{"_id":"6a46d3b6df97ef415e0ae3a6","slug":"new-machine-installed-in-suthni-for-waste-disposal-gorakhpur-news-c-7-gkp1038-1372791-2026-07-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gorakhpur News: सुथनी में कचरा निस्तारण के लिए लगी नई मशीन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gorakhpur News: सुथनी में कचरा निस्तारण के लिए लगी नई मशीन
विज्ञापन
गोरखपुर। महानगर के ठोस अपशिष्ट के वैज्ञानिक निस्तारण की दिशा में सुथनी में फ्रेश वेस्ट का प्रबंधन करने वाली फर्म होराइज सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड 500 टन प्रतिदिन क्षमता का प्लांट संचालित करेगी। फिलहाल यहां 350 टन क्षमता की एक ट्रॉमल मशीन स्थापित कर प्रतिदिन लगभग 200 टन फ्रेश वेस्ट का निस्तारण किया जा रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार, बैलिस्टिक सेपरेटर मशीन भी प्लांट पर पहुंच चुकी है लेकिन डीजी सेट और बिजली कनेक्शन नहीं होने से उसका संचालन ठीक से नहीं हो पा रहा है। बिजली कनेक्शन के लिए प्रयास जारी हैं। 24 मई से जमुआड़ में कचरा डंपिंग बंद होने के बाद सुथनी में प्रतिदिन 400 टन से अधिक कचरा पहुंच रहा है। अस्थायी व्यवस्था के तहत सीबीजी प्लांट के लिए आवंटित भूमि पर कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण किया जा रहा है। फर्म को 505 रुपये प्रति टन की स्वीकृत दर से भुगतान मिलेगा। वर्तमान में कचरे का प्रसंस्करण कर उससे आरडीएफ (रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल) और कंपोस्ट अलग किया जा रहा है। आरडीएफ को सीमेंट फैक्ट्रियों में ईंधन के रूप में बेचा जाएगा, जबकि कंपोस्ट स्थानीय किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा। 10 दिन के सफल ट्रायल के बाद अब वैज्ञानिक तरीके से नियमित निस्तारण शुरू हो गया है। बारिश के दौरान भी कचरे के प्रबंधन के लिए प्लांट पर दो पोकलेन मशीनें तैनात की गई हैं। मुख्य अभियंता अमित शर्मा ने बताया कि सुथनी में स्थापित मशीन से प्रतिदिन लगभग 200 टन फ्रेश वेस्ट का निस्तारण किया जा रहा है।
विज्ञापन
मिली जानकारी के अनुसार, बैलिस्टिक सेपरेटर मशीन भी प्लांट पर पहुंच चुकी है लेकिन डीजी सेट और बिजली कनेक्शन नहीं होने से उसका संचालन ठीक से नहीं हो पा रहा है। बिजली कनेक्शन के लिए प्रयास जारी हैं। 24 मई से जमुआड़ में कचरा डंपिंग बंद होने के बाद सुथनी में प्रतिदिन 400 टन से अधिक कचरा पहुंच रहा है। अस्थायी व्यवस्था के तहत सीबीजी प्लांट के लिए आवंटित भूमि पर कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण किया जा रहा है। फर्म को 505 रुपये प्रति टन की स्वीकृत दर से भुगतान मिलेगा। वर्तमान में कचरे का प्रसंस्करण कर उससे आरडीएफ (रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल) और कंपोस्ट अलग किया जा रहा है। आरडीएफ को सीमेंट फैक्ट्रियों में ईंधन के रूप में बेचा जाएगा, जबकि कंपोस्ट स्थानीय किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा। 10 दिन के सफल ट्रायल के बाद अब वैज्ञानिक तरीके से नियमित निस्तारण शुरू हो गया है। बारिश के दौरान भी कचरे के प्रबंधन के लिए प्लांट पर दो पोकलेन मशीनें तैनात की गई हैं। मुख्य अभियंता अमित शर्मा ने बताया कि सुथनी में स्थापित मशीन से प्रतिदिन लगभग 200 टन फ्रेश वेस्ट का निस्तारण किया जा रहा है।
विज्ञापन