फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Illegal land traders trapped in pursuit of profit

गोरखपुर: मुनाफे के फेर में फंसे अवैध जमीन कारोबारी, पहले महायोजना अब काश्तकारों की मार

Tue, 19 Apr 2022 01:57 PM IST
vivek shukla अरूण चंद, गोरखपुर।
अरूण चंद, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 19 Apr 2022 01:57 PM IST
सार

महायोजना लागू होने तक निर्माण पर जीडीए ने लगा दी है रोक, 113 को जारी हुआ है नोटिस, जीडीए के सीमा विस्तार के बाद कई काश्तकार रेट बढ़ाने या अनुबंध तोड़ने की दी रहे चेतावनी।

विज्ञापन
Illegal land traders trapped in pursuit of profit
गोरखपुर विकास प्राधिकरण - फोटो : Social Media

विस्तार

गोरखपुर में ज्यादा मुनाफे के फेर में शहर से सटे ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से प्लाटिंग कर अवैध कॉलोनियां बसा रहे 200 से अधिक जमीन कारोबारी फंस गए हैं। उनपर दोहरी मार पड़ी है।

विज्ञापन


एक तरफ जीडीए ने पहले ही नोटिस देकर नई महायोजना 2031 लागू होने तक निर्माण कार्य पर रोक लगा दी है उधर, दूसरी तरफ जीडीए का सीमा विस्तार होने के बाद संबंधित गांवों के प्राधिकरण क्षेत्र में आ जाने और एक अगस्त से सर्किल रेट बढ़ने की उम्मीद में कई काश्तकारों ने भी चेतावनी देनी शुरू कर दी है। उनका कहना है कि वे जमीन के रेट बढ़ाएं या फिर अनुबंध तोड़े। ऐसे में अब तक काश्तकारों, जमीन लेने वालों के रुपये फंसाने वाले इन कारोबारियों के ही करोड़ों रुपये फंस गए हैं।
विज्ञापन


रोजाना काश्तकारों और इनके बीच बैठकों और तकरार का दौर चल रहा है। नाम न छापने की शर्त में कई जमीन कारोबारियों का कहना है कि प्राधिकरण की सख्ती और काश्तकारों को एडवांस देकर उनकी सांसें टंगी हुई हैं।  
विज्ञापन
विज्ञापन


यही नहीं, इन जमीन कारोबारियों के सामने एक और बड़ा संकट मंडरा रहा है। जैसे ही नई महायोजना लागू होगी, संबंधित क्षेत्र भी रियल इस्टेट रेगुलेटरी एक्ट (रेरा) के दायरे में आ जाएंगे। इससे प्लाटिंग कर कॉलोनी बसाने वालों को पहले जीडीए से ले-आउट पास कराना होगा। साथ ही रेरा की शर्तों के मुताबिक सड़क, नाली, बिजली, पार्क, ड्रेनेज, खाली क्षेत्र छोड़ना पड़ेगा। ऐसे में अब काश्तकारों को गुमराह कर औने-पौने दाम में उनकी जमीन का सौदा कर खुद मोटा मुनाफा कमाने वाले छोटे-छोटे जमीन कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ जाएंगी। अब इस कारोबार में खुद की पूंजी के दम पर काम करने वाले ही सफल हो सकेंगे।

 

जीडीए ने 113 लोगों को दे रखा है नोटिस
किसानों से अनुबंध कर उनकी जमीन अपने नाम से बेचने वालों पर गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने शिकंजा कस दिया है। जीडीए ने 113 ऐसे जमीन कारोबारियों को नोटिस देकर महायोजना-2031 तैयार होने तक निर्माण नहीं कराने का निर्देश दिया है। साथ ही जमीन के जरूरी दस्तावेज भी तलब किया है। इस सख्ती के बाद सैकड़ों जमीन कारोबारियों की 300 एकड़ से अधिक जमीन पर फिलहाल कोई निर्माण नहीं हो पा रहा है। जीडीए का कहना है कि  इससे अवैध कॉलोनियां बसने पर अंकुश तो लगेगा ही, किसानों को उनकी जमीन की उचित कीमत भी मिल सकेगी।  

