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गोरखपुर रेलवे स्टेशन: एनईआर में मैनुअल सिग्नल अब इतिहास का हिस्सा, रामनगर में भी लगा कलर लाइट सिंग्नल
Sun, 25 Jul 2021 07:07 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sun, 25 Jul 2021 07:07 PM IST
सार
एक मात्र बचे स्टेशन इज्जनगर के रामनगर में भी कलर लाइट सिग्नल की व्यवस्था कर दी गई है।
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कलर लाइट सिग्नल व मैनुअल सिग्नल।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों को मैनुअल सिग्नल देने की सुविधा अब इतिहास का हिस्सा बन गया है। एक मात्र बचे स्टेशन इज्जनगर के रामनगर में भी कलर लाइट सिग्नल की व्यवस्था कर दी गई है।
पूर्वोत्तर रेलवे के सभी स्टेशनों पर सिगनलिंग प्रणाली की इलेक्ट्रानिक इंटरलॉकिंग कर दी गई है तथा स्टेशनों को 25 के.वी. (ए.सी.) के रेल विद्युतीकरण के अनुकूल उपयुक्त उपकरणों से लैस कर दिया गया है।
पूर्वोत्तर रेलवे के इज्जतनगर मंडल में आखिरी बचे एक मात्र मैकेनिकल इंटरलॉकिंग वाले रामनगर स्टेशन पर इलेक्ट्रानिक इंटरलॉकिंग की व्यवस्था कर दिए जाने के फलस्वरूप अब पूर्वोत्तर रेलवे पर कोई भी मैकेनिकल इंटरलॉकिंग व्यवस्था वाला स्टेशन नहीं रह गया है।
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इस कार्य के पूरा हो जाने से पूर्वोत्तर रेलवे के सभी बड़ी लाईन के स्टेशन ‘कलर लाइट सिगनल‘ से युक्त हो गए। इसी के साथ पुराने लिवर फ्रेम से संचालित होने वाले ‘सेमाफोर सिगनल‘ बड़ी लाईन से पूरी तरह समाप्त हो गए। विदित हो कि गोरखपुर रेलवे स्टेशन का पैनल इंटरलॉकिंग वर्ष 1984 में हुआ था।
पुरानी सिगनलिंग प्रणाली में यार्ड में अधिकतम गति मात्र 50 किमी. प्रति घंटा अनुमेय थी जबकि नए प्रणाली में अधिकतम गति 110 किमी. प्रति घंटा अनुमेय है। पुरानी व्यवस्था में सिगनलिंग की प्रक्रिया में ज्यादा समय लगता था तथा ज्यादा मेंटेनेन्स की आवश्यकता थी, जबकि नए सिस्टम में समय भी नहीं लगता है तथा मेंटेनेन्स-फ्री भी है। कलर लाइट सिगनल की रात्रिकालीन दृष्यता भी पुराने सेमाफोर सिगनल की तुलना में बहुत बेहतर है।
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पूर्वोत्तर रेलवे के सभी स्टेशनों पर सिगनलिंग प्रणाली की इलेक्ट्रानिक इंटरलॉकिंग कर दी गई है तथा स्टेशनों को 25 के.वी. (ए.सी.) के रेल विद्युतीकरण के अनुकूल उपयुक्त उपकरणों से लैस कर दिया गया है।
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पूर्वोत्तर रेलवे के इज्जतनगर मंडल में आखिरी बचे एक मात्र मैकेनिकल इंटरलॉकिंग वाले रामनगर स्टेशन पर इलेक्ट्रानिक इंटरलॉकिंग की व्यवस्था कर दिए जाने के फलस्वरूप अब पूर्वोत्तर रेलवे पर कोई भी मैकेनिकल इंटरलॉकिंग व्यवस्था वाला स्टेशन नहीं रह गया है।
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इस कार्य के पूरा हो जाने से पूर्वोत्तर रेलवे के सभी बड़ी लाईन के स्टेशन ‘कलर लाइट सिगनल‘ से युक्त हो गए। इसी के साथ पुराने लिवर फ्रेम से संचालित होने वाले ‘सेमाफोर सिगनल‘ बड़ी लाईन से पूरी तरह समाप्त हो गए। विदित हो कि गोरखपुर रेलवे स्टेशन का पैनल इंटरलॉकिंग वर्ष 1984 में हुआ था।
पुरानी सिगनलिंग प्रणाली में यार्ड में अधिकतम गति मात्र 50 किमी. प्रति घंटा अनुमेय थी जबकि नए प्रणाली में अधिकतम गति 110 किमी. प्रति घंटा अनुमेय है। पुरानी व्यवस्था में सिगनलिंग की प्रक्रिया में ज्यादा समय लगता था तथा ज्यादा मेंटेनेन्स की आवश्यकता थी, जबकि नए सिस्टम में समय भी नहीं लगता है तथा मेंटेनेन्स-फ्री भी है। कलर लाइट सिगनल की रात्रिकालीन दृष्यता भी पुराने सेमाफोर सिगनल की तुलना में बहुत बेहतर है।