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बांट दिए गए थे मनमाने तरीके से लोन: कंगाली से उबरने में लगा जिला सहकारी बैंक, फंसे हैं 40 करोड़

Thu, 28 Sep 2023 11:50 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 28 Sep 2023 11:50 AM IST
सार

सहकारी बैंक डीजीएम जिला वीरेंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि गोरखपुर और महराजगंज में करीब 35 करोड़ की रिकवरी अभी नहीं हो पाई है। इसके लिए प्रयास किया जा रहा है। कुछ सफलता भी मिली है। मार्च 2024 तक बैंक की हालत सुधर जाएगी।

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jila Cooperative Bank trying to recover from poverty Rs 40 crores stuck
जिला सहकारी बैंक। (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला(

विस्तार

जिला सहकारी बैंक ने भी खाता और शेयरधारकों को मनमाने तरीके से लोन बांटे दिए। ये लोन करीब 15 वर्ष पूर्व दिए गए थे और रकम 60 करोड़ से ज्यादा की थी। जिसकी रिकवरी नहीं हुई और बैंक कंगाली के हालात पर पहुंच गया।

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आज भी करीब 35 करोड़ रुपये की रिकवरी नहीं हो पाई है। इसके लिए बैंक के अफसर पसीना बहा रहे हैं। हालात यह है कि खर्च कम करने के लिए शहर में दो ब्रांच बंद करके मेन ब्रांच में शिफ्ट कर दिए गए हैं, जबकि पुराने खाताधारकों के रुपये फंसे पड़े हैं। एक महीने में दो से चार हजार रुपये ही देने का नियम लागू किया गया है।
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जानकारी के मुताबिक, जिला सहकारी बैंक के गोरखपुर और महराजगंज का मुख्यालय यहां है। दोनों जिलों में करीब एक लाख से ज्यादा खाता और शेयरधारक हैं। वर्ष 2008 से 2010 तक करीब 60 करोड़ लोन दिए गए। इस रकम की रिकवरी नहीं हो सकी। बैंक घाटे में चला गया और बैंक कर्मियों को वेतन देने के रुपये नहीं बचे। जो रिकवरी होती रही उसी से वेतन दिया गया। साथ ही कुछ रुपये खाताधारकों को भी दिया गया, लेकिन इसके बाद हालात और खराब हो गए।
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शहर में ट्रांसपोर्टनगर और गोलघर शाखा को बंद करके मेन ब्रांच में शिफ्ट कर दिया गया। इसके बाद से खाताधारकों की ओर से रुपये जमा नहीं किए गए सिर्फ निकासी ही की गई। गोरखपुर और महराजगंज में अभी भी 35 करोड़ के लोन के फंसे हैं।
 

नए शेयरहोल्डर व खाताधारकों में दिए गए 50 करोड़ लोन

जिला सहकारी बैंक ने अब सभी शाखाओं को बेहतर स्थिति में लाने की पहल की है। इसके लिए सहकारी समितियों को पुनर्जीवित किया जा रहा है। नए सदस्य बनाए जा रहे हैं। बैंक ने शेयरहोल्डर व खाताधारकों में दिए गए 50 करोड़ लोन दिए हैं। जिला सहकारी बैंक के डीजीएम वीरेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि सभी खाताधारकों को अब एटीएम कार्ड मुहैया कराने की तैयारी है।

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तो खाली है बैंक का खजाना...वरना रुपये देने पर नहीं बनाते बहाना
नगर सहकारी बैंक में वित्तीय लेन-देन के चक्कर में खाताधारक और उनके वारिस फंस गए हैं। दरअसल, खाताधारकों व नामिनी को बैंक से उनकी जमा पूंजी की रकम नहीं मिल पा रही है। सत्रों की माने तो लंबे समय से लोन की रिकवरी न होने के चलते बैंक के पास पर्याप्त धन ही नहीं है। अभी भी चार करोड़ रुपये की रिकवरी होना है। यही कारण है कि खाताधारक अब अपने रुपये की निकासी के लिए परेशान हैं। हालांकि, अब सचिव ने पहल शुरू की है तो बीते दिनों करीब 50 लाख की रकम बैंक में लोन लेने वालों से जमा कराई गई है।

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बैंक की खस्ता हालत का उदाहरण खाताधारक नरेंद्र प्रताप सिंह हैं। जिन्होंने करीब 15 वर्ष पहले जंगल कौड़िया सहकारी बैंक की शाखा में अपना खाता खुलवाया था। इनके मुताबिक, इनके खाते में ब्याज और मूलधन मिलाकर कुल 60 हजार रुपये के आसपास जमा था। करीब साढ़े पांच वर्ष पहले इन्होंने अपने खाते से 20 हजार रुपये निकालने का आवेदन किया।

बैंक अधिकारियों ने उनको पांच सौ रुपये देने की बात कहते हुए बताया कि बैंक में पैसे नहीं हैं। इसके बाद उन्होंने बैंक जाना ही बंद कर दिया। ऐसे कई सारे लोग रोजाना बैंक का चक्कर लगा रहे हैं। बैंक से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर पहले के जिम्मेदारों ने बकाएदारों से वसूली की प्रक्रिया सख्ती से अपनाई होती तो शायद रकम नहीं फंसी होती। राहत की बात यह है कि पिछले दिनों में प्रबंधन की ओर से करीब 50 लाख रुपये एनपीए खातों में जमा करवाए गए हैं।

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विश्वविद्यालय में बैंक के फंसे हैं साढ़े चार करोड़

जिला सहकारी बैंक ने गोविवि के 344 शिक्षक व कर्मचारियों को विश्वविद्यालय वेतन भोगी समिति के माध्यम से लोन दिए थे। जो ब्याज सहित नौ करोड़ हो गई है। जब शिक्षकों व कर्मचारियों के पास नोटिस गई तो उन्होंने आपत्ति जताई। इसके बाद सचिव ने चार साल की रकम जमा कराई।

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सहकारी बैंक डीजीएम जिला वीरेंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि गोरखपुर और महराजगंज में करीब 35 करोड़ की रिकवरी अभी नहीं हो पाई है। इसके लिए प्रयास किया जा रहा है। कुछ सफलता भी मिली है। मार्च 2024 तक बैंक की हालत सुधर जाएगी। समितियों में सदस्य बनाए जा रहे हैं।

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