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Gorakhpur News: नगर निगम कैबिनेट...वजूद के लिए सपा को फिर पड़ेगा भिड़ना
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मौजूदा हालात में कार्यकारिणी के 12 सदस्यों में सिर्फ एक पद की ही संभावना
एक वर्ष पूरा होने पर छह सदस्यों को पर्ची निकालकर वर्तमान कार्यकारिणी से किया जाएगा बाहर
सपा के विश्वजीत के भाजपा में आने पर अब सपा के दो कार्यकारिणी सदस्य ही बचे
रोहित सिंह
गोरखपुर। नगर निगम की कार्यकारिणी (कैबिनेट) में अब आने वाले दिनों में जगह बनाने के लिए समाजवादी पार्टी को जद्दोजहद करनी होगी। वर्तमान कार्यकारिणी में भाजपा के नौ और सपा के तीन पार्षद शामिल हैं। इसमें से सपा के एक पार्षद ने अब भाजपा का दामन थाम लिया है। ऐसे में अब सपा के दो सदस्य ही बचे हैं। चार माह बाद होने वाले चयन में अब पर्ची सिस्टम से सपा का एक भी पार्षद कार्यकारिणी से बाहर हो गया तो फिर जगह बना पाने में काफी जोर-आजमाइश करनी होगी।
दरअसल, निगम की पहली कार्यकारिणी के चुनाव के एक वर्ष बाद दूसरी का चुनाव होता है। ऐसे में वर्तमान सदस्यों में से पार्षद पर्ची निकालते हैं। जिन पार्षदों के नाम की पर्ची बाहर आएगी, वह कार्यकारिणी से बाहर हो जाएंगे। इसके बाद 80 पार्षद फिर से बाहर किए गए छह पार्षदों की जगह भरने के लिए चुनाव करेंगे। ऐसे में एक कार्यकारिणी के लिए 14 पार्षदों के मतदान की जरूरत पड़ेगी।
सपा के वर्तमान में अब 16 पार्षद ही बचे हैं। ऐसे में दूसरे पार्षद को मतदान के माध्यम से दोबारा कार्यकारिणी में शामिल करना मुश्किल हो जाएगा। इसका फायदा भाजपा को मिलेगा। कार्यकारिणी के कुल 13 सदस्यों में मतदान या साझेदारी से भाजपा के 12 पार्षदों का चयन तय है। यह सिलसिला आगे भी कार्यकारिणी के चुनाव में जारी रहेगा। इसे लेकर भी सपा के अंदरखाने में चिंता बनी हुई है।
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ऐसा इसलिए कि अभी तक जन सरोकार से जुड़े मुद्दों को लेकर सपा की तरफ से कार्यकारिणी की बैठक में दबाव बनाते देखा जाता था, लेकिन अब सपा का दावा कार्यकारिणी में भी कमजोर हो जाएगा।
पूर्व उपसभापति ने बताया कि कार्यकारिणी में अब भाजपा विकास कार्यों को लेकर और मुखर रहेगी। विकास के कामों के किसी भी प्रस्ताव को पहले कार्यकारिणी में पास कराया जाता है। फिर बोर्ड की बैठक में इसे रखने के बाद प्रभावी करते हैं। ऐसे में अब भाजपा को विकास कामों के लिए या वार्डों में सरकारी योजनाओं को प्रभावी बनाना और आसान होगा।
तो ये बनेंगे कार्यकारिणी चुनाव के हालात
