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जिस शख्स को डेढ़ साल से पुलिस नहीं पकड़ पाई, उसे पीड़ित के रिश्तेदारों ने पकड़ा

Wed, 12 Feb 2020 06:00 PM IST
हरीशचंद सिंह डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर।
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर। Published by: हरीशचंद सिंह Updated Wed, 12 Feb 2020 06:00 PM IST
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Man caught by relatives of victims not Police after one and a half year
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
गैर इरादतन हत्या के मामले में पिछले डेढ़ साल से जिस झोलाछाप रामखेलावन को बांसगांव पुलिस नहीं पकड़ पा रही थी, वह पीड़ित के रिश्तेदारों के हत्थे चढ़ गया। उसे पैंडलेगंज पुलिस चौकी (थाना कैंट) के हवाले कर दिया गया। आरोपित के पकड़े जाने की जानकारी कैंट पुलिस ने बड़हलगंज थाने में दे दी, मगर पुलिस उसे लेने नहीं आई। आखिर रात साढ़े आठ बजे कैंट पुलिस ने आरोपित को छोड़ दिया।
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जानकारी के मुताबिक गलत इलाज से मनोज राम त्रिपाठी की मौत के मामले के आरोपित रामखेलावन को रामगढ़ ताल क्षेत्र में घूमते देखा गया। मनोज राम त्रिपाठी के रिश्तेदारों ने ही उसे देखा। वे उसे काफी दिनों से तलाश रहे थे। उन्होंने उसे पकड़ कर पैडलेगंज पुलिस को सौंप दिया। खजनी इलाके के झुड़िया गांव निवासी मनोज राम त्रिपाठी की बांसगांव के हरनही में झोलाछाप डॉक्टर के इंजेक्शन लगाने के बाद मौत हो गई थी।
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बांसगांव थाना क्षेत्र के भैंसा गांव निवासी अशोक कुमार शुक्ला ने इस मामले में रामखेलावन पर गैर इरादतन हत्या के आरोप में केस दर्ज कराया था। अशोक शुक्ला ने पुलिस को दी तहरीर में बताया था कि वह अपने ईंट भट्ठा पर जा रहे थे कि रास्ते में हरनही चौराहे पर श्रीराम मेडिकल स्टोर पर उन्हें उनके दामाद व खजनी थाना क्षेत्र के झुड़िया गांव निवासी मनोज राम त्रिपाठी मिल गए।
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मनोज त्रिपाठी की कमर में दर्द था। वह दवा लेने आए थे। मेडिकल स्टोर पर बैठने वाले डॉक्टर रामखेलावन ने दर्द ठीक करने के लिए इंजेक्शन लगाया। उसके दो से तीन मिनट बाद ही मनोज राम त्रिपाठी बेहोश हो गए और मुंह से झाग निकलने लगा। बाद में उनकी मौत हो गई थी।

तीन थानों में हो चुकी है विवेचना

बांसगांव में दर्ज एफआईआर के बाद रामखेलावन ने विवेचना बेलीपार थाने में ट्रांसफर कर दी थी। हालांकि बांसगांव पुलिस ने आरोपित की संपत्ति कुर्क करने तक की कार्रवाई कर दी थी। बावजूद इसके, वह पुलिस के हाथ नहीं आया। बेलीपार में आठ महीने तक विवेचना रही, पर कोई नतीजा सामने नहीं आया। बाद में यहां से बड़हलगंज केस ट्रांसफर कर दिया गया। सबसे बड़ी बात यह थी कि पीड़ित की सहमति के बिना ही विवेचना की फाइल इस थाने से उस थाने घुमाई जाती रही।

कुर्की की कार्रवाई कर दी अब बोले रिपोर्ट नहीं आई
पुलिस का इस मामले में अजब ही खेल सामने आ रहा है। पुलिस ने आरोपित के फरार होने को आधार बनाते हुए कोर्ट से कुर्की का आदेश हासिल कर कार्रवाई भी कर दी। अब पकड़े जाने के बाद उसकी गिरफ्तारी से ही इंकार कर रहे हैं। बड़हलगंज पुलिस का कहना है कि इंजेक्शन गलत लगा था इसकी डॉक्टर से रिपोर्ट आनी है। रिपोर्ट नहीं आने की वजह से गिरफ्तारी नहीं कर सकते हैं।

इंस्पेक्टर कैंट रवि राय ने कहा कि बड़हलगंज पुलिस से मैने बात की है। उन्हें बताया कि उनका मुल्जिम मेरे पास है। उनका कहना है कि अभी विवेचना चल रही है। इंजेक्शन के मामले में डॉक्टर की रिपोर्ट नहीं आई है। जब तक डॉक्टर की रिपोर्ट नहीं आती तब तक मैं गिरफ्तारी नहीं कर सकता हूं। अब अगर बड़हलगंज पुलिस गिरफ्तारी करने को तैयार नहीं है तो मैं अपने यहां कैसे रख सकता हूं ?
 
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