गोरखपुर: कुछ भट्ठा संचालकों की मदद से कराया जा रहा अवैध खनन, भाजपा विधायक ने उठाया था मामला
खड़खेड़िया में बालू खनन का पट्टा दो कंपनियों को मिला है। निरीक्षण से पता चला कि इस समय बालू की खुदाई नहीं कराई जा रही है। एक कंपनी ने कुछ दिन पहले निर्धारित पट्टे के हिसाब से खुदाई कराई थी।
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भाजपा विधायक फतेह बहादुर सिंह ने मिट्टी व बालू के अवैध खनन का मामला उठाया तो पुलिस व प्रशासनिक अफसर सोमवार को दिन भर जांच करते रहे। एसडीएम पंकज दीक्षित, पुलिस क्षेत्राधिकारी अजय कुमार सिंह और खनन इंस्पेक्टर जितेंद्र कुमार शर्मा ने खनन के एक-एक स्पॉट को जाकर देखा। बताया जा रहा है कि मिट्टी खनन का ‘खेल’ कुछ भट्ठा संचालकों की मदद से किया जा रहा है।
कैंपियरगंज से भाजपा विधायक ने मिट्टी व बालू खनन का मामला विधानसभा में उठाने का फैसला किया है। इस संबंध में वे गत रविवार को ही उत्तर प्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव को पत्र भेज चुके हैं। इसका संज्ञान लेकर ही जिलाधिकारी विजय किरण आनंद ने संबंधित तहसील प्रशासनों से रिपोर्ट तलब की है। जिलाधिकारी के निर्देश के बाद प्रशासनिक, पुलिस व खनन की टीम ने अलग-अलग स्थानों की जांच की है।
जानकारी के मुताबिक, कैंपियरगंज के भौंराबारी में मिट्टी खनन के साक्ष्य मिले हैं। ग्रामीणों ने बयान दर्ज कराया कि पांच दिन पहले तक रात में मिट्टी का खनन कराया जाता था। इसमें कुछ भट्ठा संचालकों की मिलीभगत है। मिट्टी खनन में लगे जो वाहन पकड़े जाते हैं, उसे छुड़ाने कोई न कोई भट्ठा संचालक आ जाता है। रिगौली बांध के आसपास भी मिट्टी खुुदाई के साक्ष्य मिले हैं, लेकिन किसानों ने खुद मिट्टी निकालने की बात बताई है।
खड़खेड़िया में बालू खनन के दो पट्टे
खड़खेड़िया में बालू खनन का पट्टा दो कंपनियों को मिला है। निरीक्षण से पता चला कि इस समय बालू की खुदाई नहीं कराई जा रही है। एक कंपनी ने कुछ दिन पहले निर्धारित पट्टे के हिसाब से खुदाई कराई थी।
मिट्टी खुदाई में लगे वाहनों को थाने में खड़ा कराया
कैंपियरगंज के कुंजलगढ़ में मिट्टी की खुुदाई में लगे वाहनों को पुलिस ने सोमवार को खड़ा करा लिया है। इस बीच पीपीगंज के एक जनप्रतिनिधि सामने आए और कहा कि यह मिट्टी भट्ठे के लिए खुदवाई गई है, लेकिन अफसरों ने जनप्रतिनिधि का तर्क सिरे से खारिज कर दिया। साफ कहा कि कैंपियरगंज से मिट्टी पीपीगंज ले जाने का औचित्य नहीं बनता है। वाहनों को नहीं छोड़ा जाएगा। अगर दिक्कत है तो जिलाधिकारी से बात कर सकते हैं। इसके बाद जनप्रतिनिधि बैरंग ही लौट गए।