दो टूक बोले गोरखपुर कमिश्नर: अवैध अस्पताल होंगे सार्वजनिक, एंबुलेंस पर होगा नाम
मरीजों को सरकारी अस्पताल से बरगलाकर प्राइवेट एंबुलेंस की मदद से नर्सिंग होम में पहुंचाया जाता है। इस पूरे खेल को पुलिस ने कार्रवाई और जांच कर खोला है। सत्यम नर्सिंग होम में गर्भवती की मौत के बाद जिले में अर्से बाद केस दर्ज कर जेल भेजने और गैंगस्टर की कार्रवाई की गई।
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गोरखपुर जिले में 144 एंबुलेंस बिना फिटनेस की सड़कों पर दौड़ रही हैं तो 187 नर्सिंग होम अवैध हैं। यह खुलासा खुद संबंधित विभाग के अफसरों ने कमिश्नर अनिल ढ़ींगरा के सामने किया है। दरअसल, बुधवार को एडीजी अखिल कुमार व कमिश्नर ने मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य, सीएमओ, परिवहन विभाग के अफसरों के बैठक की।
इस दौरान कमिश्नर ने दो टूक कहा, किसी भी मरीज की जिंदगी से न खेला जाए, यह हमारी जिम्मेदारी हैं। प्राइवेट मरीज-एंबुलेंस माफिया पर कार्रवाई की रुपरेखा तैयार करिए और इस पर हर विभाग कार्रवाई करें।
कमिश्नर ने अफसरों को एक सप्ताह की मोहलत देते हुए कहा कि बिना लाइसेंस के चल रहे अवैध नर्सिंग होम, पैथॉलॉजी की सूची को सार्वजनिक किया जाए। प्राइवेट एंबुलेंस जो वैध हैं, उस पर अस्पताल का नाम और नंबर लिखा हो, ताकि तीमारदार को भी पता चलें कि मरीज को किस अस्पताल लेकर एंबुलेंस वाला जा रहा है। उधर, जिला अस्पताल में एंबुलेंस खोले जाने का भी फैसला लिया गया है।
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जानकारी के मुताबिक, मरीजों को सरकारी अस्पताल से बरगलाकर प्राइवेट एंबुलेंस की मदद से नर्सिंग होम में पहुंचाया जाता है। इस पूरे खेल को पुलिस ने कार्रवाई और जांच कर खोला है। सत्यम नर्सिंग होम में गर्भवती की मौत के बाद जिले में अर्से बाद केस दर्ज कर जेल भेजने और गैंगस्टर की कार्रवाई की गई।
इसके बाद ही एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर के आदेश पर एएसपी मानुष पारिक ने जांच की और सभी विभागों को जांच रिपोर्ट कार्रवाई के लिए भेजा। लेकिन, कोई सूची नहीं ले रहा था। अब इस प्रकरण का सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी संज्ञान ले लिया है।
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इसके बाद ही एडीजी अखिल कुमार कमिश्नर अनिल ढींगरा ने आयुक्त सभागार में बुधवार को बैठक की। एंबुलेंस मरीज माफिया पर कार्रवाई की समीक्षा की गई और कमिश्नर ने कहा कि परिवहन विभाग और स्वास्थ्य विभाग अनफिट एंबुलेंस व बिना पंजीकरण के चलने वाले अस्पताल का लिस्ट सार्वजनिक करें।
कहा कि, एक सप्ताह में सभी एंबुलेंसों पर अस्पताल का नाम, अस्पताल का पंजीकरण संख्या एवं मोबाइल नंबर भी लिखा जाए। बैठक में आईजी जे. रविंद्र, डीएम कृष्णा करूणेश, एसएसपी डाॅ. गौरव ग्रोवर, एसपी सिटी कृष्ण कुमार विश्नोई, मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार, सीएमओ आशुतोष दुबे व अन्य विभाग के अफसर मौजूद रहें।
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सरकारी डॉक्टरों के प्राइवेट नेटवर्क की जांच करेगी एलआईयू
मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों के निजी नर्सिंग होम में प्रैक्टिस की गोपनीय जांच भी होगी। एलआईयू और स्वास्थ्य विभाग की टीम जांच कर इनकी सूची तैयार करेगी। इसमें प्राइवेट प्रैक्टिस के अलावा इस बात की जांच होगी कि संबंधित डॉक्टर का नर्सिंग होम से रिश्ता क्या है। क्योंकि जांच में सामने आया है कि कई प्राइवेट डॉक्टर निजी नर्सिंग होम के मालिक भी है और नए अस्पताल को चलाने के लिए ही सरकारी नौकरी में बने हैं। यहां से मरीजों को रेफर करने में इनकी भी भूमिका होती है। इस वजह से इस पूरे प्रकरण की गोपनीय जांच कराई जानी है।
यह दी गई जिम्मेदारी, एक सप्ताह में पूरी करनी है कार्रवाई
- जिला अस्पताल में पुलिस चौकी खोली जाएगी।
- मेडिकल कॉलेज गेट व परिसर में जगह-जगह सीसी टीवी कैमरे लगाए जाएं, लाइट बढ़ाई जाएगी।
- मेडिकल कॉलेज में आने वाले सभी एंबुलेंस के आने और जाने का ब्योरा दर्ज करना होगा।
- सीसी टीवी कैमरे का डीवीआर और कंट्रोल रूम मेडिकल कॉलेज पुलिस चौकी में होगा।
- एंबुलेंस में जीपीएस लगाए जाए, पंजीकरण नंबर, अस्पताल का नाम, मोबाइल नंबर लिखे जाएं।
- डीएम, एसएसपी को आईएमए के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर एंबुलेंस के संचालक पर वार्ता की जाए।
- प्राचार्य सुनिश्चित करें कि मेडिकल कॉलेज में मरीजों को बेहतर इलाज मिले, अनावश्यक रेफर न किया जाए।
- अवैध नर्सिंग होम, पैथॉलॉजी की सूची को सार्वजनिक किया जाए।
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जांच में अनफिट मिले दस एंबुलेंस पर जुर्माना
आरटीओ ने कार्रवाई को तेज भी कर दी है। आरटीओ अब तक 27 एंबुलेंसों की चेकिंग की है, इसमें से दस एंबुलेंस में कमी मिलने पर जुर्माना लगाया गया है। अनफिट मिले 6 एंबुलेंस पर पांच हजार और चार एंबुलेंस पर ढाई हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। आरटीओ प्रवर्तन संजय कुमार झा ने बताया कि जिले में एंबुलेंस की जांच और कार्रवाई जारी रहेगी।
फैक्ट फाइल
- जिले में कुल एंबुलेंस की संख्या: 516
- फिटनेस वैध एंबुलेंस की संख्या: 298
- फिटनेस समाप्त हो चुके प्राइवेट एंबुलेंस की संख्या: 144
- जिले में कुल नर्सिंग होम की संख्या: 472
- डेंटल क्लीनिक: 241
- पैथॉलॉजी: 152
- 50 बेड से अधिक के अस्पताल: 22
- बिना लाइसेंस के अस्पताल: 187