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Exclusive: प्रदूषण नियंत्रण के लिए गोरखपुर जिले का मॉडल पूरे प्रदेश में नंबर वन, 19 विभागों ने तैयार की है रिपोर्ट
Thu, 22 Jul 2021 02:33 PM IST
vivek shukla
रोहित सिंह, गोरखपुर।
रोहित सिंह, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 22 Jul 2021 02:33 PM IST
सार
धूल की मात्रा कम करने के लिए नगर निगम को बनानी है 40 किलोमीटर लंबी सड़कें, जो अभी कच्ची हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण का गोरखपुर मॉडल यूपी के 17 जिलों में अव्वल आया है। इसे नगर निगम सहित 19 विभागों ने मिलकर बनाया है। अब इस पर काम करके प्रदूषण का स्तर कम किया जा रहा है। धूल की मात्रा कम करने के लिए ही नगर निगम को 40 किलोमीटर लंबी सड़कें बनानी हैं, जो अभी कच्ची हैं। धूल का प्रमुख कारण बनती है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक, गोरखपुर सहित यूपी के 17 जिलों में हवा की गुणवत्ता सामान्य से खराब पाई गई थी। इसे लेकर ही डीएम के. विजयेंद्र पांडियन की अगुवाई में सरकारी विभागों की एक टीम गठित की गई थी। इसका नोडल अधिकारी वन विभागों को नामित किया गया था।
डीएफओ अविनाश कुमार ने बताया कि सभी विभागों ने मिलकर हवा की गुणवत्ता सुधारने, प्रदूषण के कारणों को पहचानने व उसे नियंत्रित करने के सुझाव दिए हैं। इसे प्रदेश स्तर पर पसंद किया गया है। जल्द ही इसी सुझाव पर दूसरे जिलों में भी काम होगा।
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ऐसे हुआ काम
शहर के सभी होटल, बैंक्वेट हॉल, मॉल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स समेत अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल होने वाले जेनरेटर सेट की क्षमता की जानकारी हासिल की गई। आरटीओ ने वाहनों की जानकारी दी और प्रदूषण का स्तर कम करने का प्रयास किया। इसका सकारात्मक परिणाम सामने आया है।
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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक, गोरखपुर सहित यूपी के 17 जिलों में हवा की गुणवत्ता सामान्य से खराब पाई गई थी। इसे लेकर ही डीएम के. विजयेंद्र पांडियन की अगुवाई में सरकारी विभागों की एक टीम गठित की गई थी। इसका नोडल अधिकारी वन विभागों को नामित किया गया था।
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डीएफओ अविनाश कुमार ने बताया कि सभी विभागों ने मिलकर हवा की गुणवत्ता सुधारने, प्रदूषण के कारणों को पहचानने व उसे नियंत्रित करने के सुझाव दिए हैं। इसे प्रदेश स्तर पर पसंद किया गया है। जल्द ही इसी सुझाव पर दूसरे जिलों में भी काम होगा।
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ऐसे हुआ काम
शहर के सभी होटल, बैंक्वेट हॉल, मॉल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स समेत अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल होने वाले जेनरेटर सेट की क्षमता की जानकारी हासिल की गई। आरटीओ ने वाहनों की जानकारी दी और प्रदूषण का स्तर कम करने का प्रयास किया। इसका सकारात्मक परिणाम सामने आया है।
इस बार 255 गुड डे
केंद्रीय पर्यावरण बोर्ड हर दिन के वायु प्रदूषण का स्तर मापता है। प्रदूषण के हिसाब से ही शहरों को गुड डे व बैड डे की श्रेणी में बांटा जाता है। 2019-20 में गोरखपुर के खाते में 365 में से 55 गुड डे आए थे, वहीं 2020-21 में 255 गुड डे रहे हैं। इसका मतलब है कि हवा की गुणवत्ता सुधरी है।
तीन और मशीनें लगेंगी
डीएफओ अविनाश कुमार ने बताया कि शहर में हवा की गुणवत्ता मापने के लिए गीडा, मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गीडा और इलेक्ट्रेट के पिछले हिस्से में मशीनें लगी हैं। दिसंबर 2021 तक तीन और मशीनें लगाई जाएंगी।
इन जिलों का अध्ययन
लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, आगरा, मुरादाबाद, प्रयागराज, गाजियाबाद, नोएडा, मेरठ, खुर्जा, गजरौला, रायबरेली, अनपरा, बरेली, फिरोजाबाद, गोरखपुर, झांसी।
डस्ट एप पर पंजीकरण अनिवार्य
डीएफओ ने कहा कि शहर के सभी विभागों जैसे, नगर निगम, लोक निर्माण विभाग व अन्य को डस्ट एप का इस्तेमाल करना अनिवार्य है। इसमें पंजीकरण कर खुद इसकी निगरानी करनी होगी। निर्माण किए जाने वाली योजना, ठेकेदार, साइट की डिटेल एप पर उलब्ध करानी होगी। शहर में निर्माण संबंधी काम से सबसे अधिक 41 प्रतिशत वायु प्रदूषण फैलता है। इसे हर हाल में कम किए जाने की जरूरत है।
तीन और मशीनें लगेंगी
डीएफओ अविनाश कुमार ने बताया कि शहर में हवा की गुणवत्ता मापने के लिए गीडा, मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गीडा और इलेक्ट्रेट के पिछले हिस्से में मशीनें लगी हैं। दिसंबर 2021 तक तीन और मशीनें लगाई जाएंगी।
इन जिलों का अध्ययन
लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, आगरा, मुरादाबाद, प्रयागराज, गाजियाबाद, नोएडा, मेरठ, खुर्जा, गजरौला, रायबरेली, अनपरा, बरेली, फिरोजाबाद, गोरखपुर, झांसी।
डस्ट एप पर पंजीकरण अनिवार्य
डीएफओ ने कहा कि शहर के सभी विभागों जैसे, नगर निगम, लोक निर्माण विभाग व अन्य को डस्ट एप का इस्तेमाल करना अनिवार्य है। इसमें पंजीकरण कर खुद इसकी निगरानी करनी होगी। निर्माण किए जाने वाली योजना, ठेकेदार, साइट की डिटेल एप पर उलब्ध करानी होगी। शहर में निर्माण संबंधी काम से सबसे अधिक 41 प्रतिशत वायु प्रदूषण फैलता है। इसे हर हाल में कम किए जाने की जरूरत है।