सपा को कार्यकारिणी में दो सदस्यों की भी जगह बनाने में 28 पार्षदों के मतों की जरूरत होगी। एक कार्यकारिणी सदस्य पर 14 मत पड़ेंगे। ऐसे में दो सदस्यों के लिए 28 मत। वर्तमान में कुल 80 पार्षदों में अगर 28 का मत मान लें तो 52 पार्षद शेष बचेंगे, जो मतदान करेंगे, लेकिन भाजपा-सपा के एक और अन्य निर्दलों को मिलाकर खुद 58 पार्षद हो गए हैं। ऐसे में पहले से ही भाजपा इस संख्या में अधिक है। तो दो कार्यकारिणी के लिए सारे जोड़-तोड़ मिलाकर भी सपा बहुमत के मत तक नहीं पहुंच पाएगी।
दो पार्षदों के भाजपा और दो के सपा में आने की चर्चा
वर्तमान समय में कुल 80 पार्षदों में अब 58 पार्षद भाजपा के और 16 सपा के बचे हैं। दो पार्षद बसपा और चार निर्दल हैं। सत्ताधारी और विपक्ष के पार्षद भी मानते हैं कि अभी सपा के दो पार्षद भाजपा में जाने वाले हैं। इसी बार जाने की फिराक में थे, लेकिन पार्टी के एक जिम्मेदार नेता की पहल पर दोनों ने अपना इरादा बदल दिया था, लेकिन ये दूसरे पार्षदों के संपर्क में हैं। वहीं, दो निर्दल पार्षदों को लेकर चर्चा है कि वे जल्द ही समाजवादी पार्टी का दामन थाम सकते हैं।
सपा के सिर्फ एक पार्षद विश्वजीत ने ही बदला पाला
समाजवादी पार्टी के विश्वजीत त्रिपाठी उर्फ सोनू ने ही समाजवादी पार्टी का दामन छोड़कर भाजपा का दामन थामा है। सपा के महानगर अध्यक्ष शब्बीर कुरैशी ने आरोप लगाते हुए कहा कि विश्वजीत त्रिपाठी 2022 से ही संदिग्ध थे। त्रिपाठी एक बड़े कारोबारी हैं और भाजपा में जाना उन्होंने अपने व्यापार के लिए हितकर समझा। भाजपा सरकार के सरकारी तंत्रों के दमनकारी नीति से प्रभावित और डर तक विश्वजीत भाजपा में चले गए। लोग भय से भाजपा में जा रहे हैं। दावा किया कि भाजपा के कई बड़े नेता सपा के संपर्क में हैं।
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एक वर्ष पूरा होने पर छह सदस्यों को पर्ची निकालकर वर्तमान कार्यकारिणी से किया जाएगा बाहर
सपा के विश्वजीत के भाजपा में आने पर अब सपा के दो कार्यकारिणी सदस्य ही बचे
रोहित सिंह
गोरखपुर। नगर निगम की कार्यकारिणी (कैबिनेट) में अब आने वाले दिनों में जगह बनाने के लिए समाजवादी पार्टी को जद्दोजहद करनी होगी। वर्तमान कार्यकारिणी में भाजपा के नौ और सपा के तीन पार्षद शामिल हैं। इसमें से सपा के एक पार्षद ने अब भाजपा का दामन थाम लिया है। ऐसे में अब सपा के दो सदस्य ही बचे हैं। चार माह बाद होने वाले चयन में अब पर्ची सिस्टम से सपा का एक भी पार्षद कार्यकारिणी से बाहर हो गया तो फिर जगह बना पाने में काफी जोर-आजमाइश करनी होगी।
दरअसल, निगम की पहली कार्यकारिणी के चुनाव के एक वर्ष बाद दूसरी का चुनाव होता है। ऐसे में वर्तमान सदस्यों में से पार्षद पर्ची निकालते हैं। जिन पार्षदों के नाम की पर्ची बाहर आएगी, वह कार्यकारिणी से बाहर हो जाएंगे। इसके बाद 80 पार्षद फिर से बाहर किए गए छह पार्षदों की जगह भरने के लिए चुनाव करेंगे। ऐसे में एक कार्यकारिणी के लिए 14 पार्षदों के मतदान की जरूरत पड़ेगी।
