{"_id":"64c56b7c33971692f2018103","slug":"health-problem-in-eye-flu-gorakhpur-news-c-7-gkp1038-256166-2023-07-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gorakhpur News: आंखें हो जा रहीं लाल...खास चश्मा पहनकर स्कूल जा रहे बच्चे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gorakhpur News: आंखें हो जा रहीं लाल...खास चश्मा पहनकर स्कूल जा रहे बच्चे
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गोरखपुर। बच्चों में आईफ्लू के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए जिला प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है। आईफ्लू से आंखें लाल हो जा रही हैं। इसलिए बच्चे खास चश्मा पहनकर स्कूल जा रहे हैं। स्कूलों की ओर से भी बच्चों और उनके अभिभावकों को सजग किया जा रहा है।
केंद्रीय विद्यालय एयरफोर्स में विद्यार्थियों और अभिभावकों के व्हाट्सएप ग्रुप पर मैसेज देकर बताया गया है कि यदि किसी बच्चे को आईफ्लू हो जाए या उनके परिवार में कोई संक्रमित हो तो ऐसे बच्चे कतई स्कूल न आएं। समस्या को देखते हुए आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की टीम लोगों को जागरूक कर रही है।
शहर के नेत्र सर्जन डॉ. जीके गुप्ता ने बताया कि आई फ्लू छूने से फैलता है। हाथों को साफ रखने और आंखों पर हाथ न लगाने से यह बीमारी रुकेगी। इसलिए बच्चे प्रोटेक्टिव ग्लास (सुरक्षात्मक चश्मे) पहनकर स्कूल जा रहे हैं। ये चश्मे बाजार में 50 रुपये से लेकर पांच सौ रुपये कीमत तक में उपलब्ध हैं। अधिकांश बच्चे 50 से 100 रुपये वाले काले ग्लास वाले चश्मे का प्रयोग कर रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक आई फ्लू होने पर चमक आंखों में चुभती है। आंख खोलने में दिक्कत आती है। काले ग्लास से चमक का असर कम हो जाता है। दूसरे, बार बार आंखों पर हाथ नहीं जाता है। इसलिए संक्रमण फैलने का खतरा नहीं होता है।
विज्ञापन
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण कर रहा सजग
आईफ्लू फैलने की वजह से जिला प्रशासन की ओर से भी सजगता बरतने के निर्देश दिए जा रहे हैं। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ओर से सोशल मीडिया पर इस संबंध में जानकारी देकर लोगों को सजग रहने के लिए कहा जा रहा है। ताकि बीमारी को तेजी से फैलने से रोका जा सके।
आईफ्लू होने पर मरीज को करें अलग
डॉक्टरों की सलाह है कि यदि परिवार में किसी को आईफ्लू हो जाए तो मरीज को अलग कर दें, यानि कि उसे आइसोलेट कर दें। उसके कपड़े, चादर, तौलियां सहित अन्य कपड़ों को धोते रहें। यदि किसी बच्चे को आईफ्लू हो गया है तो उसे घर पर ही रखें। स्कूल जाने से समस्या बढ़ सकती है।
इन लक्षणों पर हो जाएं सतर्क
डॉक्टरों के मुताबिक आंखों में किसी तरह की जलन होने और देखने में परेशानी होने पर सजग हो जाएं। आईफ्लू वायरस और बैक्टीरिया दोनों से होता है। बैक्टीरियल संक्रमण होने पर आंखों में गाढ़ा चिपचिपा पदार्थ निकलता है। जबकि वायरस की वजह से आंखों में चुभन, जलन और पानी निकलने की शिकायत होती है। इसलिए दोनों ही प्रकार के लक्षण पहचान करके डॉक्टर की सलाह के बाद ही आईड्राॅप डालना उचित रहेगा।
ऐसे करें बचाव
- अपने हाथों को हमेशा साफ सुथरा रखें।
- हाथों को धोने के बाद ही आंखों को छूएं, प्रयास करें कि आंख न छूना पड़े।
- लोगों से हाथ न मिलाएं, जलन या खुजली होने और आंखों में लाली आने पर तत्काल डॉक्टर की सलाह लें।
- आंखों को गुनगुने पानी से साफ करें।
- आंखों को साफ करने के लिए किसी साफ और सूती कपड़े का प्रयोग करें
- काला चश्मा पहनकर ही घर से बाहर निकलें।
आईफ्लू तेजी से फैल रहा है। इसको देखते हुए लोगों को सजग किया जा रहा है। आईफ्लू फैलने के कारण, बचाव और सावधानी के संबंध में सोशल मीडिया के जरिए जानकारी दी जा रही है। - गौतम गुप्ता, आपदा विशेषज्ञ, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, गोरखपुर
