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मातृछाया फाउंडेशन की पहल: दो साल बाद घरवालों से मिली, छलके आंसू
Tue, 22 Nov 2022 01:59 PM IST
vivek shukla
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Tue, 22 Nov 2022 01:59 PM IST
सार
एसपी सिटी कृष्ण कुमार बिश्नोई और टीम के सदस्यों की उपस्थित में केक काटकर और शाल देकर सोमवार को युवती को माता-पिता के साथ घर भेज दिया गया। पुलिस लाइन, गोरखपुर ने मानसिक स्थिति खराब होने की वजह से एक साल पूर्व युवती को मातृछाया फाउंडेशन में भेजा था। जहां, मनोचिकित्सक डॉ. अमित शाही और टीम की ओर से युवती का इलाज किया गया।
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एसपी सिटी डॉ. कृष्ण कुमार विश्नोई। (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
मातृछाया में रहकर इलाज करा रही मानसिक रूप से कमजोर युवती (21 वर्ष) दो साल बाद अपने माता-पिता से मिली तो खुशी से आंखें छलक उठीं। मातृछाया में रहने वाले साथी भी अपनों का मिलन को देखकर भावुक हो गए। नम आंखों से अपनी सदस्या को विदाई दी।
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एसपी सिटी कृष्ण कुमार बिश्नोई और टीम के सदस्यों की उपस्थित में केक काटकर और शाल देकर सोमवार को युवती को माता-पिता के साथ घर भेज दिया गया। पुलिस लाइन, गोरखपुर ने मानसिक स्थिति खराब होने की वजह से एक साल पूर्व युवती को मातृछाया फाउंडेशन में भेजा था। जहां, मनोचिकित्सक डॉ. अमित शाही और टीम की ओर से युवती का इलाज किया गया।
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धीरे-धीरे युवती के मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होने लगा। लगभग एक साल की लगातार काउंसिलिंग के बाद युवती ने अपने घर का पता जिला महासमुन्द, छत्तीसगढ़ बताया। जिसके बाद टीम ने युवती के परिजनों को सूचना दी। रविवार को परिजन युवती को लेने मातृछाया आए।
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माता और पिता के अनुसार, युवती मानसिक अस्वस्थता की अवस्था में दो वर्ष पूर्व घर से निकल गई थी। बहुत खोजने के बाद भी पता नहीं लग पाया। पिता के अनुसार वे आस छोड़ चुके थे, बेटी को पाकर मां और पिता दोनो बेहद भावुक थे और टीम को बार-बार आशीर्वाद दिया। निदेशक आलोक मणि त्रिपाठी ने छत्तीसगढ़ पुलिस को धन्यवाद ज्ञापित किया, जिनके कारण युवती को उनका परिवार मिल सका।
छह महीने तक कुछ बोल नहीं पाती थी
मातृछाया फाउंडेशन में आने के बाद युवती छह महीने तक कुछ बोल नहीं पाती थी। उनके पिता किसान और मां गृहिणी हैं। निदेशक ने बताया कि संस्था की ओर से 20 से अधिक राज्यों में 90 से ज्यादा महिलाओं को मानसिक इलाज कर घर भेजा जा चुका है।