीच सेवा भारती सामाजिक आयाम के योगेश पांडेय को मिली। तो उन्होंने मानवता की मिसाल पेश करते हुए नवजात के अंतिम संस्कार से लेकर परिजनों के जाने तक के लिए रुपये का इंतजाम किया।
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पैरामाउंट हास्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर के प्रबंधक नीरज शर्मा ने बताया- नवजात रात को दो बजे बगल के अस्पताल में एडमिट हुआ था। हालत बिगड़ी तो पैरामाउंट अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इलाज पर 12 हजार रुपये खर्च हुए थे लेकिन परिजन केवल 1500 रुपये ही देने की बात कह रहे थे। कुछ लोगों ने पुलिस को बुला लिया था। एक रुपये शुल्क नहीं लिया गया और नवजात का शव परिजनों को दे दिया गया।
रामगढ़ ताल थाना प्रभारी निरीक्षक राणा देवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया- अस्पताल में बच्चे की मौत और शव न दिए जाने की सूचना मिली थी। पुलिस की टीम भेजकर शव दिलवाया गया, फिर परिजन अस्पताल से चले गए।