लॉकडाउन: दिल्ली से आए नेपाली नागरिकों को नेपाल में नहीं मिला प्रवेश, ये है बड़ी वजह
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कोरोना वायरस को लेकर पूरे देश में लॉक डाउन के बाद दिल्ली सहित नोएडा, फरीदाबाद, गुड़गांव की सभी फैक्ट्रियां और होटल बंद होने से मजदूरों के लिए संकट लेकर आया है। काम बंद होने के बाद लोग घर को पलायन करने पर मजबूर हो गए हैं।
शनिवार की शाम सोनौली डिपो से गोरखपुर रवाना हुई डिपो की छह बसों में दिल्ली से गोरखपुर पहुंचे यात्रियों सोनौली लाया गया। जिसमें नेपाल के भी 22 यात्री शामिल हैं। जिन्हें नेपाल सरकार ने नेपाल प्रवेश की अनुमति नहीं दी। सभी सरहद के निकट सड़क पर वक्त काट रहे हैं।
एआरएम सीके भाष्कर ने बताया कि गोरखपुर से सोनौली के बीच के यात्री दिल्ली से गोरखपुर पहुंचे थे। जिन्हें प्रशासन की अनुमति के बाद गंतव्य तक पहुंचा दिया गया। नेपाल के नागरिकों को सीमा तक छोड़ दिया गया है।
नेपाल प्रशासन को कराया अवगत
दिल्ली से सोनौली पहुंचे नेपाल जाने के लिए 22 नेपाली नागरिकों के सीमा पर रोके जाने की सूचना के बाद सोनौली पहुंचे एसडीएम नौतनवां जसधीर सिह यादव ने नेपाल प्रशासन से बातचीत की। उन्होंने बताया कि नेपाली यात्री भारत में रुकने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं। जिसकी सूचना नेपाल के अधिकारियों को दी गई है। 14 दिन कवारेंटीन में रखने पर वार्ता चल रही है।
तीन कैंसर मरीजो को भी नहीं मिली इंट्री
दिल्ली से इलाज करा कर अपने घर नेपाल नारायण घाट जा रहे तीन कैंसर के मरीजों को नेपाल में इंट्री नहीं मिली। रविवार को करीब 11 बजे से परिजन मरीज को लेकर कभी भारतीय तो कभी नेपाली प्रशासन से गुहार लगाते रहे। इस संबंध में बेलहिया इंस्पेक्टर ईश्वरी अधिकारी ने बताया कि तीनों मरीजो को नेपाल में बुलाने के संबंध में अधिकारियों से वार्ता चल रही है।
नेपाल से लाए गए लोगों को गोरखपुर भेजा गया
नेपाल से रेस्क्यू कर भारतीय सीमा सोनौली में लाए गए 44 भारतीय यात्रियों को प्रशासन ने गोरखपुर शिफ्ट कर दिया गया है। रविवार की दोपहर एसडीएम नौतनवां जसधीर सिह यादव के नेतृत्व में नेपाल से भारत लाए गए तमिलनाडु चेन्नई, गोरखपुर सिटी, बड़हलगंज , लखनऊ के सभी यात्रियों को गोरखपुर भेज दिया गया। एसडीएम ने बताया कि उच्चाधिकारियों के निर्देश पर सभी को रोडवेज की बस से गोरखपुर रवाना किया गया।