गोरखपुर: पति नाराज, तो मायके में रहने को मजबूर हो रही पत्नी
शराब और गृहकलह के चलते मध्यम वर्गीय परिवारों में तनाव बढ़ रहा है। महिला थाने में हर दिन ऐसी शिकायतें आ रही हैं। परिवारों को टूटने से बचाने के लिए काउंसिलिंग की जा रही है।
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सात वचनों में बंधे दंपती के रिश्तों पर शराब व पारिवारिक कलह भारी पड़ने लगी है। परेशान पत्नी ने अगर विरोध किया तो, उसे मजबूरन मायके में रहना पड़ रहा है। हक के लिए इनमें से कुछ महिलाएं थाने भी पहुंच रही हैं। महिला थाने के परिवार परामर्श केंद्र में ऐसे मामलों में सुलह-समझौता कराकर दंपती को एक साथ रहने के लिए राजी कराया जा रहा है।
सरकार महिला हिंसा के मामलों में कमी लाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। महिलाओं को भी जमीन व मकान का मालिक बनाने के साथ-साथ अब तो राशन कार्ड पर भी महिला मुखिया का ही नाम दर्ज किया जा रहा है। इन सबके बावजूद आधी आबादी को अभी भी ससुराल में सुरक्षित बने रहने के लिए पति और परिजनों की कृपा पर ही निर्भर रहना है।
महिला थाने के परिवार परामर्श केंद्र में आने वाले 10 में से आठ मामले ऐसे ही होते हैं, जिनमें शिकायत होती है कि पति नाराज होता है, तो मायके भेज देता है। वैवाहिक जीवन में आ रही दरार में घरेलू कलह की बड़ी वजह भी शराब बताई जा रही है।
महिला थाने की प्रभारी निरीक्षक प्रभा बताती हैं कि पारिवारिक विवाद के अधिकतर मामले ऐसे आते हैं, जिनमें पति के शराब पीने की आदत के चलते ही कलह होती है। मंगलवार को महिला थाने में 12 दंपतियों की काउंसिलिंग की गई। इनमें से ज्यादातर मामले पति के शराब पीकर मारपीट करने और विरोध करने पर जबरन मायके भेजने की समस्या से जुड़े थे।
केस-एक
गोरखनाथ क्षेत्र की एक महिला मोबाइल फोन पर मायके वालों से बात करती थी। इससे नाराज पति गाली गलौज करने लगा। सास भी बहू की बजाय बेटे का साथ देती हैं। विरोध करने पर नाराज पति ने मायके ले जाकर छोड़ दिया था। दोनों पक्ष को आमने-सामने बैठाकर काउंसिलिंग की गई।
केस-दो
नकहा नंबर एक की रहने वाली महिला का शराबी पति अक्सर पत्नी के साथ मारपीट करता है। बात-बात पर मायके भेजने की धमकी देता है। एक महीने से मायके में रही महिला ने पुलिस से गुहार लगाई। परिवार परामर्श केंद्र में इस दंपती की भी काउंसिलिंग की गई।
केस-तीन
खजनी क्षेत्र की रहने वाली महिला की पति से किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई। नाराज पति ने मायके ले जाकर छोड़ दिया। काफी प्रयास के बाद भी पत्नी को ले जाने के लिए तैयार नहीं था। दोनों पक्ष को बुलाकर काउंसिलिंग की गई। अब यह दंपती भी एक साथ रहने को राजी है।
गोविवि के समाजशास्त्र विभाग के अध्यापक दीपेंद्र मोहन सिंह ने कहा कि परिवार के सदस्यों के बीच भावनात्मक लगाव कम हो रहा है। परिणाम स्वरूप लोग कुंठा के शिकार हो रहे हैं। पारिवारिक विवाद के मामलों की शुरुआत में अक्सर दोनों पक्ष आवेश में रहते हैं। आर्थिक व पारिवारिक तनाव के चलते लोग तेजी से नशे के आदी हो रहे हैं। इसके बढ़ते कुप्रभाव से ऐसे मामलों की संख्या में वृद्धि होना स्वाभाविक है।