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कोरोना का असर: नेपाल सरकार ने बंद किए 22 बॉर्डर, भारत से जुड़े केवल 13 मार्ग ही रहेंगे संचालित
Sat, 01 May 2021 08:32 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, महराजगंज।
अमर उजाला नेटवर्क, महराजगंज।
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 01 May 2021 08:32 PM IST
सार
बैठक में उन सभी सरकारी कार्यालयों के केवल एक-चौथाई हिस्से को खोलने का निर्णय लिया गया है, जहां लॉकडाउन लगाया गया है।
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भारत नेपाल सीमा।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
कोरोना की रोकथाम और नियंत्रित करने के लिए नेपाल सरकार की ओर से गठित निदेशक मंडल (सीसीएमसी) ने कुल 35 में 22 बॉर्डर बंद कर दिए हैं। 13 बॉर्डर से ही लोग बहुत जरूरी कार्यवश आ जा सकेंगे। यह निर्णय शुक्रवार को देर रात सिंह दरबार काठमांडु में आयोजित बैठक में लिया गया। बैठक में उन सभी सरकारी कार्यालयों के केवल एक-चौथाई हिस्से को खोलने का निर्णय लिया गया है, जहां लॉकडाउन लगाया गया है।
सीसीएमसी ने सभी सार्वजनिक कार्यों को बंद करने और उद्योग को इस तरह से संचालित करने का निर्देश दिया है कि श्रमिक और कर्मचारी औद्योगिक परिसर के भीतर रहें।
इसी तरह, समिति ने भारत के साथ 35 में से केवल 13 चौकियों को संचालित करने और उनमें से 22 को बंद करने का निर्णय लिया है। काकड़भिट्टा, जोगबनी, पशुपतिनगर, भितामोड़ गौर, बीरगंज, बेलहिया, कृष्णानगर, जमुनहा, झूलाघाट, कोलुघाट, गौरीफंटा और गद्दाचौकी हैं, जो खुले रहेंगे, इन्हीं रास्तों से इमरजेंसी में पैदल यात्री आ जा सकेंगे, बाकी 22 रास्तों से यात्रियों की आवाजाही नहीं होगी।
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सीसीएमसी ने सभी सार्वजनिक कार्यों को बंद करने और उद्योग को इस तरह से संचालित करने का निर्देश दिया है कि श्रमिक और कर्मचारी औद्योगिक परिसर के भीतर रहें।
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इसी तरह, समिति ने भारत के साथ 35 में से केवल 13 चौकियों को संचालित करने और उनमें से 22 को बंद करने का निर्णय लिया है। काकड़भिट्टा, जोगबनी, पशुपतिनगर, भितामोड़ गौर, बीरगंज, बेलहिया, कृष्णानगर, जमुनहा, झूलाघाट, कोलुघाट, गौरीफंटा और गद्दाचौकी हैं, जो खुले रहेंगे, इन्हीं रास्तों से इमरजेंसी में पैदल यात्री आ जा सकेंगे, बाकी 22 रास्तों से यात्रियों की आवाजाही नहीं होगी।
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