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#हिंदीहैंहम: सहज व सरल ही नहीं, रोजगार की भाषा भी है हिंदी

Mon, 09 Aug 2021 10:52 AM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 09 Aug 2021 10:52 AM IST
सार

 वैश्वीकरण के दौर में हिंदी विश्व स्तर पर प्रभावशाली भाषा बनकर उभरी है। शिक्षाविदों ने अमर उजाला फाउंडेशन के ‘हिंदी हैं हम’ अभियान की तारीफ भी की और कहा कि यह हिंदी प्रेमियों को एक सूत्र में पिरोने का सटीक माध्यम बन रहा है।

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Hindi Hain Hum campaign starts series in amar ujala Gorakhpur
हिंदी हैं हम - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

हिंदी एक ऐसी भाषा है जो सहज व सरल होने के साथ ही रोजगार की भी भाषा है। हिंदी को विज्ञान और प्रौद्योगिकी की भाषा बनाने की जरूरत है। उच्च स्तरीय पाठ्यक्रम सामग्री और सरल शब्दावली अगर बनाई जाए तो हिंदी पढ़ने और लिखने के प्रति लोगों की रुचि बढ़ेगी।

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यह कहना है शिक्षाविदों का, जिनका मानना है कि वैश्वीकरण के दौर में हिंदी विश्व स्तर पर प्रभावशाली भाषा बनकर उभरी है। शिक्षाविदों ने अमर उजाला फाउंडेशन के ‘हिंदी हैं हम’ अभियान की तारीफ भी की और कहा कि यह हिंदी प्रेमियों को एक सूत्र में पिरोने का सटीक माध्यम बन रहा है।
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हिंदी को विज्ञान और प्रौद्योगिकी की भाषा बनाने की जरूरत
दीदउ गोरखपुर विश्वविद्यालय हिंदी विभाग आचार्य प्रो. प्रत्युष दुबे ने कहा कि किसी भी व्यक्ति का बौद्धिक विकास उसकी अपनी मातृभाषा में ही सर्वोत्तम ढंग से हो सकता है। व्यक्ति जो कुछ भी सोचता है वह अपनी मातृभाषा में ही सोचता है। हमें गर्व है कि हमारी मातृभाषा और हमारी कर्म भाषा दोनों हिंदी ही है।
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आज आवश्यकता है कि हिंदी को विज्ञान और प्रौद्योगिकी की भाषा भी बनाया जाए। जब तक अपनी भाषा में इस क्षेत्र के लोग विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को ठीक ढंग से नहीं समझेंगे, तब तक उनका विकास या यह कहें कि इस क्षेत्र का भी समुचित विकास संभव नहीं होगा। आज का युग कंप्यूटर का है। कंप्यूटर में भी ऐसे प्रोग्रामिंग और सॉफ्टवेयर निर्मित होने चाहिए जो सामान्य जन के लिए सर्व सुलभ और सर्वज्ञान से संपन्न हों।
 

हिंदी में जो लिखते हैं, वही पढ़ते हैं

 सेंट एंड्रयूज कॉलेज डॉ. सुशील राय ने कहा कि हिंदी बहुत ही सहज और सरल भाषा है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें जो लिखा जाता है, वही पढ़ा जाता है। इसलिए यह वैज्ञानिक भाषा है। आज सूचना और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हिंदी का प्रयोग बड़ी मात्रा में हो रहा है। वैश्वीकरण के दौर में हिंदी विश्व स्तर पर प्रभावशाली भाषा बनकर उभरी है। ज्ञान-विज्ञान की पुस्तकें आज हिंदी में बड़ी संख्या में लिखी जा रहीं हैं। हिंदी का प्रयोग संचार माध्यमों और सोशल मीडिया में लगातार बढ़ रहा है।
 
रोजगार की भी भाषा है हिंदी
एमपीपीजी कॉलेज जंगल धूसड़ के प्राचार्य डॉ. प्रदीप राव ने कहा कि सबसे चिंता का विषय यह है कि आज हिंदी भाषी क्षेत्र में अशुद्ध हिंदी बोली और लिखी भी जा रही है। हिंदी ही एक मात्र भाषा है जो आसानी से समझ में आती है। सुखद पहलू यह है कि नई शिक्षा नीति में क्षेत्रीय भाषा को प्रमुखता दिया गया है। साइंस और इंजीनियरिंग की पुस्तकें भी हिंदी में अनुवाद करके प्रकाशित करनी चाहिए। इससे हिंदी माध्यम से पढ़ाई करने वालों को बेहतर समझ होगी। हिंदी रोजगार की भी भाषा है। इसके माध्यम से हम भाषा अधिकारी, अनुवादक, शिक्षक जैसे विभिन्न कार्यों को करके हिंदी की सेवा कर सकते हैं।

स्तरीय पाठ्य सामग्री और सहज शब्दावली की जरूरत
मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के प्रो. डॉ. अभिजीत मिश्रा ने कहा कि हिंदी में अध्ययन-अध्यापन में सबसे बड़ी बाधा स्तरीय पाठ्य सामग्री की अनुपलब्धता और सहज शब्दावली है। यदि ये दो बाधाएं दूर हो जाएंगे तो हिंदी में पढ़ना और पढ़ाना आसान हो जाएगा। हिंदी को रोजगार की भाषा बनाना जरूरी है। अगर हिंदी में पढ़कर भी रोजगार मिले, तो किसी को हिंदी माध्यम से पढ़ने में कोई समस्या नहीं होगी। इसलिए हिंदी में स्तरीय पाठ्य सामग्री और सहज शब्दावली की उपलब्धता की दिशा में कार्य करने की जरूरत है। मातृभाषा की जरूरत सिर्फ बोलचाल के लिए ही नहीं हैं बल्कि उसका संबंध मनुष्य के मनोविज्ञान से है। स्वाधीनता की चेतना से भी है।
 
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