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चंदन तस्करी: आंखों में मिर्च...लाल मिर्च के बोरे में लाल चंदन- तस्करी का एक तरीका ये भी

Tue, 17 Sep 2024 10:29 AM IST
रोहित सिंह अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर Published by: रोहित सिंह Updated Tue, 17 Sep 2024 10:29 AM IST
सार

सूत्रों ने बताया कि चंदन की लकड़ी की खपत चीन में काफी मात्रा में है और ये वहां महंगी बिकती है। चीन में ये लकड़ी होती नहीं है तो इसे भारत के रास्ते तस्करी करवाया जाता है। चेन्नई से समुद्री मार्ग के अलावा दिल्ली, उत्तर प्रदेश के महाराजगंज और सिद्धार्थनगर से होकर इन लकड़ियों को नेपाल भेजा जाता है।

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In the methods of sandalwood smuggling, smugglers have started smuggling filling sandalwood with red chillies
सोनौली बार्डर पर कस्टम की टीम ने चंदन के लकड़ी की बड़ी खेप पकड़ी थी

विस्तार

दक्षिण भारत के जंगलों से कीमती चंदन की तस्करी गोरखपुर, महराजगंज के रास्ते नेपाल फिर चीन तक हो रही है। इसके लिए तस्कर लाल मिर्च के बोरे का झांसा देकर जांच एजेंसियों से बच निकल रहे हैं। बीते दिनों बड़े पैमाने पर चंदन पकड़े जाने के बाद जांच एजेंसियों ने सतर्कता बढ़ा दी है।

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चंदन की चेन्नई से उत्तर प्रदेश और महाराजगंज के रास्ते नेपाल में तस्करी हो रही है। अभी हाल में कस्टम की टीम ने ढाई करोड़ रुपये के चंदन की लकड़ी बरामद की थी। धंधेबाजों के विभागीय जोड़तोड़ से ये धंधा खूब तेजी से फैल रहा है। चंदन की लकड़ी की तस्करी होती जा रही है और वन विभाग, जीएसटी, पुलिस व आरटीओ को इसकी भनक तक नहीं लग पा रही। यही कारण है कि 2008 के बाद इतनी बड़ी खेप पकड़ी गई है।
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सूत्रों ने बताया कि चंदन की लकड़ी की खपत चीन में काफी मात्रा में है और ये वहां महंगी बिकती है। चीन में ये लकड़ी होती नहीं है तो इसे भारत के रास्ते तस्करी करवाया जाता है। चेन्नई से समुद्री मार्ग के अलावा दिल्ली, उत्तर प्रदेश के महाराजगंज और सिद्धार्थनगर से होकर इन लकड़ियों को नेपाल भेजा जाता है। चीन में चंदन की लकड़ी का वास्तु एवं अन्य प्रयोजनों में खासा उपयोग हो रहा है।
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इस बढ़ी हुई मांग को देखते हुए लाल चंदन भारत के विभिन्न प्रदेशों से होता हुआ नेपाल के रास्ते चीन भेजा जा रहा है। लाल चंदन तमिलनाडु के कुनूनरूरा जंगल के अलावा कर्नाटक के मैसूर एवं केरल के जंगलों में बड़े पैमाने पर पैदा होता है। वहां से इनकी तस्करी काफी पहले से अन्य देशों को होती आ रही है। इधर कुछ दिनों से चीन इसका सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा है।

चीन में मान्यता है कि लाल चंदन की लकड़ी से बने दरवाजे वास्तु दोष को कम करने में सहायक होते हैं। इसके अतिरिक्त लाल चंदन का उपयोग वहां धार्मिक कार्यों में भी होता है। इसके अतिरिक्त भारत के लाल चंदन का उपयोग परफ्यूम बनाने के साथ-साथ कास्मेटिक्स के सामान बनाने में भी होता है। इसके अलावा लाल चंदन के तेल से विभिन्न प्रकार की दवाएं भी बनती हैं।

सूत्रों के अनुसार, चीन में लाल चंदन की लकड़ी से निकाले गए तेल की कीमत एक हजार से डेढ़ हजार डालर प्रति किलो है। यही कारण है कि भारत के लाल चंदन की चीन में भारी मांग है और लोग मुंहमांगे मूल्य पर इसे खरीदने को तैयार रहते हैं। मांग इतनी रहती है कि उसकी आपूर्ति नहीं हो पाती। चीन में बढ़ी यह मांग ही तस्करों को बढ़ावा देती है। सूत्रों ने बताया कि लाल चंदन के तस्करों का नेटवर्क तमिलनाडु, कर्नाटक एवं केरल से ही शुरू हो जाता है।


महाराजगंज बॉर्डर से नेपाल और वहां से चीन में इसकी तस्करी की जाती है। छोटे चिरान में इसे करके सब्जी, खासकर मिर्च के साथ बोरे में भरकर वाहनों से नेपाल पहुंचा दिया जाता है। नेपाल से तिब्बत सीमा के रास्ते लाल चंदन की खेप चीन भेज दी जाती है। लाल मिर्च के बोरे में चंदन का टुकड़ा छिपा रहा जाता है। ऐसे ही तस्करी को अंजाम दिया जा रहा है।

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