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मियां-बीवी संग काजी भी राजी, तभी होगी शादी, उलेमा बोले- जबरन धर्म परिवर्तन किया तो नहीं होगा निकाह
Tue, 08 Dec 2020 10:50 AM IST
vivek shukla
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Published by: vivek shukla
Updated Tue, 08 Dec 2020 10:50 AM IST
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शहर के उलेमाओं ने निकाह पढ़ाने वाले काजी को दिए आवश्यक दिशा निर्देश।
- फोटो : अमर उजाला।
'मियां बीबी राजी तो क्या करेंगे काजी' वाली कहावत अब नहीं चलेगी। काजी होंगे राजी तभी होगी शादी। अब जांच पड़ताल व आपसी रजामंदी की मोहर लगने के बाद ही निकाह जैसी पाकीजा रस्म अदा हो सकेगी। जोर जबरदस्ती का निकाह कबूल नहीं होगा। लड़का-लड़की, दोनों के परिवार वालों की रजामंदी और गवाहों व रिश्तेदारों की मौजूदगी रिश्ते की नींव पुख्ता करेगी। निकाह से पहले लड़का-लड़की के परिवार वालों व गवाहों को आधार कार्ड या अन्य जरूरी दस्तावेज देने होंगे। तब कहीं जाकर काजी निकाह पढ़ाएंगे।
मौजूदा हालात के पेशे नजर काजी-ए-शहर मुफ्ती खुर्शीद अहमद मिस्बाही, मुफ्ती-ए-शहर मुफ्ती अख्तर हुसैन मन्नानी, नायब काजी मुफ्ती मो. अजहर शम्सी, जामा मस्जिद सुब्हानिया तकिया कवलदह के इमाम मौलाना जहांगीर अहमद अजीजी व गौसिया जामा मस्जिद छोटे काजीपुर के इमाम मौलाना मो. अहमद निजामी ने निकाह पढ़ाने वाले काजी के लिए एहतियाती व मुफीद मशवरा पेश किया है। जिस पर अमल होने से निकाह का अटूट बंधन मजबूती के साथ रफ्तार पकड़ सकेगा।
जामा मस्जिद सुब्हानिया तकिया कवलदह के इमाम मौलाना जहांगीर अहमद अजीजी ने हिदायत दी है कि निकाह से पहले काजी लड़के-लड़की के बारे में जांच पड़ताल कर लें। लड़का व लड़की के मुस्लिम होने पर ही निकाह के लिए तैयार हों। निकाह से पहले दोनों के खानदान के बारे में भी जांच पड़ताल कर लें। उनमें से अगर किसी ने जबरन धर्म परिवर्तन किया है तो बिल्कुल निकाह के लिए तैयार न हों, क्योंकि दीन-ए-इस्लाम में जोर जबरदस्ती जायज नहीं और न ही ऐसा करने से निकाह सही होगा।
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मौजूदा हालात के पेशे नजर काजी-ए-शहर मुफ्ती खुर्शीद अहमद मिस्बाही, मुफ्ती-ए-शहर मुफ्ती अख्तर हुसैन मन्नानी, नायब काजी मुफ्ती मो. अजहर शम्सी, जामा मस्जिद सुब्हानिया तकिया कवलदह के इमाम मौलाना जहांगीर अहमद अजीजी व गौसिया जामा मस्जिद छोटे काजीपुर के इमाम मौलाना मो. अहमद निजामी ने निकाह पढ़ाने वाले काजी के लिए एहतियाती व मुफीद मशवरा पेश किया है। जिस पर अमल होने से निकाह का अटूट बंधन मजबूती के साथ रफ्तार पकड़ सकेगा।
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जामा मस्जिद सुब्हानिया तकिया कवलदह के इमाम मौलाना जहांगीर अहमद अजीजी ने हिदायत दी है कि निकाह से पहले काजी लड़के-लड़की के बारे में जांच पड़ताल कर लें। लड़का व लड़की के मुस्लिम होने पर ही निकाह के लिए तैयार हों। निकाह से पहले दोनों के खानदान के बारे में भी जांच पड़ताल कर लें। उनमें से अगर किसी ने जबरन धर्म परिवर्तन किया है तो बिल्कुल निकाह के लिए तैयार न हों, क्योंकि दीन-ए-इस्लाम में जोर जबरदस्ती जायज नहीं और न ही ऐसा करने से निकाह सही होगा।
