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नशीली दवाओं की इंटरनेशनल तस्करी का मामला: गोरखपुर से भी हुई थी नशीली दवाओं की सप्लाई, ड्रग विभाग को मिले सुबूत
Thu, 12 Aug 2021 11:18 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 12 Aug 2021 11:18 AM IST
सार
महराजगंज में पिछले दिनों पकड़ी गईं थीं 700 करोड़ की नशीली दवाएं। भालोटिया में स्थित है थोक दवा की दुकान, जहां से हुई सप्लाई।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
महाराजगंज जिले में पिछले दिनों करीब 700 करोड़ की नशीली दवाओं की बरामदगी के मामले में अब जांच गोरखपुर तक पहुंच गई है। औषधि प्रशासन विभाग को पड़ताल के दौरान गोरखपुर से दवाओं की आपूर्ति के सबूत मिले हैं। दवाओं की सप्लाई भालोटिया मार्केट स्थित दवा की थोक दुकान से हुई है। जांच टीम गोरखपुर के एक व्यापारी से पूछताछ कर सकती है।
अभी तक की पड़ताल में पाया गया है कि भालोटिया में थोक व्यापार की बड़ी फर्म से महराजगंज के नशे के दवा कारोबारियों के संपर्क हैं। इस फर्म से समय-समय पर लाखों रुपये की दवाएं खरीदी गईं हैं। इसके अलावा कुछ दवाएं कटिंग के जरिए सप्लाई भी हैं। जिसकी रसीद नशे के कारोबारी नहीं दे पा रहे हैं।
विभाग को अब तक 21 लाख रुपये की दवाओं की खरीद की रसीद मिली है। इसमें ज्यादातर नशीली दवाओं की खरीद हुई है। बताया जा रहा है कि भालोटिया स्थित थोक दवा की दुकान से महाराजगंज के भी दो व्यापारियों ने दवाएं खरीदी हैं। इन व्यापारियों की महाराजगंज में दवा की थोक व फुटकर दुकान है। इसके अलावा उन्होंने गोरखपुर में भी थोक दवा के कारोबार में मोटी रकम लगाई है। इनमें से एक दुकान भालोटिया मार्केट में है। इसी दुकान के जरिए थोक दवा के कारोबार में उनका नेटवर्क है।
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एक्सपायर दवाओं को खपाने में होता है खेल
जानकारों के अनुसार दवाओं के खेल में यह नेटवर्क बेहद ही मजबूत है। यह बिहार के ग्रामीण अंचलों से लेकर नेपाल तक फैला है। इस नेटवर्क से एक्सपायर दवाओं को नए सिरे से लेबल लगाकर उन्हें खपा दिया जाता है।
सहायक आयुक्त औषधि एजाज अहमद ने बताया कि मामले की जांच तेजी से चल रही है। इसमें कुछ सबूत हाथ लगे हैं। इसमें कुछ थोक प्रतिष्ठानों की रसीद भी मिली है। जिनके आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। इस नेटवर्क को पूरी तरह से ध्वस्त किया जाएगा।
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अभी तक की पड़ताल में पाया गया है कि भालोटिया में थोक व्यापार की बड़ी फर्म से महराजगंज के नशे के दवा कारोबारियों के संपर्क हैं। इस फर्म से समय-समय पर लाखों रुपये की दवाएं खरीदी गईं हैं। इसके अलावा कुछ दवाएं कटिंग के जरिए सप्लाई भी हैं। जिसकी रसीद नशे के कारोबारी नहीं दे पा रहे हैं।
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विभाग को अब तक 21 लाख रुपये की दवाओं की खरीद की रसीद मिली है। इसमें ज्यादातर नशीली दवाओं की खरीद हुई है। बताया जा रहा है कि भालोटिया स्थित थोक दवा की दुकान से महाराजगंज के भी दो व्यापारियों ने दवाएं खरीदी हैं। इन व्यापारियों की महाराजगंज में दवा की थोक व फुटकर दुकान है। इसके अलावा उन्होंने गोरखपुर में भी थोक दवा के कारोबार में मोटी रकम लगाई है। इनमें से एक दुकान भालोटिया मार्केट में है। इसी दुकान के जरिए थोक दवा के कारोबार में उनका नेटवर्क है।
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एक्सपायर दवाओं को खपाने में होता है खेल
जानकारों के अनुसार दवाओं के खेल में यह नेटवर्क बेहद ही मजबूत है। यह बिहार के ग्रामीण अंचलों से लेकर नेपाल तक फैला है। इस नेटवर्क से एक्सपायर दवाओं को नए सिरे से लेबल लगाकर उन्हें खपा दिया जाता है।
सहायक आयुक्त औषधि एजाज अहमद ने बताया कि मामले की जांच तेजी से चल रही है। इसमें कुछ सबूत हाथ लगे हैं। इसमें कुछ थोक प्रतिष्ठानों की रसीद भी मिली है। जिनके आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। इस नेटवर्क को पूरी तरह से ध्वस्त किया जाएगा।