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धर्म कर्म: जानिए हिंदू पंचांग में क्या है कृष्ण और शुक्ल पक्ष, क्या है इससे जुड़ी पौराणिक कहानी

Fri, 25 Jun 2021 03:54 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 25 Jun 2021 03:54 PM IST
सार

पूर्णिमा से अमावस्या तक बीच के 15 दिनों को कृष्णपक्ष जबकि अमावस्या से पूर्णिमा तक के 15 दिनों को शुक्लपक्ष कहा जाता है।

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Know what is Krishna and Shukla Paksha in Hindu Panchang
पंचांग। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

हिंदू पंचांग में 12 महीने होते हैं। प्रत्येक महीना 30 दिनों का होता है। चंद्रमा की कलाओं के ज्यादा या कम होने के अनुसार ही महीने को दो पक्षों में बांटा गया है। इसे कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष कहते हैं। पूर्णिमा से अमावस्या तक बीच के 15 दिनों को कृष्णपक्ष जबकि अमावस्या से पूर्णिमा तक के 15 दिनों को शुक्लपक्ष कहा जाता है। अखिल भारतीय विद्वत महासंघ के केंद्रीय महामंत्री पंडित बृजेश पांडेय के अनुसार आइए जानते हैं कैसे हुई थी कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की शुरुआत।

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ऐसे हुई कृष्ण पक्ष की शुरुआत
पौराणिक कथा के अनुसार, प्रजापति दक्ष की 27 बेटियां थीं। इन सभी का विवाह दक्ष प्रजापति ने चंद्रमा से किया। दक्ष प्रजापति की ये 27 पुत्रियां वास्तव में 27 नक्षत्र थी। चंद्रमा सभी में सबसे ज्यादा रोहिणी से प्रेम करते थे। चंद्रमा बाकी सभी से वह उतना प्रेम नहीं करते थे।
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ऐसे में बाकी सभी ने चंद्रमा की शिकायत अपने पिता दक्ष से कर दी। इसके बाद राजा दक्ष ने चंद्रमा से कहा कि वह मेरी सभी पुत्रियों के साथ समान व्यवहार करें। इसके बाद भी चंद्रमा का रोहिणी के प्रति प्यार कम नहीं हुआ और बाकी पत्नियों को नजर अंदाज करते रहें।
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इस बात को लेकर दक्ष प्रजापति गुस्से में आकर चंद्रमा को क्षय रोग का शाप दे दिया। इसी शाप के चलते चंद्रमा का तेज धीरे-धीरे कम होते गए। तभी से कृष्ण पक्ष की शुरुआत हुई।
 

ऐसे हुई शुक्ल पक्ष की शुरुआत

दक्ष प्रजापति के शाप के चलते क्षय रोग से चंद्रमा का तेज कम होता गया और उनका अंत करीब आने लगा। तब चंद्रमा ने महादेव की आराधना की और महादेव चंद्रमा की आराधना से प्रसन्न होकर चंद्रमा को अपनी जटा में धारण कर लिया।

ऐसा करने से चंद्र का तेज फिर से लौटने लगा। इससे शुक्ल पक्ष की शुरुआत हुई। चंद्र दक्ष के शाप से पूरी तरह से मुक्त नहीं हो सकते थे। ऐसे में महादेव ने शाप में बदलाव कर दिया। इसलिए चंद्र को बारी-बारी से कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में जाना पड़ता है।
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