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Gorakhpur News: ऑनलाइन बिक रहा मौत का मांझा नेटवर्क तक नहीं पहुंच सकी पुलिस
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गोरखपुर। चाइनीज मांझे से माधोपुर निवासी रमेश कन्नौजिया की मौत के बाद पुलिस ने प्रतिबंधित मांझे की बिक्री रोकने के लिए अभियान चलाया। इस दाैरान 10 लोगों को पकड़ा गया। ऑनलाइन बिक्री और होम डिलीवरी के नेटवर्क का पता लगाने के लिए साइबर एक्सपर्ट की मदद भी ली गई, लेकिन अब तक आपूर्ति से जुड़े लोगों की पहचान नहीं हो सकी है।
फुटकर विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई के बावजूद बड़े आपूर्तिकर्ताओं तक जांच नहीं पहुंच पाई है। इससे प्रतिबंधित मांझे की बिक्री पर प्रभावी रोक लगाने की पुलिस की रणनीति की कमियां उजागर हुई हैं। चाइनीज मांझे से हादसे के बाद पुलिस अभियान चलाती है, छापे मारे जाते हैं और विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। इसके बावजूद ऑनलाइन बिक्री की कड़ी नहीं खुल सकी है।
होम डिलीवरी की जानकारी सामने आने के बाद साइबर एक्सपर्ट की मदद लेने के बावजूद ठोस नतीजा नहीं निकलना जांच की प्रगति और निगरानी व्यवस्था को कमजोर दर्शाता है। ऑनलाइन मांग करने वालों, मांझा पहुंचाने वालों और थोक आपूर्तिकर्ताओं की पहचान सामने नहीं आई है। अभियान की निरंतरता और जांच के परिणामों की जानकारी भी स्पष्ट नहीं है।
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अभियान के दौरान पकड़े गए 10 विक्रेताओं से पूछताछ में ग्रामीण क्षेत्रों से शहर तक फैले कारोबार के संबंध में कुछ जानकारियां मिली हैं। पुलिस इनका सत्यापन कर रही है। गोदामों से आपूर्ति की आशंका और चार संदिग्धों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।
हालांकि, मांझे के स्रोत, थोक आपूर्तिकर्ताओं और ग्राहकों तक इसकी पहुंच के माध्यमों का पूरा खुलासा नहीं हुआ है। जांच की मौजूदा स्थिति से स्पष्ट है कि फुटकर विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई के बाद भी आपूर्ति की मुख्य कड़ियां जुड़ नहीं पाई हैं।
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फुटकर विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई के बावजूद बड़े आपूर्तिकर्ताओं तक जांच नहीं पहुंच पाई है। इससे प्रतिबंधित मांझे की बिक्री पर प्रभावी रोक लगाने की पुलिस की रणनीति की कमियां उजागर हुई हैं। चाइनीज मांझे से हादसे के बाद पुलिस अभियान चलाती है, छापे मारे जाते हैं और विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। इसके बावजूद ऑनलाइन बिक्री की कड़ी नहीं खुल सकी है।
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होम डिलीवरी की जानकारी सामने आने के बाद साइबर एक्सपर्ट की मदद लेने के बावजूद ठोस नतीजा नहीं निकलना जांच की प्रगति और निगरानी व्यवस्था को कमजोर दर्शाता है। ऑनलाइन मांग करने वालों, मांझा पहुंचाने वालों और थोक आपूर्तिकर्ताओं की पहचान सामने नहीं आई है। अभियान की निरंतरता और जांच के परिणामों की जानकारी भी स्पष्ट नहीं है।
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अभियान के दौरान पकड़े गए 10 विक्रेताओं से पूछताछ में ग्रामीण क्षेत्रों से शहर तक फैले कारोबार के संबंध में कुछ जानकारियां मिली हैं। पुलिस इनका सत्यापन कर रही है। गोदामों से आपूर्ति की आशंका और चार संदिग्धों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।
हालांकि, मांझे के स्रोत, थोक आपूर्तिकर्ताओं और ग्राहकों तक इसकी पहुंच के माध्यमों का पूरा खुलासा नहीं हुआ है। जांच की मौजूदा स्थिति से स्पष्ट है कि फुटकर विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई के बाद भी आपूर्ति की मुख्य कड़ियां जुड़ नहीं पाई हैं।