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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Major General SK Jaiswal narrated story on completion of 50 years of India Pakistan Victory War

भारत-पाक युद्ध: सेवानिवृत्त मेजर जनरल एसके जायसवाल ने सुनाई दास्तां, बोले- भारत ने पुंगली ब्रिज पर कब्जा कर रोक दिया था पाक सेना को

Fri, 17 Dec 2021 11:56 AM IST
vivek shukla उदयभान त्रिपाठी, गोरखपुर।
उदयभान त्रिपाठी, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 17 Dec 2021 11:56 AM IST
सार

11 दिसंबर को भारतीय सेना के जवानों ने पुंगली ब्रिज पर कब्जा कर लिया था। खजूरा गांव के पास पाक सेना के हमले में तीन अफसर व चार जवान शहीद हुए थे।

 

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Major General SK Jaiswal narrated story on completion of 50 years of India Pakistan Victory War
सेवानिवृत्त मेजर जनरल एसके जायसवाल - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

वर्ष 1971 में पूर्वी पाकिस्तान में बिगड़े हालात को देखते हुए भारत सरकार ने सेना को कार्रवाई का आदेश दिया था। उस युद्ध में अनेक घटनाएं यादगार रहीं, लेकिन ढाका पर कब्जे से पहले भारतीय सेना की तरफ से पुंगली ब्रिज पर कब्जे की कहानी बड़ी रोचक है। उस अभियान का हिस्सा रहे गोरखपुर निवासी सेवानिवृत्त मेजर जनरल एसके जायसवाल बताते हैं कि पुंगली ब्रिज पर कब्जा होते ही ढाका में बची पाकिस्तानी सेना असहाय हो गई और लड़ाई जल्दी खत्म होने की उम्मीद प्रबल हो गई।
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सेवानिवृत्त मेजर जनरल एसके जायसवाल बताते हैं कि उन दिनों हमारी बटालियन कोलकाता के बैरकपुर में थी। संदेश मिलते ही 50 पैराशूट ब्रिगेड को पूर्वी पाकिस्तान के जैसोर भेजा गया। जवानों को वहां सेना के विमान से उतारा गया। वहां पाकिस्तानी सैनिक पहले ही कंटोनमेंट एरिया छोड़कर भाग चुके थे। यहां अपनी स्थिति मजबूत करने के बाद भारतीय सेना मगूरा पर कब्जा करने आगे बढ़ी। रास्ते में खजूरा गांव के पास पाकिस्तानी सेना ने एक स्कूल बिल्डिंग की आड़ लेकर भारतीय सैनिकों पर गोलियों की बौछार कर दी। धोखे से किए गए इस हमले में कर्नल आरपी सिंह, कैप्टन रामदास व भारत मसंद और चार जवान शहीद हो गए।
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संभलकर किया दूसरा हमला

भारतीय सेना ने अपनी रणनीति को चेक किया और दोबारा जवानों को एयर लिफ्ट कराया गया। इस बार बाजी हमारे हाथ लगी और तंगेल के पोस्ट पर हमारा कब्जा हो गया। पाकिस्तानी सेना लगातार पीछे भाग रही थी। वहीं हर दिन जीत के साथ भारतीय सैनिकों का उत्साह चरम पर था।
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11 दिसंबर को मिला दोबारा टास्क

भारतीय सेना ढाका के नजदीक पहुंच चुकी थी। ढाका से उत्तर-पश्चिम दिशा में स्थित पुंगली ब्रिज के रास्ते पाकिस्तान ढाका में अपने सैनिकों को रसद, गोला-बारूद व अन्य सहायता पहुंचा रहा था। इसलिए पुंगली ब्रिज पर कब्जे की रणनीति बनी। 11 दिसंबर को सेना की एक टुकड़ी को यहां भी एयरलिफ्ट कराया गया और सीधी लड़ाई में हमने ब्रिज पर अपना कब्जा कर लिया। इससे ढाका में पाकिस्तानी सेना को मिलने वाली मदद का रास्ता बंद हो गया। वैसे तो इस युद्ध में बहुत से ऐसे अवसर थे जो बेहद महत्वपूर्ण थे लेकिन पुंगली ब्रिज पर कब्जा होते ही पाकिस्तानी सेना का बचा आत्मविश्वास भी टूट गया। इसके पांच दिन बाद ही 16 दिसंबर को पाकिस्तानी सेना ने दूसरे विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा सैन्य आत्मसमर्पण किया। 
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