कैसे होगा कोरोना पर वार: वायरस पर शोध में किट बनी बाधा, 100 से अधिक नमूने किए गए थे एकत्रित
डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि अलग-अलग राज्यों के नमूने इकट्ठा किए गए हैं। इनमें दिल्ली, मुंबई, केरल, बेंगलुरु जैसे राज्यों के नमूने शामिल हैं। इससे पता लगाने की कोशिश होगी कि आखिर कौन से राज्य का वायरस ज्यादा खतरनाक साबित हुआ और किसका असर कम हुआ।
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जीनोम सीक्वेसिंग के लिए शासन से किट नहीं मिलने की वजह से कोरोना वायरस की संरचना और बदलाव पर प्रस्तावित शोध शुरू नहीं हो सका। जबकि, शोध के लिए अलग-अलग आयु वर्ग और अलग-अलग राज्यों से 100 नमूने एकत्रित किए जा चुके हैं। नमूनों को माइनस 80 डिग्री तापमान में रखा गया है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग को इस पर शोध करना है।
जानकारी के मुताबिक, कोरोना वायरस पर दुनिया भर में शोध चल रहा है, मगर वायरस की संरचना और स्वरूप के बारे में अब तक कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकला है। अलग-अलग देशों में वायरस का प्रभाव अलग-अलग रहा है। पूर्वाचल की बात करें, तो वायरस का असर दिल्ली, मुंबई, केरल और तमिलनाडु की तुलना में यहां काफी कम रहा है।
इन राज्यों में तीसरी लहर में भी मौतें हुई हैं, जबकि जिले में तीसरी लहर में केवल नौ मौतें हुई हैं। ऐसे में बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने संरचना और उसके जीन में बदलाव होने वाले लक्षणों का पता लगाने के लिए शोध का फैसला लिया था, जो किट न मिलने की वजह से प्रभावित हो रहा है।
टीम में ये सदस्य शामिल किए गए थे
टीम में बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह, माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉ. विवेक सिंह शामिल थे।
अलग-अलग राज्यों के नमूने इकट्ठा किए गए
डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि अलग-अलग राज्यों के नमूने इकट्ठा किए गए हैं। इनमें दिल्ली, मुंबई, केरल, बेंगलुरु जैसे राज्यों के नमूने शामिल हैं। इससे पता लगाने की कोशिश होगी कि आखिर कौन से राज्य का वायरस ज्यादा खतरनाक साबित हुआ और किसका असर कम हुआ।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह ने कहा कि शोध के संबंध में सभी तैयारियां पूरी हो गई हैं। 100 नमूने इकट्ठा किए गए हैं, लेकिन जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए शासन ने किट नहीं दी है। इसकी वजह से शोध रुका हुआ है। जैसे ही किट मिलेगी, शोध शुरू कर दिया जाएगा।