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Gorakhpur: बरसाना की तरह खास है गोरक्षनगरी की होली, शोभायात्राओं में नजर आता है समतामूलक समाज का प्रतिबिंब

Sun, 05 Mar 2023 08:52 AM IST
Digvijay Singh संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर Published by: Digvijay Singh Updated Sun, 05 Mar 2023 08:52 AM IST
सार

गोरखपुर में होली के अवसर पर दो प्रमुख शोभायात्राएं निकलती हैं। एक होलिका दहन की शाम पांडेयहाता से होलिका दहन उत्सव समिति की तरफ से तो दूसरी होली के दिन श्री होलिकोत्सव समिति व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बैनर तले।

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Holi of Gorakshanagari is special like Barsana in Gorakhpur
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बरसाना की तरह ही गोरक्षनगरी की होली खास है। दशकों से होलिका दहन व होलिकोत्सव शोभायात्रा में गोरक्षपीठ की सहभागिता ने यहां के रंगपर्व को समूचे पूर्वी उत्तर प्रदेश के आकर्षण का केंद्र बना दिया है। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी बतौर गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ शहर की दो महत्वपूर्ण शोभायात्राओं में सम्मिलित होते हैं। इन शोभायात्राओं में सामाजिक समरसता और समतामूलक समाज का प्रतिबिंब नजर आता है।

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गोरखपुर में होली के अवसर पर दो प्रमुख शोभायात्राएं निकलती हैं। एक होलिका दहन की शाम पांडेयहाता से होलिका दहन उत्सव समिति की तरफ से तो दूसरी होली के दिन श्री होलिकोत्सव समिति व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बैनर तले। इस वर्ष भी दोनों शोभायात्राओं में सम्मिलित होने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आयोजकों को सहमति प्रदान कर दी है।

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बतौर गोरक्षपीठाधीश्वर रंगपर्व के आयोजनों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सहभागिता गोरक्षपीठ के मूल में निहित संदेश के प्रसार का हिस्सा है। रंगों के प्रतीक रूप में उमंग व उल्लास का पर्व होली गोरक्षपीठ के सामाजिक समरसता अभियान का ही एक हिस्सा है। गोरक्षपीठ की विशेषताओं में छुआछूत, जातीय भेदभाव और ऊंच-नीच की खाई पाटने का जिक्र सतत होता रहा है।समाज में विभेद से परे लोक कल्याण ही नाथपंथ का मूल है और ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ, ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ द्वारा विस्तारित इस अभियान को वर्तमान गोरक्षपीठाधीश्वर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आगे बढ़ा रहे हैं।

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गोरक्षपीठ से भव्य हुई रंगोत्सव शोभायात्रा
शहर में भगवान नृसिंह रंगोत्सव शोभायात्रा की शुरुआत अपने प्रवास काल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक नानाजी देशमुख ने 1944 में की थी। गोरखनाथ मंदिर में होलिकादहन की राख से होली मनाने की परंपरा इसके काफी पहले से जारी थी। नानाजी का यह अभियान होली के अवसर पर फूहड़ता दूर करने के लिए था। नानाजी के अनुरोध पर इस शोभायात्रा का गोरक्षपीठ से भी गहरा नाता जुड़ गया। ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ के निर्देश पर महंत अवेद्यनाथ शोभायात्रा में पीठ का प्रतिनिधित्व करने लगे और यह गोरक्षपीठ की होली का अभिन्न अंग बन गया। 1996 से योगी आदित्यनाथ ने इसे अपनी अगुवाई में न केवल गोरखपुर बल्कि समूचे पूर्वी उत्तर प्रदेश में सामाजिक समरसता का विशिष्ट पर्व बना दिया। अब इसकी ख्याति मथुरा-वृंदावन की होली सरीखी है। लोगों को योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाले भगवान नृसिंह शोभायात्रा का इंतजार रहता है।


राख के तिलक से होती है गोरखनाथ मंदिर में होली की शुरुआत

गोरक्षपीठाधीश्वर की अगुवाई में गोरखनाथ मंदिर में होलिकोत्सव की शुरुआत होलिकादहन या सम्मत की राख से तिलक लगाने के साथ होती है। इस परंपरा में एक विशेष संदेश निहित होता है। होलिकादहन की राख से तिलक लगाने के पीछे का उद्देश्य भक्ति की शक्ति को सामाजिकता से जोड़ना है।

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