नामी रियल इस्टेट कारोबारियों को ज्यादा समस्या नहीं
जीडीए के सीमा विस्तार और महायोजना-2031 से बड़े और नामी रियल इस्टेट कारोबारियों को ज्यादा समस्या नहीं है। ये लोग जरूरी सुविधाएं विकसित कर और ले-आउट पास कराने के साथ जरूरी औपचारिकताएं पूरी करके ही प्लाट बेचते हैं। प्रभावित वैसे लोग हो रहे हैं, जो काश्तकारों से अनुबंध करके उनकी जमीन को अपनी बताकर बेचते हैं। खोराबार से लेकर देवरिया रोड, मेडिकल कॉलेज रोड, पिपराइच रोड, वाराणसी और लखनऊ रोड पर इस तरह की तमाम अवैध कॉलोनियां बसाई जा रही हैं।

कई क्षेत्रों में कृषि की जमीन होगी आवासीय
नई महायोजना-2031 में शहर की सीमा से सटे प्राधिकरण के क्षेत्र की ज्यादातर जमीन कृषि से आवासीय की जा रही है। कृषि की जमीन सस्ती होती है जबकि आवासीय महंगी। ऐसे किसानों ने भी अपनी जमीन का दाम बढ़ा दिया है। अभी ये जमीन कारोबारी सिर्फ सड़क और बिजली के पोल आदि की मामूली सुविधाएं विकसित कर प्लाटिंग करके बेच रहे थे, लेकिन अब ऐसा नहीं कर पाएंगे।
 

किसानों को मिलेगी सही कीमत, प्लाट लेने वालों को सुविधाएं
नई महायोजना-2031 में जीडीए के दायरे वाले ज्यादातर क्षेत्र की कृषि की जमीन का भू-प्रयोग बदलकर आवासीय किया जा रहा है। आवासीय की कीमत अधिक होने की वजह से काश्तकारों को उनकी जमीन की अच्छी कीमत मिलेगी। वहीं, जीडीए द्वारा बढ़ाए गए दायरे को भी महायोजना-2031 में शामिल किए जाने के बाद कॉलोनी विकसित कर प्लॉट बेचने वालों को जीडीए से ले-आउट स्वीकृत कराना होगा। साथ ही रेरा में रजिस्ट्रेशन जरूरी हो जाएगा। इससे प्लाट लेने वालों को जरूरी सुविधाएं मिलेंगी। सड़क, नाली टूटने पर प्राधिकरण उसे दुरुस्त भी कराएगा।

284 से 641 वर्ग किलोमीटर हुआ जीडीए का दायरा
गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) का वर्तमान क्षेत्रफल 284.96 वर्ग किलोमीटर से  बढ़कर 641.73 वर्ग किलोमीटर हो गया है।  जीडीए में 233 नए राजस्व ग्राम शामिल किए गए हैं। लिहाजा, कुल राजस्व ग्रामों की संख्या बढ़कर 319 हो गई है।  प्राधिकरण के दायरे में आने वाले एरिया का वर्तमान क्षेत्रफल 284.96 वर्ग किलोमीटर था। इसमें 356.77 वर्ग किलोमीटर का इजाफा हुआ है।

अब प्राधिकरण के तहत कुल 641.73 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्रफल हो गया है।  राजस्व ग्रामों की बात करें तो प्राधिकरण की सीमा में अभी तक 86 राजस्व ग्राम आते थे। अब 233 और राजस्व ग्राम जुड़ गए हैं। यानी प्राधिकरण के दायरे में अब कुल 319 राजस्व ग्राम हो गए हैं। इसी तरह पहले नगर निकाय के तौर पर सिर्फ नगर निगम ही जीडीए के तहत आता था अब इनकी संख्या चार हो गई है। पिपराइच, पीपीगंज और मुंडेरा बाजार नगर पंचायतें भी अब प्राधिकरण क्षेत्र में शामिल हो गई हैं।  

उपाध्यक्ष प्रेम रंजन सिंह ने कहा कि अब कोई बिचौलिया काश्तकारों से कम दाम पर जमीन का सौदा कर ज्यादा मुनाफा नहीं कमा सकेगा। जीडीए ने जिस क्षेत्र में भी सीमा विस्तार किया है, उसे नई महायोजना में शामिल किया जा रहा है। ऐसे में अवैध तरीके से कॉलोनी बसाने वालों को नोटिस दिया गया है। साथ ही काम भी रुकवा दिया गया है। किसी ने भी नोटिस की अनदेखी कर निर्माण कराया, तो कार्रवाई की जाएगी। अब सीमा विस्तार वाले इलाकों में भी कॉलोनी विकसित करने के लिए जीडीए से ले-आउट स्वीकृत कराना होगा। साथ ही रेरा में पंजीकरण भी जरूरी है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed