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खिलाड़ियों का दर्द: कैसे बनेंगे मेजर ध्यानचंद्र, जब सुविधाएं ही नहीं

Mon, 01 May 2023 05:07 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 01 May 2023 05:07 PM IST
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ground is not fixed for playing hockey in Gorakhpur
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : amar ujala
गोरखपुर शहर के रीजनल स्टेडियम में हॉकी खिलाड़ियों के अभ्यास के लिए मैदान निर्धारित नहीं है। टर्फ की बजाय घास के मैदान पर सुबह शाम मिलाकर करीब 60 से अधिक खिलाड़ी हॉकी की प्रैक्टिस करते हैं। मैदान में नेट नहीं लगा है, जिस नाते वहां खेलने वाले अन्य खिलाड़ियों के चोटिल होने की संभावना बनी रहती है।
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खिलाड़ियों ने बताया कि स्टेडियम में चेंजिंग रूम की व्यवस्था नहीं है। जिससे कपड़े बदलने में परेशानी होती है। शौचालय तो है लेकिन, वह भी गंदा रहता है। उसमें जाकर ही कपड़े बदलने पड़ते हैं। खिलाड़ियों ने कहा कि अभ्यास के लिए किट नहीं दी जाती है। जब कोई खिलाड़ी मैच खेलने कहीं बाहर जाता है तब किट दी जाती है।
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बोले खिलाड़ी
खिलाड़ी मोहम्मद आसिफ ने कहा कि मेरे पिता बर्फखाने में काम करते हैं। शौक के चलते मैं हॉकी खेलता हूं। खुद के पास से मैंने हॉकी का किट खरीदा है। स्टेडियम की ओर से कोई किट नहीं दिया गया है।

खिलाड़ी दक्ष ने कहा कि मेरी मौसी पुलिस में हैं और हॉकी खेलती हैं। वहीं से हॉकी खेलने का जुनून चढ़ा। हाॅकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की तरह बनना चाहता हूं। स्टेडियम में खिलाड़ियों को मूल सुविधाएं मिल जाती तो बेहतर होता।

खिलाड़ी मुस्कान ने कहा कि महिला खिलाड़ियों के लिए स्टेडियम में कपड़े बदलने के लिए कक्ष नहीं है। लड़के तो ग्राउंड में बदल लेते हैं पर हमें दिक्कत होती है।




खिलाड़ी पूजा ने कहा कि ढ़ाई साल से हॉकी खेल रही हूं, प्रदेश स्तर पर भी मैच खेला है। नेशनल व इंटरनेशनल मैच के हिसाब से ग्राउंड नहीं है। इंतजार है कि जल्द ही खिलाड़ी हित में व्यवस्थाएं दुरुस्त हों।

हॉकी कोच नेहा सिंह ने कहा कि हर महीने अभ्यास करने वाले खिलाड़ियों को बॉल दिया जाता है। किट की व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए प्रक्रिया जारी है। फंड मिलते ही इन्हें सुनिश्चित किया जाएगा। चेंजिंग कक्ष बनाने के लिए भी कार्य किया जा रहा है।

 
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