फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   In Gorakhpur AIIMS, zebrafish model will be studied for oral cancer, it will help in treatment.

गोरखपुर एम्स: 'जेब्राफिश मॉडल' से होगा इंसान में कैंसर का अध्ययन, रिसर्च इलाज में होगी उपयोगी

Wed, 05 Feb 2025 11:24 AM IST
रोहित सिंह अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Published by: रोहित सिंह Updated Wed, 05 Feb 2025 11:24 AM IST
सार

एम्स में हाल में कार्सिनोमा (मुंह के कैंसर) पर अध्ययन किया गया है, जिसमें पता चला है कि इन मरीजों में टाइप-1 और टाइप-2 जीन का स्तर प्रीमैलिग्नेंट टिश्यू की तुलना में काफी कम है। इस अध्ययन रिपोर्ट को आधार मानकर जेब्राफिश मॉडल के जरिये कैंसर पर आगे के अध्ययन की रूपरेखा बनाई गई है।

विज्ञापन
In Gorakhpur AIIMS, zebrafish model will be studied for oral cancer, it will help in treatment.
गोरखपुर एम्स - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कैंसर रोग के कारणों की खोज और इलाज के लिए पारदर्शी मछली जेब्राफिश पर शोध होगा। इसके लिए एम्स गोरखपुर ने प्रस्ताव तैयार किया है। इस मछली और मानव अंगों के विकास में समानता की वजह से इस पर किए गए शोध से बीमारी के रहस्यों को समझना आसान होगा। इसकी कोशिकाओं में ट्यूमर के विकास को वैज्ञानिक देख सकेंगे। इस मछली का विकास तेजी से होने के कारण शोध परिणाम भी जल्द आने की उम्मीद रहेगी।

विज्ञापन


एम्स में हाल में कार्सिनोमा (मुंह के कैंसर) पर अध्ययन किया गया है, जिसमें पता चला है कि इन मरीजों में टाइप-1 और टाइप-2 जीन का स्तर प्रीमैलिग्नेंट टिश्यू की तुलना में काफी कम है। इस अध्ययन रिपोर्ट को आधार मानकर जेब्राफिश मॉडल के जरिये कैंसर पर आगे के अध्ययन की रूपरेखा बनाई गई है।
विज्ञापन


इस मछली में कैंसर के जीन को दोहरा कर देखा जाएगा कि कोशिकाओं में किस प्रकार के बदलाव हो रहे हैं। जेब्राफिश के भ्रूण पारदर्शी होते हैं, जिससे वैज्ञानिक ट्यूमर की वृद्धि और कैंसर कोशिकाओं के प्रसार को सीधे देख सकते हैं। यह जीव कई मामलों में मानव शरीर से मेल खाता है, जिससे कैंसर जैसे जटिल रोगों के अध्ययन के लिए एक उपयोगी मॉडल बन जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


अन्य जीवों की तुलना में जेब्राफिश बहुत तेजी से बढ़ता है, जिससे प्रयोगों के नतीजे जल्दी मिलते हैं। कैंसर के संभावित उपचार और नई दवाओं के परीक्षण में इस मॉडल के उपयोग से प्रभावी दवाओं की खोज में तेजी आएगी। पारदर्शी भ्रूण के कारण ट्यूमर के विकास को वास्तविक समय में ट्रैक किया जा सकता है।

शोधकर्ताओं का लक्ष्य जेब्राफिश में जेनेटिक म्यूटेशन और सेलुलर इंटरैक्शन का अध्ययन करना है, जिससे कैंसर की उत्पत्ति और शरीर पर इसके प्रभाव को बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा।


जेब्राफिश मॉडल का प्रस्ताव बनाया जा चुका है। इस प्रकार के शोध से कैंसर की वास्तविक स्थिति की पहचान जल्द हो सकेगी, जिससे उपचार शुरू करने में आसानी होगी। साथ ही कैंसर के उपचार के लिए प्रभावी दवाओं को भी खोजा जा सकेगा: डॉ. शैलेंद्र द्विवेदी, एसोसिएट प्रोफेसर, बायोकेमेस्ट्री विभाग, एम्स
 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed