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राहत : बढ़ गया गोरखपुर शहर का भूमिगत जलस्तर, जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ
Sun, 26 Dec 2021 10:53 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sun, 26 Dec 2021 10:53 AM IST
सार
पिछले वर्ष की तुलना में मानसून से पहले और बाद में दो मीटर तक ज्यादा भूगर्भ जलस्तर हुआ है। हालांकि ,नौसड़ और सिक्टौर में भूमिगत जलस्तर में मामूली गिरावट भी दर्ज की गई है। विशेषज्ञ इसे बेहतर संकेत मान रहे हैं।
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गोरखपुर शहर।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
गोरखपुर शहर के विभिन्न इलाकों में भूमिगत जलस्तर दो मीटर तक बढ़ गया है। भूमिगत जल का स्तर न सिर्फ मानसून के बाद, बल्कि मानसून से पहले भी बेहतर हुआ है। भूमिगत जलस्तर को बेहतर बनाने को लेकर, विभिन्न विभाग और कई एनजीओ अपने-अपने स्तर पर कवायद कर रहे थे। उनकी मेहनत रंग ला रही है।
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उत्तर प्रदेश भूगर्भ जल विभाग की ओर से जारी प्री-मानसून (मानसून से पहले) और पोस्ट-मानसून (मानसून के बाद) के आंकड़ों के अनुसार शहर में भूगर्भ जलस्तर में बढ़ोतरी हुई है। हालांकि ,नौसड़ और सिक्टौर में भूमिगत जलस्तर में मामूली गिरावट भी दर्ज की गई है। विशेषज्ञ इसे बेहतर संकेत मान रहे हैं। जानकारों का कहना है कि पिछले दो वर्षों से जिले में सामान्य बारिश हो रही है, इसका सकारात्मक असर, भूगर्भ जलस्तर पर पड़ा है।
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उत्तरप्रदेश भूगर्भ जल विभाग के प्राविधिक सहायक दिनेश चंद्र जायसवाल ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में मानसून से पहले और मानसून के बाद के भूमिगत जलस्तर में बढ़ोतरी हुई है। इस संबंध में शासन को रिपोर्ट भेज दी गई है।
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मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के शिक्षक डॉ. गोविंद पांडेय ने बताया कि शहर के भूमिगत जलस्तर में बढ़ोतरी होना बेहतर संकेत है। विभिन्न विभागों द्वारा रेन वाटर हार्वेस्टिंग, हरित आच्छादन जैसे कार्यों की वजह से यह संभव हो सका है। इस स्थिति को बनाए रखने की जरूरत है, क्योंकि शहर में भूमिगत जल का दोहन काफी ज्यादा हो रहा है। अगर इसमें लापरवाही बरती गई तो हम पहले वाली स्थिति में पहुंच जाएंगे। शहर के कुछ इलाकों में जलस्तर कम होने की वजह से कुछ इलाकों में गड्ढे में हैंडपंप लगाने पड़ रहे थे।