इस मौसम में आईफ्लू का संक्रमण तेजी से फैलता है। आईफ्लू के लक्षण नजर आने पर तत्काल डॉक्टर की सलाह लें। अपने मन से कोई आईड्राॅप आंखों में न डालें। इससे परेशानी बढ़ सकती है।
रामकुमार जायसवाल, नेत्र रोग विशेषज्ञ, बीआरडी मेडिकल कॉलेज
0000
विज्ञापन
केंद्रीय विद्यालय एयरफोर्स में विद्यार्थियों और अभिभावकों के व्हाट्सएप ग्रुप पर मैसेज देकर बताया गया है कि यदि किसी बच्चे को आईफ्लू हो जाए या उनके परिवार में कोई संक्रमित हो तो ऐसे बच्चे कतई स्कूल न आएं। समस्या को देखते हुए आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की टीम लोगों को जागरूक कर रही है।
विज्ञापन
शहर के नेत्र सर्जन डॉ. जीके गुप्ता ने बताया कि आई फ्लू छूने से फैलता है। हाथों को साफ रखने और आंखों पर हाथ न लगाने से यह बीमारी रुकेगी। इसलिए बच्चे प्रोटेक्टिव ग्लास (सुरक्षात्मक चश्मे) पहनकर स्कूल जा रहे हैं। ये चश्मे बाजार में 50 रुपये से लेकर पांच सौ रुपये कीमत तक में उपलब्ध हैं। अधिकांश बच्चे 50 से 100 रुपये वाले काले ग्लास वाले चश्मे का प्रयोग कर रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक आई फ्लू होने पर चमक आंखों में चुभती है। आंख खोलने में दिक्कत आती है। काले ग्लास से चमक का असर कम हो जाता है। दूसरे, बार बार आंखों पर हाथ नहीं जाता है। इसलिए संक्रमण फैलने का खतरा नहीं होता है।
विज्ञापन
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण कर रहा सजग
आईफ्लू फैलने की वजह से जिला प्रशासन की ओर से भी सजगता बरतने के निर्देश दिए जा रहे हैं। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ओर से सोशल मीडिया पर इस संबंध में जानकारी देकर लोगों को सजग रहने के लिए कहा जा रहा है। ताकि बीमारी को तेजी से फैलने से रोका जा सके।
आईफ्लू होने पर मरीज को करें अलग
डॉक्टरों की सलाह है कि यदि परिवार में किसी को आईफ्लू हो जाए तो मरीज को अलग कर दें, यानि कि उसे आइसोलेट कर दें। उसके कपड़े, चादर, तौलियां सहित अन्य कपड़ों को धोते रहें। यदि किसी बच्चे को आईफ्लू हो गया है तो उसे घर पर ही रखें। स्कूल जाने से समस्या बढ़ सकती है।
इन लक्षणों पर हो जाएं सतर्क
डॉक्टरों के मुताबिक आंखों में किसी तरह की जलन होने और देखने में परेशानी होने पर सजग हो जाएं। आईफ्लू वायरस और बैक्टीरिया दोनों से होता है। बैक्टीरियल संक्रमण होने पर आंखों में गाढ़ा चिपचिपा पदार्थ निकलता है। जबकि वायरस की वजह से आंखों में चुभन, जलन और पानी निकलने की शिकायत होती है। इसलिए दोनों ही प्रकार के लक्षण पहचान करके डॉक्टर की सलाह के बाद ही आईड्राॅप डालना उचित रहेगा।
ऐसे करें बचाव
- अपने हाथों को हमेशा साफ सुथरा रखें।
- हाथों को धोने के बाद ही आंखों को छूएं, प्रयास करें कि आंख न छूना पड़े।
- लोगों से हाथ न मिलाएं, जलन या खुजली होने और आंखों में लाली आने पर तत्काल डॉक्टर की सलाह लें।
- आंखों को गुनगुने पानी से साफ करें।
- आंखों को साफ करने के लिए किसी साफ और सूती कपड़े का प्रयोग करें
- काला चश्मा पहनकर ही घर से बाहर निकलें।
आईफ्लू तेजी से फैल रहा है। इसको देखते हुए लोगों को सजग किया जा रहा है। आईफ्लू फैलने के कारण, बचाव और सावधानी के संबंध में सोशल मीडिया के जरिए जानकारी दी जा रही है। - गौतम गुप्ता, आपदा विशेषज्ञ, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, गोरखपुर
इस मौसम में आईफ्लू का संक्रमण तेजी से फैलता है। आईफ्लू के लक्षण नजर आने पर तत्काल डॉक्टर की सलाह लें। अपने मन से कोई आईड्राॅप आंखों में न डालें। इससे परेशानी बढ़ सकती है।
रामकुमार जायसवाल, नेत्र रोग विशेषज्ञ, बीआरडी मेडिकल कॉलेज
0000