{"_id":"627a0f71ceea0d464c3d964d","slug":"investigation-affected-after-tehsildar-not-recording-statement-in-gorakhpur","type":"story","status":"publish","title_hn":"गोरखपुर: बयान नहीं दर्ज करा रहे तहसीलदार, जांच प्रभावित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गोरखपुर: बयान नहीं दर्ज करा रहे तहसीलदार, जांच प्रभावित
Tue, 10 May 2022 12:38 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Tue, 10 May 2022 12:38 PM IST
सार
रजिस्ट्री कार्यालय में भ्रष्टाचार मामले में दर्ज केस को गुजर गए एक महीने, डीएम के आदेश पर दर्ज हुआ था मुकदमा, सीओ कैंट कर रहे विवेचना।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
रजिस्ट्री कार्यालय और आरटीओ दफ्तर में भ्रष्टाचार मामले में दर्ज केस की जांच आगे नहीं बढ़ पा रही है। इसकी वजह मुकदमा दर्ज कराने वाले तहसीलदार का बयान न दर्ज कराना है। एक महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है। विवेचना कर रहे सीओ कैंट तीन बार नोटिस भेज चुके हैं, फिर भी मामला जहां का तहां है। लिहाजा, जांच प्रक्रिया धीमी पड़ गई है।
जानकारी के मुताबिक, डीएम के आदेश पर 10 अप्रैल को तहसीलदार सदर वीरेंद्र गुप्ता ने रजिस्ट्री कार्यालय व आरटीओ में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ उप निबंधक केके तिवारी समेत 12 लोगों पर कूटरचित दस्तावेज तैयार कर जालसाजी करने और 7/13 भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराया है। कैंट व शाहपुर थाने में दर्ज मुकदमों की विवेचना दोनों सर्किल के सीओ कर रहे हैं।
मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने रजिस्ट्री कार्यालय के बिचौलिए विजय मिश्रा, अशोक उपाध्याय व शाहपुर पुलिस ने आरटीओ कार्यालय के होमगार्ड अर्जुन को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। नामजद आरोपी उप निबंधक केके तिवारी, बिचौलिए का काम करने वाले जितेंद्र जायसवाल, राजेश्वर सिंह के साथ ही भ्रष्टाचार में लिप्त आरटीओ के अधिकारी व कर्मचारियों तक अभी पुलिस नहीं पहुंच सकी है।
विज्ञापन
आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य देने के लिए मुकदमा दर्ज कराने वाले तहसीलदार सदर ने किस आधार पर मुकदमा दर्ज कराए हैं, इसके प्रमाण अभी तक विवेचक को नहीं दे पाए।
विज्ञापन
जानकारी के मुताबिक, डीएम के आदेश पर 10 अप्रैल को तहसीलदार सदर वीरेंद्र गुप्ता ने रजिस्ट्री कार्यालय व आरटीओ में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ उप निबंधक केके तिवारी समेत 12 लोगों पर कूटरचित दस्तावेज तैयार कर जालसाजी करने और 7/13 भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराया है। कैंट व शाहपुर थाने में दर्ज मुकदमों की विवेचना दोनों सर्किल के सीओ कर रहे हैं।
विज्ञापन
मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने रजिस्ट्री कार्यालय के बिचौलिए विजय मिश्रा, अशोक उपाध्याय व शाहपुर पुलिस ने आरटीओ कार्यालय के होमगार्ड अर्जुन को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। नामजद आरोपी उप निबंधक केके तिवारी, बिचौलिए का काम करने वाले जितेंद्र जायसवाल, राजेश्वर सिंह के साथ ही भ्रष्टाचार में लिप्त आरटीओ के अधिकारी व कर्मचारियों तक अभी पुलिस नहीं पहुंच सकी है।
विज्ञापन
आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य देने के लिए मुकदमा दर्ज कराने वाले तहसीलदार सदर ने किस आधार पर मुकदमा दर्ज कराए हैं, इसके प्रमाण अभी तक विवेचक को नहीं दे पाए।