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Sawan 2023: भगवान बुद्ध के जीवन काल से जुड़ा है इस शिव मंदिर का इतिहास, यहां हर मुराद होती है पूरी

Sun, 09 Jul 2023 06:37 AM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी महराजगंज।
संवाद न्यूज एजेंसी महराजगंज। Published by: vivek shukla Updated Sun, 09 Jul 2023 06:37 AM IST
सार

जनश्रुतियों के अनुसार गौतम बुद्ध की माता गौतमी गर्भावस्था में इसी मंदिर के रास्ते से होकर लुम्बिनी (नेपाल) गईं थीं। यह मंदिर घनघोर जंगल के बीच में स्थित था। इस क्षेत्र के जमींदार अफजल खान ने डुग्गी-मुनादी लगवाकर लोगों को यहां बसने का आग्रह किया था।

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history of Kathara Shiva temple related to Lord Buddha in Maharajganj
महराजगंज कटहरा शिव मंदिर। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

प्राचीन शिव मंदिर कटहरा का इतिहास बहुत पुराना है। एक तरफ जहां नेपाल से सटे मिनी बाबा धाम के नाम से सुप्रसिद्ध इटहिया का प्राचीन शिवलिंग लाखों लोगों के आस्था का केंद्र है, तो वहीं दूसरी तरफ कभी घनघोर जंगलों में निकले कटहरा के शिवलिंग के प्रति जनपद में लोगों में असीम श्रद्धा है। कटहरा प्राचीन शिव मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है। प्राकृतिक सौंदर्य एवं वनों से आच्छादित यह शिव मंदिर बौद्ध कालीन है।

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जनश्रुतियों के अनुसार, गौतम बुद्ध की माता गौतमी गर्भावस्था में इसी मंदिर के रास्ते से होकर लुम्बिनी (नेपाल) गईं थीं। यह मंदिर घनघोर जंगल के बीच में स्थित था। इस क्षेत्र के जमींदार अफजल खान ने डुग्गी-मुनादी लगवाकर लोगों को यहां बसने का आग्रह किया था। लेकिन, कोई यहां बसना नहीं चाहता था, क्योंकि जंगल में काफी संख्या में हिंसक जानवर रहते थे। बाद में यहां के लोगों ने जंगलों को काटकर कृषि योग्य भूमि तैयार किया।
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मंदिर से करीब आठ सौ मीटर दक्षिण प्राचीन कुआं का भी प्रमाण मिलता है। कुएं से मंदिर तक सुरंग भी था। इसी सुरंग के रास्ते राजा भगवान भोलेनाथ का दर्शन करने जाते थे। लोगों का कहना है कि तीन सौ साल पहले अंधेरी रात में कुछ चोर मंदिर में घुसकर घंटा एवं अष्टधातुओं से बनी मूर्तियों को चुरा रहे थे। तभी उन्हें सर्प, बिच्छू एवं जहरीले जीव जंतुओं ने घेर लिया।

चोरों के सामने अंधेरा छा गया। चोर जब तक कुछ समझ पाते तब तक भोर हो गई। मंदिर के पुजारी जब पूजा करने आए तो देखा कुछ लोग जमीन पर छटपटा रहे हैं। उन्हें कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। चोर अपनी करनी पर बहुत ही शर्मिंदा हुए।
 

यह खबर जैसे ही राजा को हुई, उन्होंने चोरों को गिरफ्तार करवा लिया। हालांकि, बाद में चोरों द्वारा माफी मांगने और फिर ऐसी गलती न करने की बात पर उन्हें छोड़ दिया गया। मंदिर के उत्तर तरफ तीन विशाल पोखरे आज भी मौजूद हैं। बताया जाता है कि इस पोखरे में रानियां स्नान करने आती थीं। इतिहासकारों ने भी कटहरा शिव मंदिर का उल्लेख किया है।

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मंदिर के पुजारी महंत बहरैची दास ने बताया कि सच्चे दिल से आराधना करने वाले भक्तों की कामना भगवान शिव जरूर पूरी करते हैं। इस मंदिर परिसर में धर्मशाला का भी निर्माण कराया गया है। पूरे सावन भर यहां दूर दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं और जलाभिषेक करते हैं।

महाशिव रात्रि एवं सावन के महीने में यहां बहुत बड़ा मेला लगता है। यहां जनपद के अलावा गोरखपुर, देवरिया, बस्ती, कुशीनगर, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, बिहार एवं नेपाल राष्ट्र के भी श्रद्धालु भगवान शिव को जलाभिषेक करने आते हैं।

मंदिर पुजारी महंत बहरैची दास ने कहा कि सावन महीने के प्रत्येक सोमवार को रात 12 बजे से ही भगवान शिव को जलाभिषेक करने वाले श्रद्धालुओं की लंबी कतार लग जाती है। रात के 12 बजे साधु-संतों की पूजा के बाद मंदिर का कपाट खोल दिए जाते हैं। मेला समिति इसकी पूरी व्यवस्था करती है।

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मंदिर समिति के संरक्षक मिथिलेश सिंह ने कहा कि सावन माह में जलाभिषेक को लेकर श्रद्धालुओं में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। मंदिर परिसर की साफ सफाई कर दी गई है। श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न हो, मेला समिति के स्वयं सेवक इसका पूरा ख्याल रखते हैं।
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