गोरखपुर का हाल: मुख्य अभियंता की भी नहीं सुन रहे जांच अधिकारी, दे रहे तारीख पर तारीख
बिजली निगम के सूत्रों ने बताया कि ऐसे गंभीर मामलों में स्थानीय स्तर पर मुख्य अभियंता के सेवानिवृत्त होने का इंतजार किया जा रहा। सितंबर में उनका कार्यकाल पूरा हो जाएगा और एक अक्तूबर को नए मुख्य अभियंता पदभार ग्रहण कर लेंगे। ऐसे में अगर अभी मामला दबा रह गया तो जांच करने और रिपोर्ट देने में थोड़ा और अतिरिक्त समय मिल जाएगा।
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बिजली निगम में हुए गोलमाल की जांच के लिए समितियां तो गठित होती हैं लेकिन जांच अधिकारी रिपोर्ट के लिए तारीख पर तारीख देते रहते हैं। न कभी जांच पूरी होती है, न कार्रवाई होती है। ऐसा सिर्फ स्थानीय स्तर के जांच निर्देशों पर हो रहा। चेयरमैन द्वारा गठित टीम 24 से 48 घंटों के भीतर जांच भी कर लेती और रिपोर्ट भी सौंप देती। इसपर चेयरमैन की तरफ से कार्रवाई भी कर दी जाती। चेयरमैन के निर्देशों को ही स्थानीय अभियंता गंभीरता से लेते हैं। मुख्य अभियंता द्वारा गठित टीम समय से जांच करने की जगह शायद मुख्य अभियंता के सेवानिवृत्त होने का इंतजार कर रही है।
बिजली निगम के सूत्रों ने बताया कि ऐसे गंभीर मामलों में स्थानीय स्तर पर मुख्य अभियंता के सेवानिवृत्त होने का इंतजार किया जा रहा। सितंबर में उनका कार्यकाल पूरा हो जाएगा और एक अक्तूबर को नए मुख्य अभियंता पदभार ग्रहण कर लेंगे। ऐसे में अगर अभी मामला दबा रह गया तो जांच करने और रिपोर्ट देने में थोड़ा और अतिरिक्त समय मिल जाएगा।
दरअसल, स्थानीय स्तर पर अनियमितताओं की सूचनाओं पर मुख्य अभियंता ने अपने स्तर से टीम गठित कर जांच का निर्देश दिया था। जैसे, बक्शीपुर खंड में तत्कालीन एसडीओ, जेई और राजस्व लिपिकों पर 22 बिजली बिलों में गड़बड़ी कर निगम को लाखों रुपये की क्षति पहुंचाने का आरोप लगा था। मामला 2018 से चल रहा था।
विजिलेंस की टीम ने जुलाई में मुख्य अभियंता से मिलकर स्थानीय स्तर पर आर्थिक गणना कर, निगम को हुई राजस्व क्षति समेत अन्य की गणना कर पूरी रिपोर्ट मांगी थी, जिसपर शीर्ष प्रबंधन को रिपोर्ट सौंप कर आगे की कार्रवाई करवाई जा सके। लेकिन, समय बीतता गया और जांच टीम को वित्तीय अनियमितता मामले की जांच करने तक का समय नहीं मिला। ऐसे ही अन्य मामलों में स्थानीय अभियंता जांच निर्देशों को निपटा दे रहे हैं। संवाद
चेयरमैन से शिकायत और हुई कार्रवाई
मुख्य अभियंता की गठित टीम द्वारा निर्णय नहीं मिलने की वजह से ही उपभोक्ता भी शायद सीधे चेयरमैन का रुख कर ले रहे हैं। कुशीनगर के एक मामले में उपभोक्ता ने सीधे चेयरमैन को फोन कर शिकायत की थी। 15 घंटे के भीतर उपभोक्ता की समस्या भी दूर होने के साथ अवर अभियंता पर कार्रवाई कर दी। ऐसे ही चौरीचौरा के एक मामले में उपभोक्ता की शिकायत पर चेयरमैन के निर्देश पर उसी दिन शाम को अवर अभियंता पर मुकदमा दर्ज कर निलंबित कर दिया गया।
मुख्य अभियंता एके सिंह ने कहा कि सभी अभियंता व कर्मचारी निगम के प्रति जिम्मेदार होते हैं। वित्तीय गड़बड़ी जैसे गंभीर मामलों में अगर जांच करने वाली टीम लापरवाही करती है और बिना तर्क के अतिरिक्त समय लगाती है तो यह खुद में गंभीर मामला है। विलंब होने पर एकपक्षीय कार्रवाई के लिए उक्त जिम्मेदार तैयार रहें। जांच में वित्तीय अनियमितता पाए जाने पर तय समय से अधिक विलंब होने पर उन जांच अधिकारियों को भी इसमें दोषी माना जा सकता है।
केस-1
बक्शीपुर खंड में पिछले दिनों वित्तीय अनियमितता की जांच के लिए मुख्य अभियंता ने दो सदस्यीय टीम गठित की थी। महीनों बीत गए, जांच में तैनात एक अधिकारी का दूसरे जिले में तबादला हो गया। 4 अगस्त को मुख्य अभियंता ने नई टीम गठित कर फिर से जांच का रिमाइंडर (अनुस्मारक पत्र) भी भेजा। तीन कार्यदिवस के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश भी दिया। इसके बाद भी जांच अभी तक नहीं शुरू हो सकी, पूरी कब करेंगे? अब भी सवाल है।
केस 2
शहरी खंड के अलग-अलग क्षेत्र में बिजली सुधार संबंधी काम करवाए गए थे। निगम के मुताबिक, इस काम को पूरा करने के बाद उक्त फर्म की तरफ से बार-बार बिल जमा कर भुगतान लिया गया। इस संदर्भ में मुख्य अभियंता ने टीम गठित की थी। लेकिन, जांच अधिकारियों को निगम के धन के नुकसान की चिंता नहीं। 8 जुलाई को मुख्य अभियंता ने पत्र लिखकर एक सप्ताह में पूरी रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था। लेकिन, मामला जस का तस लटका हुआ है।