गोरखपुर में अनुदेशकों और शिक्षामित्रों में भी तलाशी जाएगी 'अनामिका'
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प्रदेश के 25 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी) में अनामिका शुक्ला के नाम से कार्यरत शिक्षिकाओं की तलाश का दायरा अब केजीबीवी, परिषदीय विद्यालयों से बढ़ाकर अनुदेशकों और शिक्षामित्रों तक भी कर दिया गया है।
जांच में पाया गया कि गोरखपुर के 20 केजीबीवी में अनामिका नाम की शिक्षिका नहीं पढ़ा रही है। मगर 3000 परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत 7300 शिक्षकों, 3201 शिक्षामित्र और 500 अनुदेशकों में भी अनामिका शुक्ला समेत कूटरचित दस्तावेजों के सहारे शिक्षण में जुटे लोगों की तलाश की जा रही है।
बेसिक शिक्षा विभाग को शक है कि इस नाम से कार्यरत शिक्षिकाओं की संख्या केजीबीवी के साथ ही दूसरे परिषदीय विद्यालयों में भी हो सकती है। इसलिए बेसिक शिक्षा मंत्री सतीशचंद द्विवेदी का निर्देश मिलने के बाद से जांच शुरू कर दी गई है।
संविदा पर नियुक्ति, मानदेय 30 हजार
प्रदेश में जरूरतमंद (कक्षा 6-8) की बालिकाओं के लिए लगभग हर ब्लॉक में केजीबीवी संचालित किए जाते हैं। जिले में ऐसे विद्यालयों की संख्या 20 है। इन विद्यालयों में संविदा पर 30 हजार रुपये मानदेय पर शिक्षिकाओं की नियुक्ति होती है। बीते दिनों मानव संपदा पोर्टल की व्यवस्था लागू हुई।
इसमें केजीबीवी की सभी शिक्षिकाओं का डाटा पोर्टल पर दर्ज किया गया। ऐसे में बागपत, प्रयागराज, मैनपुरी, आंबेडकरनगर समेत 25 जिलों में अनामिका शुक्ला नाम की शिक्षिका कार्यरत मिली। जिसके बाद मंत्री के निर्देश पर शिक्षिका के खिलाफ केस दर्ज हुआ और शनिवार को उसकी गिरफ्तारी हुई। ऐसे और मामलों की तलाश में पूरा महकमा जुटा है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी बीएन सिंह ने कहा कि शासन स्तर से निर्देश मिलने के बाद से केजीबीवी, परिषदीय विद्यालय में अध्यापन कार्य से जुड़े शिक्षकों, अनुदेशकों और शिक्षामित्रों में अनामिका शुक्ला समेत कूटरचित दस्तावेजों का सहारा लेकर नौकरी करने वालों की तलाश की जा रही है। इसकी रिपोर्ट बनाकर जल्द ही शासन को भेजी जाएगी।