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अमर उजाला पड़ताल: गोविवि स्वास्थ्य केंद्र में न लैब और न ही नियमित चिकित्सक, दोपहर दो बजे ही बंद हो जाता इलाज

Sun, 28 Nov 2021 04:37 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sun, 28 Nov 2021 04:37 PM IST
सार

अमर उजाला ने शनिवार को स्वास्थ्य केंद्र पर सुविधाओं की पड़ताल की। पता चला कि केंद्र पर लैब ही नहीं है। दो नियमित डॉक्टर और सात स्टॉफ की पोस्ट है। नियमित डॉक्टर एक भी नहीं है।

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Neither lab nor regular doctor in Gorakhpur University Health Center
खाली पड़ा गोरखपुर विश्वविद्यालय का चिकित्सा केंद्र। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों, शिक्षक व कर्मचारियों के इलाज के लिए स्वास्थ्य केंद्र है, लेकिन उसे खुद इलाज की जरूरत है। केंद्र में न तो नियमित डॉक्टर हैं और न ही लैब। सिर्फ खांसी, जुकाम व मामूली चोट का ही इलाज होता है, वह भी दोपहर दो बजे तक ही।
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अमर उजाला ने शनिवार को स्वास्थ्य केंद्र पर सुविधाओं की पड़ताल की। पता चला कि केंद्र पर लैब ही नहीं है। दो नियमित डॉक्टर और सात स्टॉफ की पोस्ट है। नियमित डॉक्टर एक भी नहीं है। सात-आठ साल पहले यहां खून की जांच होती थी, लेकिन मशीनें खराब होने के बाद बंद हो गई। मेडिकल स्टोर में सामान्य बीमारी की ही दवाएं थीं। दरअसल, विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्वास्थ्य केंद्र की कभी सुध ही नहीं ली। कक्षाएं दो बजे के बाद भी चलती हैं। शोध छात्र शाम तक रहते हैं, जबकि स्वास्थ्य केंद्र दोपहर दो बजे बंद हो जाता है। ऐसे में अगर किसी की तबीयत बिगड़ी तो उसे जिला अस्पताल ही ले जाना पड़ेगा।
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रोजाना आठ से दस छात्र पहुंचते हैं
स्वास्थ्य केंद्र के खस्ताहाल होने की वजह से अब लोगों का आना कम हो गया है। रोजाना आठ से दस छात्र ही पहुंचते हैं। शनिवार को सिर्फ छह छात्र, 26 नवंबर को 7 और 25 नवंबर को 8 छात्र इलाज कराने पहुंचे थे। जब सभी कक्षाएं नियमित चलती हैं तो यह संख्या बढ़कर 20 से 25 हो जाती है।
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ढूंढते रह जाएंगे एंबुलेंस व हेल्थ चेकअप वैन

विश्वविद्यालय के पास एक एंबुलेंस पहले से थी और करीब दस दिन पहले वूमेन स्टडी सेंटर को इनरव्हील क्लब की ओर से एक हेल्थ चेकअप वैन दी गई है। एंबुलेंस और हेल्थ चेकअप वैन स्वास्थ्य केंद्र पर खड़ी नहीं होती है जबकि सबसे ज्यादा जरूरत इसकी यहीं है। जबकि एक विश्वविद्यालय परिसर में खड़ी की जाती है और दूसरी कुलपति आवास में खड़ी रहती है। शुक्रवार को जब विश्वविद्यालय परिसर में एक छात्रा बेहोश हुई तो जिनके पास एंबुलेंस और वैन की जिम्मेदारी थी, उन्होंने फोन ही नहीं उठाया। इसके बाद नगर विधायक ने अपनी कार से छात्रा को जिला अस्पताल पहुंचवाया।
 
विद्यार्थी : करीब 16 हजार
कर्मचारी : 430
शिक्षक : 250
 
स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात स्टाफ
फर्मासिस्ट : 01
कंपाउंडर : 02
संविदा पर डॉक्टर : 02
 
संविदा डॉक्टर डॉ. मनीष मोहन श्रीवास्तव ने बताया कि दो डॉक्टर हैं, सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक शिफ्टवार ड्यूटी रहती है। अमूमन, यहां सर्दी, जुकाम, स्किन व हल्की चोट वाले छात्र ही आते हैं। जिनकी जांच करके दवाएं दी जातीं हैं। लैब न होने से कोई जांच नहीं हो पाती है। जब कोरोना टीका केंद्र बनाया गया था तब कुलपति आए थे। उन्होंने संसाधन बढ़ाने का आश्वासन दिया है।
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