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दो व्यापारियों की करतूत: गेहूं के खेत में शोरूम दिखाकर बेच दिया पांच करोड़ का प्लाइवुड, GST टीम ने पकड़ा

Mon, 01 May 2023 10:52 AM IST
vivek shukla रोहित सिंह, गोरखपुर।
रोहित सिंह, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 01 May 2023 10:52 AM IST
सार

एडिश्नल कमिश्नर ग्रेड टू देवमणि शर्मा ने कहा कि बोगस फर्मों के सहारे फर्जी व्यापार करने वाले कारोबारियों की सूची तैयार की गई है। व्यापारियों को अपने व्यापार को लेकर सतर्कता बरतनी चाहिए। आगे आकर खुद भी ऐसे फर्जी कारोबार करने वालों की सूचना जीएसटी में दें। इससे उनका व्यापार सुरक्षित रहेगा।

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GST SIB team caught plywood business in fake way
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : Istock

विस्तार

गेहूं के खेत में फर्जी शोरूम दिखाकर एक प्लाइवुड व्यापारी ने पांच करोड़ रुपये का प्लाइवुड बेच दिया। उसने यह प्लाइवुड चौरीचौरा के मेसर्स कन्हैया ट्रेडर्स से 2.48 करोड़ रुपये में खरीदा था, जो कि पहले से ही फर्जी फर्म बनाकर बिना इलेक्ट्रानिक वे (ईवे) बिल के ही व्यापार करते पाए गए।

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अब जीएसटी की एसआईबी टीम को यह जानकारी मिली है कि पांच करोड़ की प्लाइवुड सिद्धार्थनगर में बेची गई है। टीम अब खरीदारी करने वाली फर्म की तलाश में है। शहर के कई प्लाइवुड कारोबारी भी निशाने पर हैं। जल्द ही इन पर कार्रवाई हो सकती है।
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जीएसटी के एसआईबी की जांच में सामने आया कि चौरीचौरा के कन्हैया ट्रेडर्स और कुशीनगर के संतोष ट्रेडर्स एक ही ढर्रे पर फर्जी व्यापार कर रहे थे। संतोष ने कुशीनगर, रामकोला में जमीन के मालिक को बिना बताए ही उसकी कृषि भूमि पर जीएसटी के रिकार्ड में फर्जी शोरूम दिखा दिया। इसी के माध्यम से बिना अधिकारिक रिकॉर्ड में आए व्यापार करते हुए लंबे समय से कर चोरी कर रहे थे। यह फर्म पहले भी कर चोरी के मामले में पकड़ी जा चुकी है।

एडिश्नल कमिश्नर ग्रेड टू देवमणि शर्मा ने कहा कि बोगस फर्मों के सहारे फर्जी व्यापार करने वाले कारोबारियों की सूची तैयार की गई है। व्यापारियों को अपने व्यापार को लेकर सतर्कता बरतनी चाहिए। आगे आकर खुद भी ऐसे फर्जी कारोबार करने वालों की सूचना जीएसटी में दें। इससे उनका व्यापार सुरक्षित रहेगा।

ऐसे होती है कर की चोरी

फर्जी काम करने वाले अपने व्यापार में बोगस फर्म का सहारा लेते हैं। इसके लिए ऑनलाइन ही खतौनी से खेत का कागज निकालते हैं। इसमें जमीन का क्षेत्रफल, मालिक का नाम उसके पते के साथ पूरी डिटेल होती है। इसी आधार पर धोखेबाज फर्जी तरीके से उक्त नाम को पहला पक्ष और खुद या अपने किसी परिचित को दूसरा पक्ष बनाकर किरायानामा तैयार कर लेते हैं।

इसी आधार पर उस पते पर अपने व्यवसाय का विवरण देते हुए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में पंजीकरण करवा लेते हैं। इसी फर्म के आधार पर बिना ई-वे बिल के ही खरीदारी करते और बेचते हैं। ऐसे में कर चोरी करते हुए सीधे लाभ लेते और सहयोगी व्यापारी को भी पहुंचाते हैं।

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एक मिनट के अंतराल पर बना दोनों किरायानामा
डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि उक्त प्रपत्रों को लेकर 100 रुपये के स्टैंप पर ऑनलाइन किरायेनामे की सहमति बनती है। दोनों किरायानामा सीतापुर से बना था। इसके बनने में सिर्फ एक मिनट का ही अंतराल था। प्रपत्रों की जांच की गई तो यह तथ्य खुले।

50 हजार रुपये से अधिक की खरीदारी पर ई-वे बिल जरूरी
किसी भी व्यापार में 50 हजार रुपये से अधिक के सामान को खरीदते या बेचते वक्त ई-वे बिल बनना अनिवार्य होता है। इससे फर्म की खरीदारी और सालाना आर्थिक संग्रह का रिकार्ड जीएसटी के पास आ जाता है। लेकिन, बिना ई-वे बिल के सामान खरीदना जीएसटी के अपराध (कर अपवंचन) में आता है।


 

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