खुशखबर: गोरखपुर से भी चलेगी हाईस्पीड वाली वंदे भारत ट्रेन, तीन वर्षों में एनईआर को मिलेगी खास सौगात
गोरखपुर के पूर्व प्रमुख मुख्य परिचालन प्रबंधक पूर्वोत्तर रेलवे राकेश त्रिपाठी ने कहा कि देश भर में 400 वंदे भारत ट्रेन चलाने से यात्रियों को हाईस्पीड वाली ट्रेनें हर रूट पर मिलेंगी। गोरखपुर होकर छपरा-लखनऊ के लिए वंदे भारत ट्रेन चलने की संभावना बढ़ी है।
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विस्तार
बजट में देश भर में 400 वंदे भारत ट्रेन चलाने के एलान से गोरखपुर से इस हाईस्पीड ट्रेन के चलने की संभावना बढ़ गई है। जानकारों के मुताबिक पूर्वोत्तर रेलवे को तीन वर्षों में 15 से 20 वंदे भारत मिलने की उम्मीद है।
वंदेभारत ट्रेन को चलाने में गति की भी अड़चन नहीं है। पूर्वोत्तर रेलवे में वाराणसी कैंट से रामबाग-प्रयागराज रूट से होकर चल रही है। वंदे भारत की अधिकतम गति 130 किमी प्रति घंटे है। गोरखपुर से लखनऊ रूट पर इस स्पीड से ट्रेनें चल सकती हैं।
पूर्वोत्तर रेलवे के पूर्व जनसंपर्क अधिकारी एसपी मिश्रा कहते हैं, गोरखपुर से हाईस्पीड वाली ट्रेन की बहुत जरूरत है। बजट देखकर वंदे भारत के चलने की उम्मीद बढ़ गई है। पूर्वोत्तर रेलवे को तीन वर्ष में 15 से 20 वंदेभारत ट्रेन मिल सकती है। इससे लोगों को काफी सहूलियत होगी।
रेलवे स्टेशन से टेराकोटा को देश भर में भेजने का होगा इंतजाम
बजट में वन स्टेशन-वन प्रोडक्ट स्कीम के आने से स्थानीय उत्पादों को पंख लगेंगे। सप्लाई की चेन बनेगी तो हर जगह आसानी से टेराकोटा पहुंचेगा। देश भर में टेराकोटा को भेजने की व्यवस्था रेलवे स्टेशन से ही की जाएगी। इसके लिए स्टेशन पर स्टॉल भी लगेंगे। ताकि अगर कोई खरीदना चाहे तो स्टेशन पर ही खरीदकर उसे भेज दे।
तीन परियोजनाओं के लिए बजट की उम्मीद
रेलवे को अब पिंक बुक के आने का इंतजार है। पिंक बुक से ही स्पष्ट होगा कि पूर्वोत्तर रेलवे को कितना बजट मिला है। कौन सी नई परियोजनाएं स्वीकृत हुईं हैं और कौन सी योजना ठंडे बस्ते में डाल दी गई है। लेकिन, तीन परियोजनाओं नई रेल लाइन सहजनवां- दोहरीघाट और खलीलालाबाद- बहराइच रेल लाइन, डोमिनगढ़-कुसम्हीं तीसरी लाइन के लिए बजट मिलने की उम्मीद है।
एक्सपर्ट कमेंट
गोरखपुर के पूर्व प्रमुख मुख्य परिचालन प्रबंधक पूर्वोत्तर रेलवे राकेश त्रिपाठी ने कहा कि देश भर में 400 वंदे भारत ट्रेन चलाने से यात्रियों को हाईस्पीड वाली ट्रेनें हर रूट पर मिलेंगी। गोरखपुर होकर छपरा-लखनऊ के लिए वंदे भारत ट्रेन चलने की संभावना बढ़ी है। अगले तीन वर्षों में 100 प्रधानमंत्री गति शक्ति कार्गो टर्मिनल भी स्थापित किए जाएंगे।
गांवों तक लोगों को पार्सल पहुंचाने की दिशा में डाक विभाग से रेलवे खुद को इंटीग्रेट करेगा। एक स्टेशन-एक उत्पाद की अवधारणा भी अच्छी है। सुरक्षा और क्षमता वृद्धि के लिए वर्ल्ड क्लास तकनीक कवच के तहत 2,000 किलोमीटर का रेल नेटवर्क तैयार किया जाएगा। इसमें पीपीपी मॉडल की भूमिका अहम होगी। कुछ स्टेशनों को एयरपोर्ट के तर्ज पर विश्वस्तरीय बनाए जाने की भी संभावनाएं हैं।