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गोरखपुर: 27 मौतों में केवल एक मरीज के वैरिएंट की हो सकी पहचान, मौत का कारण बता रहे असाध्य रोग

Tue, 15 Feb 2022 01:03 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 15 Feb 2022 01:03 PM IST
सार

सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दुबे ने कहा कि तीसरी लहर में मरीजों की मौत बेहद कम हुई है, जिन मरीजों की मौत हुई है, उनमें सभी मरीजों को असाध्य बीमारियां थीं। इनमें 50 प्रतिशत से अधिक लोगों ने कोरोना का टीका भी नहीं लगवाया था।

 

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incurable disease causing death in Gorakhpur
गोरखपुर आईसीएमआर आरएमआरसी। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

कोरोना संक्रमण से हुई मौत के लिए इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की गाइडलाइन कुछ और है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग मौत का कारण असाध्य रोग मान रहे हैं। जबकि, आईसीएमआर ने कोरोना से होने वाली मौत के आंकड़े वैरिएंट के हिसाब से रखने निर्देश दिए हैं।

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तीसरी लहर की शुरुआत में आईसीएमआर ने बाहर से आने वालों में पॉजिटिव मिले लोगों की जीनोम सीक्वेंसिंग कराने के निर्देश दिए थे। इसके तहत 50 से अधिक मरीजों के नमूने जांच के लिए भेजे भी गए थे। इनमें किसी की रिपोर्ट नहीं मिली। इन सबके बीच दिसंबर में फिर से छह मरीजों के नमूने जांच के लिए भेजे गए। इनमें केवल एक संक्रमित मृतक की रिपोर्ट जारी की गई थी, जिसमें डेल्टा वैरिएंट की पुष्टि हुई थी।
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इसके बाद से 27 मृतक संक्रमितों के नमूने जांच के लिए भेजे गए, जिनकी रिपोर्ट बीआरडी को नहीं मिल सकी है। इसकी वजह से आईसीएमआर को यह जानकारी नहीं मिल पा रही है कि आखिर इन संक्रमितों की मौत की वजह क्या रही है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी तो यह भी मानने को तैयार नहीं हैं कि किसी भी संक्रमित की मौत का कारण कोरोना था। विशेषज्ञों का कहना है कि मौत की असल वजह असाध्य बीमारियां थीं, कोरोना तो केवल उत्प्रेरक बना।

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कहीं डेल्टा तो नहीं ले रहा जान

कोरोना की दूसरी लहर में डेल्टा वैरिएंट ने जबरदस्त तबाही मचाई थी। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 500 से अधिक मरीजों की जान डेल्टा वैरिएंट ने ली थी। तीसरी लहर में ओमिक्रॉन के मामले सबसे अधिक आए। राहत की बात यह रही है कि इस बार मौतों का ग्राफ बेहद कम है, लेकिन इसका कारण पता नहीं चल पा रहा। जबकि, बीआरडी मेडिकल कॉलेज से लगातार जांच के लिए नमूने केजीएमयू भेजे जाते रहे, लेकिन रिपोर्ट नहीं मिली।

कोरोना के जिला नोडल अधिकारी डॉ. एके सिंह ने बताया कि, जिन संक्रमितों की मौत इस बार हुई है, उनके वैरिएंट की जानकारी नहीं मिल सकी है। लेकिन, शुरुआती जांच में जो बातें सामने आई हैं, उनके मुताबिक मौत की वजह उनकी गंभीर बीमारियां बनी।  

सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दुबे ने कहा कि तीसरी लहर में मरीजों की मौत बेहद कम हुई है, जिन मरीजों की मौत हुई है, उनमें सभी मरीजों को असाध्य बीमारियां थीं। इनमें 50 प्रतिशत से अधिक लोगों ने कोरोना का टीका भी नहीं लगवाया था।

 

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