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बीआरडी आग प्रकरण: महीने भर में न जेई ने किया सर्वे, न मरीजों को मिला वार्ड
Thu, 31 Aug 2023 01:06 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 31 Aug 2023 01:06 PM IST
सार
डीएम ने मेडिकल कॉलेज इलाके के विद्युत उपकेंद्र के जेई को तत्काल प्रभाव से मेडिकल कॉलेज में संबद्ध करने का निर्देश दिया था। इस जेई को आग की घटना से प्रभावित वार्ड नंबर 14 समेत पूरे परिसर में बिजली उपकरणों का निरीक्षण कर एक रिपोर्ट बनाकर देना था।
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बीआरडी में लगी आग। फाइल
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
गोरखपुर बीआरडी मेडिकल कॉलेज में आग से सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बिजली उपकरणों की नए सिरे से जांच का सुझाव महीने भर बाद भी फाइलों में ही है। वजह यह कि जिला प्रशासन के निर्देश के बावजूद बिजली निगम से किसी जेई को अभी तक मेडिकल कॉलेज में संबद्ध ही नहीं किया गया है। वहीं मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने भी इस मामले में कोई पहल नहीं की है।
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बीते 27 जुलाई की रात करीब 10 बजे बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग की इमरजेंसी में आग लग गई थी। डीएम कृष्णा करुणेश ने मामले की जांच के लिए तकनीकी समिति का गठन किया था। समिति ने अपनी रिपोर्ट में मेडिकल कॉलेज के विद्युत उपकरणों व अग्निशमन यंत्रों को खराब बताते हुए इसमें सुधार का सुझाव दिया था। इस पर मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना था कि विद्युत अभियंता का पद पांच साल से रिक्त होने के चलते दिक्कत आ रही है।
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डीएम ने मेडिकल कॉलेज इलाके के विद्युत उपकेंद्र के जेई को तत्काल प्रभाव से मेडिकल कॉलेज में संबद्ध करने का निर्देश दिया था। इस जेई को आग की घटना से प्रभावित वार्ड नंबर 14 समेत पूरे परिसर में बिजली उपकरणों का निरीक्षण कर एक रिपोर्ट बनाकर देना था। इससे पता लग सके कि बिजली उपकरण किस स्थिति में है और कितने उपकरणों को बदलने की जरूरत है।
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जिला प्रशासन ने जांच रिपोर्ट व सुझाव से शासन को भी अवगत करा दिया था, लेकिन वास्तव में अभी इस पर काम शुरू ही नहीं हुए हैं। मेडिकल कॉलेज के बिजली अभियंता के पद पर कोई तैनात ही नहीं है। मेडिकल कॉलेज के सिविल वर्क के जेई बलवीर ने बताया कि हमारी आंतरिक जांच चल रही है, लेकिन बिजली वाले जेई ने अभी कार्य भार ग्रहण नहीं किया है, जिसके कारण बिजली उपकरणों की जांच अभी शुरू नहीं हुई है।
जांच टीम ने दिए हैं ये सुझाव
- प्राथमिक अग्निशमन उपकरणों का रखरखाव एवं मरम्मत मानक के अनुरूप हो और क्रियाशील रहे।
- फायर हाइडेंट, होजरील, लैंडिंग वॉल, फायर अलार्म तथा अन्य सुरक्षा उपकरण क्रियाशील रखे जाएं।
- संपूर्ण मेडिकल कॉलेज परिसर का किसी अन्य एजेंसी से फायर ऑडिट कराई जाए। हर दो साल में एक बार फायर ऑडिट जरूर कराएं।
- प्रत्येक छह माह (जनवरी एवं जुलाई) में अग्निशमन अभियंता से मेडिकल कॉलेज परिसर में लगे सुरक्षा उपकरणों की जांच कराएं। फायर मॉक ड्रिल कराकर कर्मचारियों को भी अग्निशमन उपकरणों को चलाने का प्रशिक्षण दिया जाए।
- परिसर में एक प्रशिक्षित अग्निसुरक्षा अधिकारी नियुक्त किया जाए। इसके अलावा अग्निशमन उपकरणों को चलाने के लिए फायर पंप ऑपरेटर की नियुक्ति की जाए।
अभी तक वार्ड भी चालू नहीं हुआ
आग लगने से जले वार्ड नंबर 14 की मरम्मत का कार्य भी अब तक पूरा नहीं हो पाया है। रंगाई-पुताई व फर्श मरम्मत समेत कई कार्य अब भी बाकी हैं। इसके अलावा जले बेड व अन्य उपकरणों को भी बदला जाना है। मेडिकल काॅलेज प्रशासन ने इसे 15 दिन में पूरा करके दोबारा चालू कराने की बात कही थी, लेकिन अभी कुछ दिन और लग सकते हैं। फिलहाल इस वार्ड के मरीजों को अलग-अलग वार्डों में जगह दी जा रही है। वार्ड नंबर 11 में मेडिकल इमरजेंसी चल रही है।
मेडिकल कॉलेज के वार्ड नंबर 14 में शार्ट सर्किट की वजह से आग लगी थी। कॉलेज में विद्युत अभियंता का पद रिक्त है। हमने जिला प्रशासन से एक विद्युत अभियंता को संबद्ध करने के लिए पत्र भेजा था। जिला प्रशासन की तरफ से बिजली निगम के एक अवर अभियंता को संबद्ध किए जाने की जानकारी मिली थी। वार्ड की मरम्मत का कार्य चल रहा है। जल्दी ही इसे चालू करा दिया जाएगा। -डॉ. गणेश कुमार, प्राचार्य, बीआरडी मेडिकल कॉलेज
मेडिकल कॉलेज प्रशासन की तरफ से बताया गया है कि डीएम ने एक अवर अभियंता को संबद्ध करने का निर्देश दिया है। हालांकि, संबद्धता का कोई पत्र अभी तक हमें नहीं मिला है। इसलिए किसी अभियंता को वहां संबद्ध नहीं किया गया है। - लोकेंद्र बहादुर सिंह, अधीक्षण अभियंता विद्युत निगम।