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गोरखपुर: मृत पशुओं से भी कमाई करेगा नगर निगम, जानिए कैसे होगी आमदनी
Fri, 01 Oct 2021 01:48 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 01 Oct 2021 01:48 PM IST
सार
नगर निगम शहर के मृत पशुओं के निस्तारण को वैज्ञानिक ढंग से करने के लिए कोलकाता की एक कंपनी से करार करने जा रही है।
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गोरखपुर नगर निगम।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर में मरने वाले पशु आने वाले समय में नगर निगम के लिए बोझ नहीं बल्कि आमदनी का जरिया बन जाएंगे। नगर निगम इन मृत पशुओं के चमड़े, हड्डियों और नाखूनों से कमाई करेगा। यह नगर निगम की ओर से मृत पशुओं के निस्तारण के लिए एक कंपनी के माध्यम से लगाए जाने वाली अत्याधुनिक मशीन से संभव हो सकेगा।
नगर निगम शहर के मृत पशुओं के निस्तारण को वैज्ञानिक ढंग से करने के लिए कोलकाता की एक कंपनी से करार करने जा रही है। इसके लिए नगर निगम बोर्ड ने भी स्वीकृति दे दी है। इसी क्रम में कोलकाता की एटीके इंजीनियरिंग सर्विसेज नगर निगम क्षेत्र में एक अत्याधुनिक मशीन लगाने जा रही है। कंपनी के निदेशक आलोक करन ने बताया कि मृत पशुओं के चमड़े के अलावा हड्डियां और फैट का भी व्यावसायिक इस्तेमाल किया जा सकेगा।
बताया कि इस मशीन के जरिए मृत पशुओं के चमड़े को अलग करके इनकी बिक्री की जाएगी। हड्डियों और हड्डियों के चूर्ण का भी व्यावसायिक इस्तेमाल होगा क्योंकि इसका इस्तेमाल मुर्गियों का दाना बनाने वाली कंपनियां करती हैं। इसके अलावा पशुओं के नाखूनों को भी मशीन के द्वारा अलग करके इसको भी बेचने का काम किया जाएगा। वहीं मृत जानवरों के फैट को भी प्यूरीफाई कर निकाल लिया जाएगा, जिसका कास्मेटिक कंपनियां इस्तेमाल करती हैं। वहीं प्लांट से निकलने वाली पानी को पूरी तरह से प्यूरीफाई किया जाएगा।
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नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने बताया कि मृत पशुओं के वैज्ञानिक ढंग से निस्तारण के लिए कोलकाता की एक कंपनी से बातचीत चल रही है। जल्द ही कंपनी अपने प्रोजेक्ट का पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन देगी। कंपनी मृत पशुओं का न सिर्फ वैज्ञानिक ढंग से निस्तारण करेगी बल्कि पशुओं के चमड़े, हड्डियों, नाखूनों का व्यावसायिक इस्तेमाल करेगी। नगर निगम को भी इससे आय होगी।
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नगर निगम शहर के मृत पशुओं के निस्तारण को वैज्ञानिक ढंग से करने के लिए कोलकाता की एक कंपनी से करार करने जा रही है। इसके लिए नगर निगम बोर्ड ने भी स्वीकृति दे दी है। इसी क्रम में कोलकाता की एटीके इंजीनियरिंग सर्विसेज नगर निगम क्षेत्र में एक अत्याधुनिक मशीन लगाने जा रही है। कंपनी के निदेशक आलोक करन ने बताया कि मृत पशुओं के चमड़े के अलावा हड्डियां और फैट का भी व्यावसायिक इस्तेमाल किया जा सकेगा।
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बताया कि इस मशीन के जरिए मृत पशुओं के चमड़े को अलग करके इनकी बिक्री की जाएगी। हड्डियों और हड्डियों के चूर्ण का भी व्यावसायिक इस्तेमाल होगा क्योंकि इसका इस्तेमाल मुर्गियों का दाना बनाने वाली कंपनियां करती हैं। इसके अलावा पशुओं के नाखूनों को भी मशीन के द्वारा अलग करके इसको भी बेचने का काम किया जाएगा। वहीं मृत जानवरों के फैट को भी प्यूरीफाई कर निकाल लिया जाएगा, जिसका कास्मेटिक कंपनियां इस्तेमाल करती हैं। वहीं प्लांट से निकलने वाली पानी को पूरी तरह से प्यूरीफाई किया जाएगा।
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नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने बताया कि मृत पशुओं के वैज्ञानिक ढंग से निस्तारण के लिए कोलकाता की एक कंपनी से बातचीत चल रही है। जल्द ही कंपनी अपने प्रोजेक्ट का पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन देगी। कंपनी मृत पशुओं का न सिर्फ वैज्ञानिक ढंग से निस्तारण करेगी बल्कि पशुओं के चमड़े, हड्डियों, नाखूनों का व्यावसायिक इस्तेमाल करेगी। नगर निगम को भी इससे आय होगी।