जिला अस्पताल के इमरजेंसी में हुई किशोरी की मौत, अब कर्मचारियों को सता रहा इस बात का डर
- जिला अस्पताल में शुक्रवार की रात भर्ती हुई थी, सांस की तकलीफ के साथ बुखार भी था
- देवरिया के लार की रहने वाली है किशोरी, अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों को सौंपा शव
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जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में 13 साल की किशोरी की मौत के बाद हड़कंप मच गया है। किशोरी को सांस लेने में तकलीफ थी और बुखार भी था। आनन-फानन में उसे आईसीयू के इमरजेंसी में शिफ्ट किया गया था। वह करीब आठ घंटे तक अस्पताल में भर्ती थी। इस दौरान उसकी मौत हो गई।
लेकिन इसके बाद भी उसकी कोरोना जांच नहीं हो सकी। देर रात ही शव परिजनों को सौंप दिया गया। इसके बाद परिजन शव लेकर देवरिया के लार चले गए। घटना के बाद से ही कर्मचारी सकते में है।
जानकारी के मुताबिक देवरिया के लार निवासी 13 साल की किशोरी को परिजन शुक्रवार की शाम 7:15 बजे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। उसे सांस लेने में तकलीफ थी। खांसी भी आ रही थी। धड़कन भी तेज चल रही थी। साथ ही गले में दर्द भी था।
कोरोना जांच पर नहीं ले सके फैसला
डॉक्टरों ने उसे पीडियाट्रिक आईसीयू में भर्ती किया। आईसीयू में रहने के दौरान दो घंटे बाद उसकी हालत और बिगड़ गई। नौ बजे के करीब उसे इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कर आइसोलेट करते हुए ऑक्सीजन लगाया गया। रात में 3.20 पर किशोरी की मौत हो गई। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने शव परिजनों को सौंप दिया। रात में ही परिजन शव को लेकर देवरिया चले गए।
मौत के बाद भी किशोरी की कोरोना जांच नहीं हो सकी। डॉक्टरों के मुताबिक शुरुआती दौर में जो लक्षण थे, उस आधार पर किशोरी का कोरोना जांच के लिए नमूना लेना चाहिए था। लेकिन डॉक्टर तय नहीं कर सके कि कोरोना जांच कराई जाए या नहीं।
मौत के बाद कर्मचारी सकते है। पीआईसीयू और इमरजेंसी के कर्मचारी सबसे ज्यादा डरे हुए हैं। वह पीपी किट में नहीं थे। सुरक्षा के नाम पर सिर्फ कपड़े का मास्क और ग्लब्स उनके पास था। शनिवार को दिनभर यह चर्चा का विषय बना रहा।
जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. एसके श्रीवास्तव ने बताया कि मामले की जानकारी मिली है। मरीज की हालत नाजुक थी। उसकी कोरोना जांच के लिए सैंपल क्यों नहीं लिया गया। इसे दिखवाया जाएगा।