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गोरखपुर गीता प्रेस: ‘कृपानुभूति अंक’ होगा कल्याण का विशेषांक, अब तक प्रकाशित हो चुकी हैं 16.50 करोड़ प्रतियां
Sat, 25 Sep 2021 04:58 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 25 Sep 2021 04:58 PM IST
सार
गीता प्रेस से कल्याण का प्रकाशन पहली बार अगस्त 1926 में हुआ था। तब से अब तक 16.50 करोड़ से अधिक प्रतियां कल्याण की छप चुकी हैं। पत्रिका के करीब पौने दो लाख नियमित पाठक हैं जिसमें 4700 आजीवन सदस्य हैं।
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गोरखपुर गीता प्रेस।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
गीता प्रेस से प्रकाशित होने वाली विश्वविख्यात पत्रिका कल्याण का 96वां विशेषांक ‘कृपानुभूति अंक’ होगा। जनवरी में प्रकाशित होने वाली इस पत्रिका के प्रकाशन के लिए गीता प्रेस में तैयारियां चल रही हैं। लेखकों से लेख भी मंगा लिए गए हैं जिसे संपादित किया जा रहा है।
करीब 500 पृष्ठों में छपने वाले कृपानुभूति अंक में कृपानुभूति शब्द का अर्थ, प्रकार, पात्रता, गणेश, शिव, शक्ति, विष्णु आदि पंचदेवों की कृपा संबंधी अनुभूतियों का वर्णन है। विभिन्न ग्रंथों से कुल 27 विषयों पर विस्तृत लेख होंगे।
16.50 करोड़ प्रतियां हो चुकी हैं प्रकाशित
गीता प्रेस से कल्याण का प्रकाशन पहली बार अगस्त 1926 में हुआ था। तब से अब तक 16.50 करोड़ से अधिक प्रतियां कल्याण की छप चुकी हैं। पत्रिका के करीब पौने दो लाख नियमित पाठक हैं जिसमें 4700 आजीवन सदस्य हैं।
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गीता प्रेस के उत्पाद प्रबंधक डॉ. लालमणि तिवारी ने कहा कि कल्याण पत्रिका का 96वां विशेषांक कृपानुभूति अंक होगा। इसके प्रकाशन के लिए लेखकों के लेख पिछले महीने ही मंगा लिए गए हैं। वर्तमान में इसके संपादन का कार्य चल रहा है। जनवरी महीने में इसका प्रकाशन किया जाता है।
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करीब 500 पृष्ठों में छपने वाले कृपानुभूति अंक में कृपानुभूति शब्द का अर्थ, प्रकार, पात्रता, गणेश, शिव, शक्ति, विष्णु आदि पंचदेवों की कृपा संबंधी अनुभूतियों का वर्णन है। विभिन्न ग्रंथों से कुल 27 विषयों पर विस्तृत लेख होंगे।
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16.50 करोड़ प्रतियां हो चुकी हैं प्रकाशित
गीता प्रेस से कल्याण का प्रकाशन पहली बार अगस्त 1926 में हुआ था। तब से अब तक 16.50 करोड़ से अधिक प्रतियां कल्याण की छप चुकी हैं। पत्रिका के करीब पौने दो लाख नियमित पाठक हैं जिसमें 4700 आजीवन सदस्य हैं।
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गीता प्रेस के उत्पाद प्रबंधक डॉ. लालमणि तिवारी ने कहा कि कल्याण पत्रिका का 96वां विशेषांक कृपानुभूति अंक होगा। इसके प्रकाशन के लिए लेखकों के लेख पिछले महीने ही मंगा लिए गए हैं। वर्तमान में इसके संपादन का कार्य चल रहा है। जनवरी महीने में इसका प्रकाशन किया जाता है।