डॉक्टर की सलाह: कोरोना का तगड़ा झटका झेला है तो कड़ी मेहनत और कसरत से करें परहेज
हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. कुनाल ने कहा कि कोरोना पीड़ितों में हृदय रोग के मामले बढ़ रहे हैं। सडेन कॉर्डियक डेथ के मामले भी आ रहे हैं। इसमें कोरोना भी एक पक्ष हो सकता है। कई लोग ऐसे हैं जिन्हें हृदय संबंधी बीमारी बचपन से या जन्मजात होती है।
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कोरोना संक्रमण लगभग खत्म हो चुका है। लेकिन, उसका दंश अभी तक दर्द दे रहा है। इस महामारी से गंभीर रूप से पीड़ित हुए लोगों के फेफड़े कमजोर हो चुके हैं। कोई अस्थमा की चपेट में है तो किसी को दिल की बीमारी ने घेर लिया है। व्यायाम और बदली दिनचर्या से कम उम्र में लोगों की मौत की खबरों से लोग दहशत में हैं। लोग भ्रमित हैं कि खुद को स्वस्थ रखने के लिए वे नियमित व्यायाम करें या फिर आराम। डॉक्टरों की मानें तो ऐसी समस्या से परेशान लोगों के लिए हल्का व्यायाम ही बेहतर है। सप्ताह में सिर्फ चार दिन का व्यायाम ही काफी है।
मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशयलिटी ब्लॉक स्थित हृदय रोग विभाग में भी ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं, जिन्हें कोरोना के बाद दिक्कत आई है। इन मरीजों में 30 से 40 साल की महिलाओं की संख्या अधिक है। युवाओं में अनियमित दिनचर्या भी बीमारी बढ़ने की अहम वजह बन रही है। सहजनवां की 32 वर्षीया महिला को कोरोना हुआ था। बीमारी तो ठीक हो गई, लेकिन उसे सांस लेने में दिक्कत बनी रही। मेडिकल कॉलेज में जांच में पता चला कि कोरोना के दौरान फेफड़े में खून जमने से यह परेशानी है। अब वह अस्थमा की मरीज है।
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कुशीनगर के 38 वर्षीय कोरोना संक्रमित युवक अब हृदय रोग से परेशान है। उसके जैसे तमाम नौजवान हैं जो इन दिनों कोरोना के साइड इफेक्ट झेल रहे हैं। हर महीने में मेडिकल कॉलेज में आठ से 10 केस ऐसे आते हैं जो कोरोना पीड़ित थे। अब वह किसी अन्य बीमारी की चपेट में आ चुके हैं। इनमें एक ही बात समान होती है कि फेफड़े की कार्य क्षमता काफी कम हो चुकी है। ऐसे में इन लोगों को श्वसन संबंधी रोग हो रहे हैं। लक्षण के आधार पर सभी का इलाज हो रहा है।
प्रदूषण भी डाल रहा असर
कोरोना पीड़ित लोगों के लिए प्रदूषण भी अधिक खतरा बना हुआ है। जनरल फिजिशियन डॉ. बीके सुमन बताते हैं कि जिनको श्वसन संबंधी बीमारी है उनके लिए वायु प्रदूषण जानलेवा है। शहर में उड़ रही धूल और धुएं के चलते सबसे अधिक परेशानी उन्हीं लोगों को होगी, जो पहले से ही बीमार हैं। स्वस्थ लोग भी प्रदूषण से बीमार हो सकते हैं। एक अमेरिकी जनरल में इस बात का उल्लेख है कि प्रदूषित हवा में सांस लेने वाले लोगों में हृदय रोग का खतरा अधिक होता है।
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चेष्ट रोग विशेषज्ञ डॉ. अश्विनी मिश्रा ने कहा कि कोविड के दौरान कई मरीजों के फेफड़े में खून जम गया था। मरीज तो ठीक हो गए, लेकिन खून के थक्कों की वजह से उनके फेफड़ों की कार्यक्षमता कम हो गई। ऐसे मरीज अगर प्रदूषित वातावरण में जाएंगे या फेफड़े से अधिक कार्य लेने का प्रयास करेंगे तो जीवन पर खतरा हो सकता है। इसलिए अगर कोविड संक्रमित हो चुके हैं तो सेहत का नियमित ध्यान रखें। शरीर को पूरा आराम दें। इसके अलावा ऐसे लोग निमोनिया और इंफ्लुएंजा का टीका जरूर लगवा लें।
हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. कुनाल ने कहा कि कोरोना पीड़ितों में हृदय रोग के मामले बढ़ रहे हैं। सडेन कॉर्डियक डेथ के मामले भी आ रहे हैं। इसमें कोरोना भी एक पक्ष हो सकता है। कई लोग ऐसे हैं जिन्हें हृदय संबंधी बीमारी बचपन से या जन्मजात होती है। जब वे गंभीर रूप से बीमार होते हैं, तब इसका पता चलता है। युवा भी बच्चों व बुजुर्गों की तरह अपने स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहें। नियमित जांच से बीमारियों पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
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ये करें उपाय
- प्रदूषण व भीड़ भाड़ वाले इलाके में जाने से बचें।
- सप्ताह में चार दिन कुल मिलाकर 150 मिनट व्यायाम करें।
- बहुत तेज दौड़ने की बजाय तेज चाल से चलें, पसीना निकलना चाहिए।
- जिम में अगर ट्रेनिंग कर रहे हैं तो प्रशिक्षित ट्रेनर का होना बहुत जरूरी है।
- संतुलित खान-पान के साथ सोने और उठने के समय का भी ख्याल रखना जरूरी है।
- खाने में नमक, तेल व मसाले के प्रयोग को कम करें।