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सपा के वर्तमान में अब 16 पार्षद ही बचे हैं। ऐसे में दूसरे पार्षद को मतदान के माध्यम से दोबारा कार्यकारिणी में शामिल करना मुश्किल हो जाएगा। इसका फायदा भाजपा को मिलेगा। कार्यकारिणी के कुल 13 सदस्यों में मतदान या साझेदारी से भाजपा के 12 पार्षदों का चयन तय है। यह सिलसिला आगे भी कार्यकारिणी के चुनाव में जारी रहेगा। इसे लेकर भी सपा के अंदरखाने में चिंता बनी हुई है।
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ऐसा इसलिए कि अभी तक जन सरोकार से जुड़े मुद्दों को लेकर सपा की तरफ से कार्यकारिणी की बैठक में दबाव बनाते देखा जाता था, लेकिन अब सपा का दावा कार्यकारिणी में भी कमजोर हो जाएगा।
पूर्व उपसभापति ने बताया कि कार्यकारिणी में अब भाजपा विकास कार्यों को लेकर और मुखर रहेगी। विकास के कामों के किसी भी प्रस्ताव को पहले कार्यकारिणी में पास कराया जाता है। फिर बोर्ड की बैठक में इसे रखने के बाद प्रभावी करते हैं। ऐसे में अब भाजपा को विकास कामों के लिए या वार्डों में सरकारी योजनाओं को प्रभावी बनाना और आसान होगा।
तो ये बनेंगे कार्यकारिणी चुनाव के हालात
सपा को कार्यकारिणी में दो सदस्यों की भी जगह बनाने में 28 पार्षदों के मतों की जरूरत होगी। एक कार्यकारिणी सदस्य पर 14 मत पड़ेंगे। ऐसे में दो सदस्यों के लिए 28 मत। वर्तमान में कुल 80 पार्षदों में अगर 28 का मत मान लें तो 52 पार्षद शेष बचेंगे, जो मतदान करेंगे, लेकिन भाजपा-सपा के एक और अन्य निर्दलों को मिलाकर खुद 58 पार्षद हो गए हैं। ऐसे में पहले से ही भाजपा इस संख्या में अधिक है। तो दो कार्यकारिणी के लिए सारे जोड़-तोड़ मिलाकर भी सपा बहुमत के मत तक नहीं पहुंच पाएगी।
दो पार्षदों के भाजपा और दो के सपा में आने की चर्चा
वर्तमान समय में कुल 80 पार्षदों में अब 58 पार्षद भाजपा के और 16 सपा के बचे हैं। दो पार्षद बसपा और चार निर्दल हैं। सत्ताधारी और विपक्ष के पार्षद भी मानते हैं कि अभी सपा के दो पार्षद भाजपा में जाने वाले हैं। इसी बार जाने की फिराक में थे, लेकिन पार्टी के एक जिम्मेदार नेता की पहल पर दोनों ने अपना इरादा बदल दिया था, लेकिन ये दूसरे पार्षदों के संपर्क में हैं। वहीं, दो निर्दल पार्षदों को लेकर चर्चा है कि वे जल्द ही समाजवादी पार्टी का दामन थाम सकते हैं।
सपा के सिर्फ एक पार्षद विश्वजीत ने ही बदला पाला
समाजवादी पार्टी के विश्वजीत त्रिपाठी उर्फ सोनू ने ही समाजवादी पार्टी का दामन छोड़कर भाजपा का दामन थामा है। सपा के महानगर अध्यक्ष शब्बीर कुरैशी ने आरोप लगाते हुए कहा कि विश्वजीत त्रिपाठी 2022 से ही संदिग्ध थे। त्रिपाठी एक बड़े कारोबारी हैं और भाजपा में जाना उन्होंने अपने व्यापार के लिए हितकर समझा। भाजपा सरकार के सरकारी तंत्रों के दमनकारी नीति से प्रभावित और डर तक विश्वजीत भाजपा में चले गए। लोग भय से भाजपा में जा रहे हैं। दावा किया कि भाजपा के कई बड़े नेता सपा के संपर्क में हैं।