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नायब काजी मुफ्ती मो. अजहर शम्सी ने मशवरा पेश करते हुए कहा कि काजी निकाह से पहले जरुरी दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर कार्ड, पासपोर्ट या अन्य पहचान पत्र आदि जांच लें और दस्तावेज की प्रमाणित व हस्ताक्षरित फोटो कापी ले लें। निकाह तंहाई में न किया जाए बल्कि दो गवाहों के अलावा कम से कम 15 से 20 लोगों की मौजूदगी में किया जाए। निकाहनामा पर गवाह और दूसरे लोगों के हस्ताक्षर जरूर ले लें। निकाह नामा संस्था के नाम पर हो, मोहर और पंजीकरण संख्या के साथ।
गौसिया जामा मस्जिद छोटे काजीपुर के इमाम मौलाना मोहम्मद अहमद निजामी ने मशवरा पेश करते हुए कहा कि निकाह दीन-ए-इस्लाम का एक ऐसा कानून है जिससे दो लोग एक होते हैं। सही निकाह के कुछ तरीके हैं, काजी हो जो निकाह कायम करे, लड़का-लड़की की रजामंदी जो एक मजलिस में हो, उस निकाह के कम से कम दो खास गवाह हों। जहां तक हो सके काजी ही निकाह में खुद वकील बने। निकाह नामे में अभिभावकों की रजजामंदी का कॉलम भी बढ़ाया जाए। हस्ताक्षर फोटो के साथ हो। निकाह नामे में कम से कम दोनों पक्षों के दो-दो रिश्तेदारों की मौजूदगी की शहादत के कॉलम बढ़ाए जाएं।
गौसिया जामा मस्जिद छोटे काजीपुर के इमाम मौलाना मोहम्मद अहमद निजामी ने मशवरा पेश करते हुए कहा कि निकाह दीन-ए-इस्लाम का एक ऐसा कानून है जिससे दो लोग एक होते हैं। सही निकाह के कुछ तरीके हैं, काजी हो जो निकाह कायम करे, लड़का-लड़की की रजामंदी जो एक मजलिस में हो, उस निकाह के कम से कम दो खास गवाह हों। जहां तक हो सके काजी ही निकाह में खुद वकील बने। निकाह नामे में अभिभावकों की रजजामंदी का कॉलम भी बढ़ाया जाए। हस्ताक्षर फोटो के साथ हो। निकाह नामे में कम से कम दोनों पक्षों के दो-दो रिश्तेदारों की मौजूदगी की शहादत के कॉलम बढ़ाए जाएं।
काजी-ए-शहर मुफ्ती खुर्शीद अहमद मिस्बाही ने कहा कि निकाह के मामले में बहुत सख्त एहतियात की जरूरत है। दीन-ए-इस्लाम में किसी के साथ धोखा फरेब, जोर जबरदस्ती, बेहयाई, बेशर्मी आदि की कोई गुंजाइश नहीं। उलेमा-ए-किराम से गुजारिश है कि वह अपनी तहरीरों व तकरीरों के जरिए निकाह जैसे संजीदा मसले पर बराबर रोशनी डालते रहें। अपने-अपने इलाकों में मुस्लिम समाज का जायजा लेते रहें और निकाह के नाम पर जहां कहीं कोई खराबी के आसार देखें जहां तक मुमकिन हो उसे दूर करने की कोशिश करें। बगैर जांच पड़ताल के किसी का निकाह हरगिज न पढ़ाएं।
मुफ्ती-ए-गोरखपुर मुफ्ती अख्तर हुसैन मन्नानी ने कहा कि निकाह का समाज की पाकीजगी में बड़ा अहम किरदार है। धोखा देकर या जबरन धर्म परिवर्तन करके निकाह करना मुनासिब नहीं है। इस तरह का निकाह जायज नहीं है। निकाह में सादगी का विशेष ध्यान रखें। मां-बाप का मर्तबा बहुत बड़ा है इसलिए लड़के-लड़की हर कदम पर उनकी इज्जतो अजमत का ख्याल रखें। मां-बाप की रजामंदी में दुनिया व आखिरत दोनों जहान की भलाई है। कोई ऐसा कदम न उठाएं जो नुकसान का सबब बने।
मुफ्ती-ए-गोरखपुर मुफ्ती अख्तर हुसैन मन्नानी ने कहा कि निकाह का समाज की पाकीजगी में बड़ा अहम किरदार है। धोखा देकर या जबरन धर्म परिवर्तन करके निकाह करना मुनासिब नहीं है। इस तरह का निकाह जायज नहीं है। निकाह में सादगी का विशेष ध्यान रखें। मां-बाप का मर्तबा बहुत बड़ा है इसलिए लड़के-लड़की हर कदम पर उनकी इज्जतो अजमत का ख्याल रखें। मां-बाप की रजामंदी में दुनिया व आखिरत दोनों जहान की भलाई है। कोई ऐसा कदम न उठाएं जो नुकसान का सबब बने।